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विशुनपुरा। विशुनपुरा ब्लॉक के जड़हां और आसपास के गांवों में पिछले छह दिनों से तेंदुओं की लगातार चहलकदमी ने ग्रामीणों की चिंता बढ़ा दी है। गांव के आसपास दो तेंदुओं और एक शावक के दिखाई देने की सूचना से लोगों में भय का माहौल है। गुरुवार रात तेंदुए का एक शावक नजर आने के बाद ग्रामीणों की चिंता और बढ़ गई। स्थानीय लोगों का आरोप है कि वन विभाग को तेंदुओं की मौजूदगी की जानकारी देने के बावजूद अब तक उन्हें सुरक्षित तरीके से पकड़ने के लिए पिंजरा नहीं लगाया गया है। इससे नाराज ग्रामीणों ने शुक्रवार को वन क्षेत्राधिकारी को ज्ञापन सौंपकर तत्काल आवश्यक कदम उठाने की मांग की है। ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द सुरक्षा व्यवस्था नहीं की गई तो वे आंदोलन करने के लिए मजबूर होंगे।
जानकारी के अनुसार, जड़हां और आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में बीते छह दिनों से तेंदुओं के दिखाई देने की घटनाएं सामने आ रही हैं। ग्रामीणों का कहना है कि गांव के आसपास तेंदुओं की मौजूदगी से लोगों का घरों से बाहर निकलना मुश्किल हो गया है। खासकर शाम ढलने के बाद लोग अकेले बाहर जाने से बच रहे हैं। खेतों और गांव के बाहरी इलाकों में जाने वाले लोगों के बीच भी भय बना हुआ है।
ग्रामीणों के मुताबिक, शुरुआत में क्षेत्र में दो तेंदुओं के दिखाई देने की जानकारी मिली थी। इसके बाद गुरुवार रात एक शावक भी नजर आया। शावक की मौजूदगी से ग्रामीणों को आशंका है कि इलाके में तेंदुओं का परिवार सक्रिय हो सकता है। हालांकि, क्षेत्र में मौजूद तेंदुओं की वास्तविक संख्या और उनकी गतिविधियों की आधिकारिक पुष्टि वन विभाग की जांच के बाद ही हो सकेगी।
तेंदुओं की लगातार मौजूदगी की खबर से गांव में बच्चों और बुजुर्गों की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई है। ग्रामीणों का कहना है कि जंगल और खेतों से जुड़े रास्तों पर आवाजाही करने में डर लग रहा है। कई परिवार बच्चों को अकेले बाहर भेजने से बच रहे हैं। वहीं खेतों में काम करने वाले किसानों और मजदूरों को भी सतर्क रहना पड़ रहा है।
ग्रामीणों का आरोप है कि वन विभाग को तेंदुओं के दिखाई देने की सूचना दी जा चुकी है, लेकिन अब तक प्रभावी कदम नहीं उठाए गए हैं। विशेष रूप से पिंजरा नहीं लगाए जाने को लेकर लोगों में नाराजगी है। उनका कहना है कि लगातार छह दिनों से तेंदुओं की गतिविधियों की सूचना मिलने के बावजूद स्थिति सामान्य नहीं हो सकी है। ऐसे में ग्रामीणों ने वन विभाग से जल्द कार्रवाई करने की मांग की है।
शुक्रवार को नाराज ग्रामीणों ने वन क्षेत्राधिकारी को ज्ञापन सौंपकर अपनी समस्याओं से अवगत कराया। ज्ञापन में तेंदुओं की मौजूदगी से उत्पन्न भय और संभावित खतरे का उल्लेख करते हुए तत्काल पिंजरा लगाने की मांग की गई। ग्रामीणों का कहना है कि वन विभाग को इस मामले को गंभीरता से लेना चाहिए, ताकि किसी अप्रिय घटना से पहले सुरक्षा के पर्याप्त इंतजाम किए जा सकें।
