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5 हजार से शुरू किया कारोबार आज दुकान तक पहुंची बबीता
नई दिल्ली: जिंदगी में मुश्किल हालात के बावजूद मेहनत और हिम्मत के दम पर सफलता हासिल करने वाली गाजियाबाद की बबीता शर्मा की कहानी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के रेडियो कार्यक्रम 'मन की बात' में चर्चा का विषय बनी। बबीता के संघर्ष और आत्मनिर्भर बनने के सफर को सुनकर लोग भावुक हो गए। प्रधानमंत्री मोदी ने भी उनके जज्बे और मेहनत की सराहना की।
बबीता शर्मा की कहानी उस समय शुरू हुई जब पति के निधन के बाद परिवार की जिम्मेदारियां उनके कंधों पर आ गईं। आर्थिक चुनौतियों के बीच उन्होंने हार नहीं मानी और महज 5 हजार रुपये की पूंजी से पूजा सामग्री बेचने का छोटा सा काम शुरू किया। शुरुआत में वह सड़क किनारे ठेला लगाकर अपना और परिवार का गुजारा करती थीं। कम संसाधनों के बावजूद बबीता ने मेहनत और लगन से अपने छोटे व्यवसाय को आगे बढ़ाया। धीरे-धीरे ग्राहकों का भरोसा बढ़ा और उनका काम भी बढ़ता गया। ठेले से शुरू हुआ उनका सफर आज एक दुकान तक पहुंच चुका है। उन्होंने साबित किया कि आत्मविश्वास और मेहनत के दम पर कठिन परिस्थितियों को बदला जा सकता है।
संघर्ष से सफलता तक का सफर
बबीता के लिए यह सफर आसान नहीं था। पति के जाने के बाद परिवार की आर्थिक स्थिति संभालना बड़ी चुनौती थी। लेकिन उन्होंने परिस्थितियों के सामने झुकने के बजाय खुद को मजबूत बनाया और स्वरोजगार का रास्ता चुना। उन्होंने पूजा सामग्री के कारोबार को धीरे-धीरे विस्तार दिया। ग्राहकों की जरूरतों को समझते हुए अपने काम में सुधार किया और मेहनत से अपनी पहचान बनाई। आज उनकी कहानी उन महिलाओं के लिए प्रेरणा बन गई है, जो मुश्किल परिस्थितियों में भी अपने पैरों पर खड़ा होना चाहती हैं।
PM मोदी ने की तारीफ
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 'मन की बात' में बबीता की कहानी का जिक्र करते हुए उनके आत्मनिर्भर बनने के प्रयासों की सराहना की। उन्होंने कहा कि ऐसे उदाहरण देश के लोगों को प्रेरणा देते हैं और दिखाते हैं कि छोटे स्तर से शुरू किया गया प्रयास भी बड़ी सफलता में बदल सकता है। प्रधानमंत्री ने स्वरोजगार और आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ने वाले लोगों की प्रशंसा करते हुए कहा कि देश में ऐसे अनेक लोग हैं जो अपनी मेहनत से बदलाव की नई कहानियां लिख रहे हैं।
महिला सशक्तिकरण की बनीं मिसाल
बबीता शर्मा की कहानी केवल एक व्यक्ति की सफलता नहीं है, बल्कि महिला सशक्तिकरण का उदाहरण भी है। उन्होंने दिखाया कि आर्थिक परेशानियां कितनी भी बड़ी क्यों न हों, अगर हौसला मजबूत हो तो रास्ते निकाले जा सकते हैं। उनका सफर उन लोगों के लिए प्रेरणा है, जो छोटे व्यवसाय से शुरुआत कर अपनी अलग पहचान बनाना चाहते हैं। ठेले से दुकान तक का उनका सफर मेहनत, आत्मविश्वास और आत्मनिर्भरता की ताकत को दर्शाता है।
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