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यूपी में तीसरी बार BJP सरकार बनी तो लागू होगा UCC, अमित शाह का बड़ा बयान

लखनऊ। उत्तर प्रदेश में वर्ष 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले भारतीय जनता पार्टी ने अपनी राजनीतिक और संगठनात्मक तैयारियां तेज कर दी हैं। शुक्रवार, 30 अक्टूबर को राजधानी लखनऊ में आयोजित भाजपा की प्रदेश कार्यसमिति की बैठक में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने समान नागरिक संहिता (UCC) को लेकर महत्वपूर्ण बयान दिया। सामने आई जानकारी के अनुसार, शाह ने कहा कि वर्ष 2027 में भाजपा लगातार तीसरी बार सरकार बनाती है तो उत्तर प्रदेश में समान नागरिक संहिता लागू की जाएगी। उन्होंने कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए प्रदेश में भाजपा सरकार की मजबूती का दावा किया और कहा कि सरकार 'अंगद के पांव' की तरह अडिग है, जिसे कोई हिला नहीं सकता। शाह ने पार्टी नेताओं और कार्यकर्ताओं से आपसी मतभेद, नाराजगी और मनमुटाव भुलाकर विधानसभा चुनाव की तैयारियों में जुटने की अपील की। हालांकि बैठक में UCC लागू करने और 'अंगद के पांव' संबंधी इन विशिष्ट बयानों की स्वतंत्र आधिकारिक पुष्टि अभी उपलब्ध नहीं है। बैठक का आयोजन और इसका चुनावी उद्देश्य प्रकाशित रिपोर्टों से पुष्ट है।
लखनऊ के डॉ. राम मनोहर लोहिया राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय में आयोजित प्रदेश कार्यसमिति की बैठक में भाजपा के वरिष्ठ नेताओं और पदाधिकारियों ने हिस्सा लिया। कार्यक्रम का उद्घाटन केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने किया। इस दौरान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, दोनों उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य और ब्रजेश पाठक, प्रदेश भाजपा अध्यक्ष पंकज चौधरी, प्रदेश संगठन महामंत्री धर्मपाल सिंह तथा प्रदेश प्रभारी विनोद तावड़े मौजूद रहे।
बैठक को वर्ष 2027 के विधानसभा चुनाव की तैयारियों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। प्रदेशभर से लगभग 2,850 पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं को आमंत्रित किया गया था। पार्टी का उद्देश्य संगठनात्मक स्थिति की समीक्षा करना, बूथ स्तर पर तैयारियों को मजबूत बनाना और आगामी चुनाव के लिए कार्ययोजना तैयार करना है।
प्राप्त विवरण के अनुसार, अमित शाह ने अपने संबोधन में समान नागरिक संहिता को भाजपा की प्रमुख नीतिगत प्राथमिकताओं में शामिल बताया। उन्होंने वर्ष 2027 में पार्टी की सरकार बनने पर उत्तर प्रदेश में UCC लागू करने की बात कही।
समान नागरिक संहिता का विषय लंबे समय से राष्ट्रीय राजनीति में चर्चा का केंद्र रहा है। इसका उद्देश्य विवाह, तलाक, उत्तराधिकार और पारिवारिक संबंधों से जुड़े कुछ नागरिक मामलों में अलग-अलग समुदायों पर लागू व्यक्तिगत कानूनों के स्थान पर समान कानूनी व्यवस्था विकसित करना है।
भारतीय संविधान के अनुच्छेद 44 में राज्य को नागरिकों के लिए समान नागरिक संहिता सुनिश्चित करने का प्रयास करने का निर्देश दिया गया है। हालांकि यह संविधान के नीति-निर्देशक तत्वों का हिस्सा है और इसे लागू करने के लिए विधायी तथा प्रशासनिक प्रक्रिया आवश्यक होती है।
भाजपा लंबे समय से समान नागरिक संहिता का समर्थन करती रही है। पार्टी का तर्क है कि इससे नागरिक मामलों में समानता बढ़ाने और कानूनी व्यवस्था को अधिक एकरूप बनाने में सहायता मिलेगी।
दूसरी ओर UCC को लेकर कई सामाजिक और राजनीतिक संगठनों ने अलग-अलग चिंताएं व्यक्त की हैं। इनमें धार्मिक स्वतंत्रता, व्यक्तिगत कानूनों, जनजातीय परंपराओं और सांस्कृतिक विविधता से संबंधित मुद्दे शामिल हैं।
इसलिए किसी भी राज्य में समान नागरिक संहिता लागू करने की प्रक्रिया में प्रस्तावित कानून के प्रावधानों, संवैधानिक आवश्यकताओं और विभिन्न समुदायों पर पड़ने वाले प्रभावों का मूल्यांकन महत्वपूर्ण होगा।
इससे पहले 13 सितंबर 2026 को मुंबई में पत्रकारों से बातचीत के दौरान अमित शाह ने कहा था कि भाजपा नेतृत्व वाले राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन की सरकारें वर्ष 2029 से पहले अपने शासन वाले 21 राज्यों में समान नागरिक संहिता लागू करेंगी।
