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खेत और तालाब में निकले दो विशाल मगरमच्छ, ग्रामीणों में दहशत, वन विभाग ने किया रेस्क्यू

सीतापुर। उत्तर प्रदेश के सीतापुर जिले में अलग-अलग स्थानों पर मगरमच्छ दिखाई देने से ग्रामीणों में दहशत फैल गई। सकरन क्षेत्र के महोलिया गांव के पास खेत में करीब छह फीट लंबा मगरमच्छ दिखाई दिया, जबकि महमूदाबाद क्षेत्र के सदरपुर स्थित करनापुर गांव में तालाब के अंदर मगरमच्छ मिलने से हड़कंप मच गया। दोनों घटनाओं की सूचना वन विभाग को दी गई। वन विभाग की टीम ने दोनों मगरमच्छों को सुरक्षित पकड़कर चहलारी घाट के पास घाघरा नदी में छोड़ दिया। बताया जा रहा है कि घाघरा नदी का जलस्तर बढ़ने और पानी के बहाव के कारण मगरमच्छ आबादी के आसपास के क्षेत्रों तक पहुंच रहे हैं। इन घटनाओं के बाद ग्रामीणों में सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई है।
खेत में छह फीट लंबा मगरमच्छ देखकर मचा हड़कंप
सकरन क्षेत्र के महोलिया गांव के पास खेत में ग्रामीणों को करीब छह फीट लंबा मगरमच्छ दिखाई दिया। खेत में मगरमच्छ की मौजूदगी का पता चलते ही आसपास के लोगों में अफरा-तफरी मच गई। ग्रामीणों ने इसकी सूचना वन विभाग को दी।
सूचना मिलने के बाद वन विभाग के कर्मचारी मौके पर पहुंचे और मगरमच्छ को पकड़ने के लिए रेस्क्यू अभियान शुरू किया। टीम ने सावधानी बरतते हुए मगरमच्छ को सुरक्षित पकड़ लिया।
वन दारोगा राजकुमार सिंह ने बताया कि पकड़ा गया मगरमच्छ करीब छह फीट लंबा था। उसे सुरक्षित पकड़कर चहलारी घाट पर घाघरा नदी में छोड़ दिया गया है।
मगरमच्छ के पकड़े जाने के बाद ग्रामीणों ने राहत महसूस की। खेत में मगरमच्छ दिखाई देने की घटना ने आसपास के लोगों को सतर्क कर दिया है।
घाघरा नदी का जलस्तर बढ़ने से खेत तक पहुंचा मगरमच्छ
वन दारोगा राजकुमार सिंह के अनुसार, घाघरा नदी का जलस्तर बढ़ने के कारण मगरमच्छ पानी के बहाव के साथ खेत तक पहुंच गया था।
नदी का जलस्तर बढ़ने पर आसपास के निचले इलाकों में पानी फैल सकता है। ऐसी स्थिति में नदी में रहने वाले जलीय जीव भी अपने सामान्य क्षेत्र से बाहर निकलकर खेतों और तालाबों तक पहुंच सकते हैं।
महोलिया गांव के पास मगरमच्छ मिलने की घटना को भी इसी परिस्थिति से जोड़कर देखा जा रहा है।
वन विभाग ने मगरमच्छ को पकड़ने के बाद उसके प्राकृतिक आवास घाघरा नदी में सुरक्षित छोड़ दिया। इस कार्रवाई के दौरान मगरमच्छ को नुकसान पहुंचाए जाने की कोई जानकारी सामने नहीं आई है।
करनापुर गांव के तालाब में भी दिखाई दिया मगरमच्छ
दूसरी घटना महमूदाबाद क्षेत्र के सदरपुर स्थित करनापुर गांव की है। यहां ग्रामीणों ने गांव के तालाब में मगरमच्छ होने की आशंका जताई।
तालाब में मगरमच्छ दिखाई देने की सूचना मिलने के बाद ग्रामीणों में डर का माहौल बन गया। लोगों ने वन विभाग को इसकी जानकारी दी।
सूचना पर वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची, लेकिन शुरुआती निरीक्षण के बाद मगरमच्छ होने की बात को अफवाह बताकर वापस लौट गई।
वन विभाग की टीम के लौटने के बावजूद ग्रामीणों को तालाब में मगरमच्छ होने का संदेह बना रहा। इसके बाद उन्होंने स्वयं तालाब का पानी कम करने का निर्णय लिया।
पंपिंग सेट लगाकर तालाब से निकाला पानी
करनापुर गांव में मगरमच्छ की मौजूदगी की पुष्टि करने के लिए ग्रामीणों ने पंपिंग सेट चलाकर तालाब का पानी बाहर निकालना शुरू किया।
