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छेड़छाड़ से परेशान 11वीं की छात्रा ने दी जान, शिकायत के बाद भी पुलिस ने नहीं की कार्रवाई

लखनऊ। उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है। मलिहाबाद थाना क्षेत्र के कसमंडी कला इलाके में कक्षा 11वीं की एक नाबालिग छात्रा की आत्महत्या ने पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। परिजनों का आरोप है कि छात्रा लंबे समय से एक युवक की छेड़छाड़ और प्रताड़ना से परेशान थी। विरोध करने पर आरोपी ने छात्रा और उसके पिता के साथ मारपीट भी की थी। पीड़ित पिता कई बार पुलिस चौकी और थाने के चक्कर लगाता रहा, लेकिन शिकायतों पर प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई। सोमवार, 2 नवंबर को छात्रा की मौत के बाद पुलिस हरकत में आई और आरोपी के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर उसे गिरफ्तार कर लिया। मामले में लापरवाही सामने आने पर कसमंडी कला चौकी प्रभारी विवेक कुमार को निलंबित कर दिया गया है।
जानकारी के अनुसार, मलिहाबाद के कसमंडी कला क्षेत्र में रहने वाली किशोरी स्थानीय विद्यालय में 11वीं कक्षा की छात्रा थी। परिजनों का आरोप है कि पड़ोस का एक युवक पिछले कई महीनों से उसे परेशान कर रहा था। छात्रा जब स्कूल आती-जाती थी, तब आरोपी उसका पीछा करता और उसके साथ छेड़छाड़ करता था। इससे किशोरी मानसिक रूप से परेशान रहने लगी थी। परिवार ने कई बार युवक की हरकतों का विरोध किया, लेकिन आरोप है कि इसके बावजूद उसने छात्रा को परेशान करना बंद नहीं किया।
छात्रा के पिता का आरोप है कि युवक की हरकतें लगातार बढ़ती जा रही थीं। जब उन्होंने बेटी के साथ हो रही छेड़छाड़ का विरोध किया तो आरोपी ने उनके साथ भी मारपीट की। परिवार का दावा है कि पिछले पांच महीनों के दौरान छात्रा और उसके पिता पर दो बार हमला हुआ था। इसके बाद भी आरोपी के खिलाफ ऐसी कार्रवाई नहीं हुई, जिससे परिवार को सुरक्षा का भरोसा मिल सके।
मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, छात्रा के पिता ने 20 मई को हमले की शिकायत कसमंडी कला पुलिस चौकी में दी थी। इसके बाद 13 अक्टूबर को बेटी से छेड़छाड़ किए जाने को लेकर भी शिकायत दर्ज कराई गई थी। पिता का आरोप है कि दोनों शिकायतों के बावजूद पुलिस ने मामले को गंभीरता से नहीं लिया। वह लगातार अधिकारियों से कार्रवाई की गुहार लगाते रहे, लेकिन उन्हें राहत नहीं मिली।
परिजनों के मुताबिक, लगातार हो रही प्रताड़ना का असर छात्रा की मानसिक स्थिति पर पड़ रहा था। वह भय और तनाव में रहने लगी थी। परिवार उसे समझाने और स्थिति सामान्य करने का प्रयास कर रहा था, लेकिन कथित उत्पीड़न समाप्त नहीं हुआ। सोमवार दोपहर छात्रा की आत्महत्या की खबर सामने आने के बाद परिवार में कोहराम मच गया। परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है।
घटना की जानकारी मिलने के बाद पुलिस मौके पर पहुंची और आवश्यक कानूनी प्रक्रिया शुरू की। छात्रा की मौत के बाद परिजनों ने पुलिस की निष्क्रियता को लेकर गंभीर नाराजगी जाहिर की। उनका आरोप है कि यदि पहले दी गई शिकायतों पर समय रहते प्रभावी कार्रवाई होती, तो शायद उनकी बेटी आज जीवित होती।
मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों ने तत्काल संज्ञान लिया। लखनऊ के पुलिस उपायुक्त अमित आनंद के अनुसार, छात्रा के पिता की तहरीर के आधार पर आरोपी युवक के खिलाफ आत्महत्या के लिए उकसाने की धारा में मुकदमा दर्ज किया गया है। पुलिस ने आरोपी हंस कुमार को गिरफ्तार कर लिया है। अब उससे पूछताछ और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जा रही है।
इस घटना में सबसे बड़ा सवाल पुलिस की भूमिका को लेकर उठ रहा है। परिजनों का कहना है कि उनकी शिकायतों पर पहले ध्यान दिया जाता तो छात्रा को लगातार भय और उत्पीड़न का सामना नहीं करना पड़ता। मामले में पुलिस चौकी स्तर पर कथित लापरवाही सामने आने के बाद अधिकारियों ने चौकी प्रभारी विवेक कुमार को निलंबित कर दिया है।
पुलिस प्रशासन की इस कार्रवाई से स्पष्ट है कि शिकायतों के निस्तारण में हुई संभावित चूक को गंभीरता से लिया गया है। हालांकि, अब यह भी जांच का विषय है कि परिवार की पूर्व शिकायतों पर किस स्तर पर कार्रवाई की गई थी और किन परिस्थितियों में आरोपी के खिलाफ पहले प्रभावी कदम नहीं उठाए गए।
इस घटना ने महिला और बालिका सुरक्षा को लेकर किए जाने वाले सरकारी दावों के बीच जमीनी स्तर पर शिकायतों के निस्तारण की व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। उत्तर प्रदेश में महिलाओं और बालिकाओं की सुरक्षा के लिए मिशन शक्ति सहित विभिन्न योजनाएं संचालित की जा रही हैं। इसके बावजूद किसी नाबालिग छात्रा के परिजनों को बार-बार शिकायत करने के बाद भी राहत नहीं मिलने का आरोप चिंताजनक है।
विशेषज्ञों का मानना है कि छेड़छाड़, पीछा करने और धमकी देने जैसी शिकायतों को शुरुआती स्तर पर ही गंभीरता से लेना आवश्यक है। खासकर नाबालिगों से जुड़े मामलों में पुलिस की त्वरित प्रतिक्रिया, परिवार की सुरक्षा और पीड़ित को उचित सहायता बेहद महत्वपूर्ण होती है। समय पर हस्तक्षेप से उत्पीड़न की घटनाओं को बढ़ने से रोकने में मदद मिल सकती है।
मलिहाबाद की इस घटना ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा किया है कि आखिर शिकायत दर्ज कराने के बावजूद पीड़ित परिवार को सुरक्षा का भरोसा क्यों नहीं मिल सका। आरोपी की गिरफ्तारी और चौकी प्रभारी के निलंबन के बाद अब लोगों की निगाहें आगे की जांच और कार्रवाई पर टिकी हैं।
फिलहाल पुलिस मामले के सभी पहलुओं की जांच कर रही है। यह पता लगाया जा रहा है कि छात्रा और उसके परिवार की ओर से पहले की गई शिकायतों पर क्या कदम उठाए गए थे। वहीं, परिजनों को न्याय दिलाने और इस मामले में जिम्मेदार पाए जाने वाले लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग भी उठ रही है।





