उत्तर प्रदेश

नकली नोटों के खेल में उतरे दो सिपाही, हिस्ट्रीशीटर समेत पांच गिरफ्तार

Kavita2
6 Oct 2026 12:30 PM IST
नकली नोटों के खेल में उतरे दो सिपाही, हिस्ट्रीशीटर समेत पांच गिरफ्तार
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उत्तर प्रदेश : पुलिस की वर्दी पर दाग लगाने वाला एक गंभीर मामला सामने आया है, जहां दो पुलिस सिपाहियों पर नकली नोटों के कारोबार और लोगों से ठगी करने वाले गिरोह में शामिल होने का आरोप लगा है। पुलिस ने दोनों सिपाहियों, एक हिस्ट्रीशीटर और दो अन्य आरोपियों समेत कुल पांच लोगों के खिलाफ लूट का मुकदमा दर्ज कर सभी को गिरफ्तार कर लिया है।

मामले की जांच में सामने आया कि यह गिरोह लोगों को कम रकम देकर तीन गुना नकली नोट दिलाने का लालच देता था। आरोपी पहले ऐसे लोगों की तलाश करते थे जो कम समय में ज्यादा पैसा कमाने के लालच में उनके जाल में फंस सकें। इसके बाद धीरे-धीरे उनका भरोसा जीता जाता था और फिर बड़ी रकम की डील के नाम पर उन्हें ठगी का शिकार बनाया जाता था।

गिरोह का तरीका बेहद योजनाबद्ध बताया जा रहा है। शुरुआती चरण में आरोपी ग्राहकों को कुछ असली नोट देते थे और उन्हें बाजार में चलाकर देखने को कहते थे। जब वे नोट आसानी से चल जाते थे तो ग्राहक का भरोसा बढ़ जाता था। इसके बाद गिरोह दावा करता था कि वह असली जैसे दिखने वाले नकली नोट तीन गुना मात्रा में उपलब्ध करा सकता है।

भरोसा बनने के बाद आरोपी बड़ी रकम की डील तय करते थे। इसके लिए नोटों की गड्डी तैयार की जाती थी, लेकिन गड्डी के बीच में असली या नकली नोटों की जगह कागज की कटिंग रखी जाती थी। ऊपर और नीचे एक-दो असली नोट लगा दिए जाते थे, जिससे देखने पर पूरी गड्डी असली नोटों की लगती थी।

इसके बाद ग्राहक से वास्तविक रकम ली जाती थी और बदले में कागज से भरी गड्डियां थमा दी जाती थीं। कई बार ग्राहक को मौके पर गड्डी खोलने या अच्छी तरह जांचने का मौका भी नहीं दिया जाता था। आरोपी जल्दबाजी और दबाव का माहौल बनाकर पूरी डील समाप्त करते और वहां से निकल जाते थे।

पुलिस की जांच में यह भी सामने आया कि गिरोह में शामिल दो पुलिस सिपाहियों की मौजूदगी से लोगों को शक कम होता था। खाकी वर्दी से जुड़े लोगों के शामिल होने के कारण ग्राहक इसे सुरक्षित सौदा समझ लेते थे और आसानी से भरोसा कर बैठते थे। यही वजह थी कि गिरोह बड़े पैमाने पर रकम ऐंठने में सफल हो जाता था।

पुलिस ने जब पूरे मामले की परतें खोलीं तो गिरोह में हिस्ट्रीशीटर समेत पांच लोगों की भूमिका सामने आई। इनमें दो पुलिसकर्मी भी शामिल थे। शुरुआती जांच के बाद सभी के खिलाफ लूट और धोखाधड़ी से जुड़े आरोपों में मुकदमा दर्ज किया गया।

गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ में यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि गिरोह ने अब तक कितने लोगों को अपना शिकार बनाया और कितनी रकम की ठगी की। पुलिस यह भी जांच रही है कि कहीं गिरोह का नेटवर्क दूसरे जिलों तक तो नहीं फैला था।

मामले में सबसे गंभीर पहलू दो सिपाहियों की संलिप्तता है। पुलिस विभाग में रहते हुए कानून व्यवस्था संभालने की जिम्मेदारी निभाने वाले इन कर्मियों पर खुद अपराधियों के साथ मिलकर ठगी और लूट के खेल में शामिल होने का आरोप है। इससे विभागीय स्तर पर भी सवाल खड़े हो गए हैं।

पुलिस अधिकारियों के अनुसार, आरोपियों के खिलाफ आपराधिक कार्रवाई के साथ-साथ संबंधित सिपाहियों पर विभागीय कार्रवाई भी हो सकती है। उनके निलंबन, बर्खास्तगी या अन्य अनुशासनात्मक कदम जांच की प्रगति के आधार पर तय किए जा सकते हैं।

गिरोह लोगों को लालच देकर अपने जाल में फंसाता था। तीन गुना रकम पाने का सपना दिखाकर पहले छोटी रकम में भरोसा दिलाया जाता, फिर बड़ी रकम की डील कराकर ठगी की जाती थी। इस पूरे खेल में असली नोट केवल दिखावे और भरोसा जीतने के लिए इस्तेमाल किए जाते थे।

जांच में यह भी देखा जा रहा है कि नकली नोटों के नाम पर वास्तव में कितनी मात्रा में फर्जी मुद्रा इस्तेमाल की गई और कितनी रकम केवल कागज की गड्डियों के जरिए ठगी गई। बरामद सामग्री और डिजिटल रिकॉर्ड की जांच से मामले की पूरी तस्वीर सामने आने की उम्मीद है।

पुलिस अब आरोपियों के बैंक खातों, मोबाइल फोन, संपर्कों और कॉल डिटेल की भी जांच कर सकती है। इससे यह पता लगाया जा सकेगा कि गिरोह किन-किन लोगों के संपर्क में था और किस तरह ग्राहकों को निशाना बनाता था।

फिलहाल पांचों आरोपियों की गिरफ्तारी के बाद पुलिस ने मामले की जांच तेज कर दी है। अधिकारियों का कहना है कि यदि पूछताछ में और लोगों की भूमिका सामने आती है तो उनके खिलाफ भी कार्रवाई की जाएगी।

यह घटना पुलिस विभाग के लिए भी गंभीर चेतावनी मानी जा रही है। खाकी वर्दी पर जनता का भरोसा कानून व्यवस्था और सुरक्षा की नींव है। ऐसे में यदि पुलिसकर्मी खुद अपराधियों के साथ मिलकर ठगी में शामिल पाए जाते हैं तो इससे पूरे तंत्र की छवि प्रभावित होती है।

अब आगे की जांच से ही साफ होगा कि यह गिरोह कितने समय से सक्रिय था, कितने लोगों को ठगा गया और इस पूरे नेटवर्क में अन्य कौन-कौन लोग शामिल थे।

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