उत्तर प्रदेश

तेज बहाव में बही दो साल पुरानी पुलिया, नवाटोला समेत कई गांवों का संपर्क टूटा

Kavita2
24 Aug 2026 12:12 PM IST
तेज बहाव में बही दो साल पुरानी पुलिया, नवाटोला समेत कई गांवों का संपर्क टूटा
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म्योरपुर। म्योरपुर ब्लाक क्षेत्र में लगातार हो रही बारिश के बीच एक संपर्क मार्ग पर बनी पुलिया नाले के तेज बहाव में बह गई। बीजपुर-रेणुकूट मुख्य मार्ग से कोडार होते हुए छत्तीसगढ़ सीमा पर स्थित नवाटोला को जोड़ने वाले संपर्क मार्ग पर बनी यह पुलिया करीब दो वर्ष पहले ही निर्मित हुई थी। ग्रामीणों के अनुसार चार दिन पहले तेज पानी के बहाव के कारण पुलिया ढह गई। इसके बाद नवाटोला और आसपास के सीमावर्ती गांवों का मुख्य मार्ग से संपर्क प्रभावित हो गया है।

पुलिया के बह जाने से ग्रामीणों के सामने आवागमन की गंभीर समस्या खड़ी हो गई है। रोजमर्रा के कामकाज, बाजार जाने, जरूरी सामान लाने और अन्य आवश्यक कार्यों के लिए लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि पुलिया टूटने के बाद संपर्क मार्ग पर आवाजाही लगभग पूरी तरह ठप हो गई है।

तेज बहाव में नहीं टिक सकी पुलिया

स्थानीय ग्रामीणों के मुताबिक, क्षेत्र में लगातार बारिश होने के कारण संपर्क मार्ग के नीचे से गुजरने वाले नाले में अचानक पानी का बहाव तेज हो गया। पानी की तेज धार पुलिया के नीचे से गुजरती रही और आखिरकार पुलिया उसका दबाव नहीं झेल सकी। तेज बहाव के कारण पुलिया क्षतिग्रस्त होकर बह गई।

ग्रामीणों का कहना है कि पुलिया का निर्माण करीब दो वर्ष पहले ही हुआ था। इतनी कम अवधि में पुलिया के बह जाने से निर्माण की गुणवत्ता को लेकर भी सवाल उठने लगे हैं। लोगों का कहना है कि यदि निर्माण कार्य मजबूत और निर्धारित मानकों के अनुरूप हुआ होता तो शायद पुलिया इतनी जल्दी तेज बहाव की चपेट में नहीं आती।

नवाटोला का मुख्य मार्ग से संपर्क कटा

पुलिया के टूटने का सबसे अधिक असर छत्तीसगढ़ सीमा से लगे नवाटोला और आसपास के गांवों पर पड़ा है। यह संपर्क मार्ग ग्रामीणों के लिए मुख्य मार्ग तक पहुंचने का महत्वपूर्ण साधन था। पुलिया बह जाने के बाद लोगों के सामने आवागमन का संकट खड़ा हो गया है।

ग्रामीणों के अनुसार, संपर्क मार्ग बंद होने से उन्हें मुख्य सड़क तक पहुंचने के लिए वैकल्पिक रास्तों का सहारा लेना पड़ रहा है। इससे दूरी और समय दोनों बढ़ गए हैं। बारिश के मौसम में वैकल्पिक रास्तों की स्थिति भी चुनौतीपूर्ण होने के कारण लोगों की परेशानी और बढ़ गई है।

रोजमर्रा की जरूरतें प्रभावित

ग्रामीण क्षेत्रों में सड़क और पुलिया का महत्व केवल आवागमन तक सीमित नहीं होता। इसी रास्ते से लोग बाजार, स्कूल, अस्पताल और अन्य जरूरी सेवाओं तक पहुंचते हैं। पुलिया टूटने के बाद इन सभी गतिविधियों पर असर पड़ने लगा है।