उन्होंने उस समय दावा किया था कि सरकार इस दिशा में प्रयास कर रही है और निर्धारित अवधि में संबंधित राज्यों में कानून लागू करने का लक्ष्य रखा गया है। उस बयान के बाद उत्तर प्रदेश सहित विभिन्न राज्यों में UCC को लेकर राजनीतिक चर्चा तेज हुई थी।
अब लखनऊ में आयोजित भाजपा प्रदेश कार्यसमिति की बैठक में इस विषय को वर्ष 2027 के विधानसभा चुनाव से जोड़कर प्रस्तुत किए जाने की जानकारी सामने आई है। हालांकि उत्तर प्रदेश के लिए कोई नया विधेयक, मसौदा या लागू करने की निश्चित तारीख इस बैठक से जुड़े उपलब्ध आधिकारिक विवरण में घोषित नहीं हुई है।
अमित शाह ने कार्यकर्ताओं को संगठन की मजबूती बनाए रखने का संदेश भी दिया। उपलब्ध विवरण के अनुसार, उन्होंने पार्टी नेताओं से आपसी मतभेदों को दूर करके एकजुट होकर काम करने की अपील की।
उन्होंने भाजपा सरकार की स्थिरता पर भरोसा व्यक्त करते हुए उसे 'अंगद के पांव' की तरह अडिग बताया। इस कथन के माध्यम से उन्होंने पार्टी कार्यकर्ताओं के बीच आत्मविश्वास बनाए रखने का प्रयास किया।
उत्तर प्रदेश में भाजपा वर्ष 2017 से सत्ता में है। पार्टी ने वर्ष 2017 के विधानसभा चुनाव में जीत हासिल करके सरकार बनाई थी। इसके बाद वर्ष 2022 में भी उसे बहुमत मिला और योगी आदित्यनाथ लगातार दूसरी बार मुख्यमंत्री बने।
अब पार्टी वर्ष 2027 के चुनाव में तीसरी बार सत्ता में आने का लक्ष्य लेकर तैयारियां कर रही है। हालांकि चुनाव का परिणाम मतदाताओं के निर्णय पर निर्भर करेगा।
बैठक में संगठन के भीतर समन्वय बढ़ाना भी महत्वपूर्ण विषय है। पार्टी नेतृत्व की कोशिश है कि अलग-अलग स्तर पर काम करने वाले नेताओं, जनप्रतिनिधियों और कार्यकर्ताओं के बीच बेहतर तालमेल स्थापित हो।
अमित शाह की ओर से आपसी नाराजगी भुलाने की अपील को इसी संगठनात्मक संदर्भ में देखा जा रहा है। विधानसभा चुनाव से पहले पार्टी चाहती है कि सभी संगठनात्मक इकाइयां अपने निर्धारित कार्यक्रमों और जिम्मेदारियों पर ध्यान केंद्रित करें।
बैठक में बूथ प्रबंधन, मतदाता संपर्क, सरकार की योजनाओं की जानकारी लोगों तक पहुंचाने और संगठनात्मक कमजोरियों की पहचान करने जैसे विषयों पर भी चर्चा निर्धारित थी।
भाजपा नेतृत्व के लिए वर्ष 2024 के लोकसभा चुनाव के परिणामों की समीक्षा भी महत्वपूर्ण है। उस चुनाव में उत्तर प्रदेश में भाजपा का प्रदर्शन वर्ष 2019 की तुलना में कमजोर रहा था, जबकि समाजवादी पार्टी और कांग्रेस के गठबंधन को कई सीटों पर सफलता मिली थी।
इसी पृष्ठभूमि में भाजपा आगामी विधानसभा चुनाव से पहले संगठनात्मक स्तर पर अपनी स्थिति मजबूत बनाने का प्रयास कर रही है।
प्रदेश भाजपा अध्यक्ष पंकज चौधरी की अध्यक्षता में आयोजित कार्यसमिति की बैठक में सरकार और संगठन के बीच तालमेल पर भी ध्यान दिया जा रहा है। केंद्र और राज्य सरकार की योजनाओं की जानकारी आम लोगों तक पहुंचाना तथा पार्टी की स्थानीय इकाइयों को सक्रिय करना संगठनात्मक एजेंडे का हिस्सा है।
बैठक में पार्टी के सांसद, विधायक, विधान परिषद सदस्य, जिला अध्यक्ष और विभिन्न मोर्चों के पदाधिकारी शामिल हो रहे हैं। इन नेताओं के माध्यम से आगामी महीनों में बूथ स्तर तक निर्धारित कार्यक्रम पहुंचाने की योजना बनाई जा रही है।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का संबोधन भी कार्यसमिति के कार्यक्रम में निर्धारित है। इसमें राज्य सरकार की उपलब्धियों और आगामी प्राथमिकताओं पर चर्चा होने की संभावना है।
इस बीच समान नागरिक संहिता का मुद्दा आगामी विधानसभा चुनाव से जुड़ी राजनीतिक बहस में महत्वपूर्ण स्थान ले सकता है। भाजपा इसे अपनी नीतिगत प्रतिबद्धता के रूप में प्रस्तुत करती है, जबकि विपक्षी दल इसके स्वरूप और सामाजिक प्रभावों को लेकर सवाल उठाते रहे हैं।
फिलहाल अमित शाह के लखनऊ दौरे और कार्यसमिति की बैठक के जरिए भाजपा ने वर्ष 2027 के चुनाव की संगठनात्मक तैयारियों को आगे बढ़ाया है। बैठक से जुड़ी घोषणाओं और प्रस्तावों पर आगे पार्टी तथा सरकार की ओर से किए जाने वाले कदम महत्वपूर्ण होंगे।
समान नागरिक संहिता के संबंध में भी अंतिम स्थिति तभी स्पष्ट होगी, जब राज्य सरकार कोई औपचारिक प्रस्ताव या विधायी प्रक्रिया सामने लाएगी।