तालाब का जलस्तर कम होने के बाद मगरमच्छ दिखाई देने लगा। इसके बाद ग्रामीणों की आशंका सही साबित हुई।
मगरमच्छ दिखाई देने पर वन विभाग को दोबारा सूचना दी गई। इस बार वन विभाग के कर्मचारी फिर मौके पर पहुंचे और मगरमच्छ को पकड़ने की कार्रवाई शुरू की।
ग्रामीणों के प्रयास के बाद तालाब में मगरमच्छ मिलने की पुष्टि हुई। इससे पहले वन विभाग की टीम द्वारा सूचना को अफवाह बताकर लौट जाने का मामला भी चर्चा का विषय बन गया।
हालांकि, शुरुआती निरीक्षण के दौरान मगरमच्छ दिखाई क्यों नहीं दिया, इस संबंध में विस्तृत जानकारी सामने नहीं आई है।
वन विभाग ने तालाब से मगरमच्छ को पकड़ा
तालाब में मगरमच्छ की पुष्टि होने के बाद वन विभाग की टीम ने रेस्क्यू अभियान चलाया। कर्मचारियों ने मगरमच्छ को सुरक्षित पकड़ लिया।
वन रेंजर नावेद सिद्दीकी ने बताया कि करनापुर गांव के तालाब में मिले मगरमच्छ को पकड़कर चहलारी घाट के पास घाघरा नदी में छोड़ दिया गया है।
इस कार्रवाई के बाद गांव के लोगों को राहत मिली। तालाब में मगरमच्छ की मौजूदगी से ग्रामीणों में भय बना हुआ था।
वन विभाग की टीम ने मगरमच्छ को सुरक्षित स्थान पर पहुंचाकर संभावित खतरे को दूर किया।
दो अलग-अलग स्थानों पर मगरमच्छ मिलने से चिंता
सकरन के महोलिया गांव और महमूदाबाद के करनापुर गांव में मगरमच्छ मिलने की घटनाओं ने ग्रामीण क्षेत्रों में सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ा दी है।
दोनों घटनाओं में मगरमच्छ आबादी के आसपास स्थित स्थानों पर मिले। एक मगरमच्छ खेत में दिखाई दिया, जबकि दूसरा गांव के तालाब में मौजूद था।
ग्रामीण क्षेत्रों में खेतों और तालाबों के आसपास लोगों की नियमित आवाजाही होती है। ऐसे में मगरमच्छ की मौजूदगी से लोगों और मवेशियों के लिए संभावित खतरा पैदा हो सकता है।
हालांकि, इन दोनों घटनाओं में किसी व्यक्ति या पशु पर मगरमच्छ के हमले की जानकारी सामने नहीं आई है।
वन विभाग ने दोनों मगरमच्छों को सुरक्षित पकड़कर नदी में छोड़ दिया है।
नदी किनारे के गांवों में सतर्कता जरूरी
घाघरा नदी का जलस्तर बढ़ने के कारण आसपास के क्षेत्रों में जलीय जीवों की आवाजाही बढ़ सकती है। ऐसे में नदी, तालाब और जलभराव वाले स्थानों के आसपास रहने वाले लोगों को सावधानी बरतने की जरूरत है।
विशेष रूप से खेतों में काम करने वाले किसानों, पशुपालकों और तालाब के आसपास जाने वाले ग्रामीणों को सतर्क रहना चाहिए।
मगरमच्छ दिखाई देने पर उसके पास जाने या स्वयं पकड़ने की कोशिश करने के बजाय वन विभाग को सूचना देना सुरक्षित तरीका है।
मगरमच्छ जंगली जीव है और खतरा महसूस होने पर आक्रामक हो सकता है। इसलिए उससे सुरक्षित दूरी बनाए रखना जरूरी है।
दोनों मगरमच्छ घाघरा नदी में छोड़े गए
वन विभाग ने दोनों स्थानों पर रेस्क्यू अभियान पूरा कर लिया है। महोलिया गांव के पास खेत में मिले करीब छह फीट लंबे मगरमच्छ को वन दारोगा राजकुमार सिंह की टीम ने पकड़ा।
वहीं करनापुर गांव के तालाब में मिले मगरमच्छ को वन विभाग की टीम ने सुरक्षित बाहर निकाला। वन रेंजर नावेद सिद्दीकी के अनुसार, उसे भी चहलारी घाट के पास घाघरा नदी में छोड़ दिया गया है।
दोनों घटनाओं के बाद ग्रामीणों ने राहत की सांस ली है। हालांकि, नदी का जलस्तर बढ़ने की स्थिति में आसपास के क्षेत्रों में सतर्कता बनाए रखना आवश्यक है।