ग्रामीणों का कहना है कि सबसे ज्यादा परेशानी बीमार लोगों और बुजुर्गों को हो सकती है। किसी आपात स्थिति में मरीज को मुख्य सड़क तक पहुंचाना मुश्किल हो सकता है। इसी तरह विद्यार्थियों और रोजाना काम के लिए बाहर जाने वाले लोगों को भी परेशानी उठानी पड़ रही है।

निर्माण की गुणवत्ता पर उठे सवाल

पुलिया के महज दो वर्ष में बह जाने के बाद ग्रामीणों ने इसके निर्माण की गुणवत्ता की जांच की मांग की है। उनका कहना है कि बरसात के मौसम में नालों और छोटी जलधाराओं में पानी का बहाव अचानक बढ़ जाता है। ऐसे स्थानों पर पुलिया का निर्माण करते समय पानी के अधिकतम संभावित बहाव और संरचना की मजबूती का ध्यान रखना जरूरी है।

ग्रामीणों ने मांग की है कि संबंधित विभाग मौके पर पहुंचकर पुलिया की स्थिति और निर्माण कार्य की जांच करे। साथ ही यह भी देखा जाए कि निर्माण में निर्धारित मानकों का पालन किया गया था या नहीं। यदि निर्माण में किसी प्रकार की लापरवाही सामने आती है तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जानी चाहिए।

जल्द मरम्मत की मांग

ग्रामीणों ने प्रशासन और संबंधित विभाग से पुलिया की जल्द मरम्मत कराने की मांग की है। लोगों का कहना है कि बारिश का मौसम अभी जारी है और यदि समय रहते वैकल्पिक व्यवस्था नहीं की गई तो उनकी परेशानी और बढ़ सकती है।

ग्रामीण चाहते हैं कि पहले आवागमन के लिए अस्थायी रास्ते की व्यवस्था की जाए, ताकि जरूरी सेवाओं तक लोगों की पहुंच बनी रहे। इसके बाद पुलिया का स्थायी और मजबूत निर्माण कराया जाए। लोगों का कहना है कि केवल अस्थायी मरम्मत से समस्या का समाधान नहीं होगा, क्योंकि बरसात में दोबारा तेज बहाव आने पर कमजोर संरचना फिर क्षतिग्रस्त हो सकती है।

सीमावर्ती क्षेत्र होने से बढ़ी चिंता

नवाटोला और आसपास के गांव छत्तीसगढ़ सीमा के नजदीक स्थित हैं। ऐसे में इन क्षेत्रों के लिए मुख्य मार्ग से बेहतर संपर्क बनाए रखना प्रशासनिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण है। ग्रामीणों का कहना है कि संपर्क मार्ग टूटने से क्षेत्र का सामान्य जनजीवन प्रभावित हो रहा है।

लोगों ने संबंधित अधिकारियों से मौके का निरीक्षण कर जल्द कार्रवाई करने की मांग की है। ग्रामीणों को उम्मीद है कि विभाग पुलिया के टूटने के कारणों की जांच करने के साथ ही जल्द आवागमन बहाल करने के लिए ठोस कदम उठाएगा।

फिलहाल चार दिन से पुलिया के बह जाने के कारण नवाटोला और आसपास के गांवों के लोगों की मुश्किलें बढ़ी हुई हैं। महज दो वर्ष पुरानी पुलिया के तेज बहाव में बह जाने से निर्माण गुणवत्ता और बरसाती नालों के अनुरूप संरचना तैयार किए जाने को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। ग्रामीणों की नजर अब प्रशासन की कार्रवाई पर है। लोगों का कहना है कि क्षेत्र में स्थायी और मजबूत पुलिया का निर्माण ही समस्या का वास्तविक समाधान होगा, ताकि भविष्य में बारिश के दौरान गांवों का संपर्क दोबारा न टूटे।

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