ग्रामीणों ने यह भी चेतावनी दी कि यदि जल्द कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया तो वे आंदोलन का रास्ता अपनाएंगे। उनका कहना है कि गांव में लगातार भय का माहौल बना रहना चिंता का विषय है। ऐसे में वन विभाग की जिम्मेदारी है कि वह मौके पर पहुंचकर स्थिति का आकलन करे और ग्रामीणों की सुरक्षा के लिए जरूरी व्यवस्था सुनिश्चित करे।
वन्यजीव विशेषज्ञों के अनुसार, तेंदुए भोजन और सुरक्षित आवास की तलाश में कभी-कभी मानव बस्तियों के आसपास पहुंच जाते हैं। जंगलों से सटे गांवों में ऐसी घटनाएं देखने को मिल सकती हैं। तेंदुए सामान्यतः मनुष्यों से दूरी बनाए रखने का प्रयास करते हैं, लेकिन अचानक आमना-सामना होने या खतरा महसूस करने पर जोखिम बढ़ सकता है।
विशेषज्ञों का कहना है कि यदि किसी क्षेत्र में तेंदुए का शावक दिखाई देता है, तो वहां विशेष सावधानी बरतने की आवश्यकता होती है। शावक के आसपास उसकी मां भी मौजूद हो सकती है। ऐसी स्थिति में शावक के पास जाने, उसे पकड़ने या उसके साथ छेड़छाड़ करने की कोशिश नहीं करनी चाहिए। इससे तेंदुआ रक्षात्मक व्यवहार कर सकता है और लोगों की सुरक्षा खतरे में पड़ सकती है।
वन्यजीवों की मौजूदगी वाले इलाकों में ग्रामीणों को रात के समय अकेले बाहर निकलने से बचना चाहिए। खेतों, झाड़ियों और सुनसान रास्तों पर जाते समय सतर्क रहना आवश्यक है। छोटे बच्चों को अकेले बाहर नहीं भेजना चाहिए और पालतू पशुओं को सुरक्षित स्थानों पर रखना चाहिए। यदि तेंदुआ दिखाई दे तो उसके पास जाने या भीड़ जुटाकर उसे घेरने के बजाय वन विभाग को सूचना देना उचित है।
हालांकि, किसी भी वन्यजीव को पकड़ने या दूसरे स्थान पर भेजने का निर्णय प्रशिक्षित वन अधिकारियों द्वारा स्थिति के आकलन के आधार पर लिया जाना चाहिए। केवल तेंदुए के दिखाई देने से उसे पकड़ना हर परिस्थिति में आवश्यक नहीं होता। कई मामलों में निगरानी, लोगों को सतर्क करना और वन्यजीव के लिए सुरक्षित रास्ता सुनिश्चित करना अधिक उपयुक्त उपाय हो सकते हैं।
जड़हां और आसपास के गांवों में तेंदुओं की मौजूदगी की खबर के बाद वन विभाग से क्षेत्र में निगरानी बढ़ाने की अपेक्षा की जा रही है। ग्रामीणों की मांग है कि प्रभावित इलाकों में वनकर्मियों की टीम भेजी जाए, तेंदुओं की गतिविधियों का पता लगाया जाए और आवश्यकता के अनुसार पिंजरा लगाने सहित अन्य सुरक्षा उपाय किए जाएं।
इसके साथ ही ग्रामीणों को वन्यजीवों से सुरक्षित दूरी बनाए रखने और आपात स्थिति में संपर्क करने के लिए आवश्यक जानकारी उपलब्ध कराना भी महत्वपूर्ण है। इससे भय और अफवाहों को रोकने में मदद मिल सकती है।
फिलहाल जड़हां और आसपास के गांवों में तेंदुओं की चहलकदमी को लेकर ग्रामीण चिंतित हैं। शुक्रवार को वन क्षेत्राधिकारी को ज्ञापन सौंपे जाने के बाद अब लोगों को विभाग की कार्रवाई का इंतजार है। ग्रामीणों ने स्पष्ट किया है कि उनकी मांग पर जल्द ध्यान नहीं दिया गया तो वे आंदोलन करेंगे। हालांकि, वन विभाग की ओर से पिंजरा लगाने या अन्य कार्रवाई को लेकर आधिकारिक प्रतिक्रिया उपलब्ध नहीं है।





