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उत्तर प्रदेश
यूपी विधानसभा में ट्रांसजेंडर कल्याण, AI दुरुपयोग और निवेश पर गरमाई चर्चा
SHIDDHANT
12 Feb 2026 7:41 PM IST

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Lucknow लखनऊ। उत्तर प्रदेश विधानसभा के बजट सत्र के चौथे दिन, गुरुवार को ट्रांसजेंडर समुदाय के अधिकार, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) के संभावित दुरुपयोग और औद्योगिक निवेश जैसे मुद्दों पर सदन में विस्तृत चर्चा हुई। समाजवादी पार्टी के विधायक सचिन यादव ने किन्नर समुदाय से जुड़े मुद्दे उठाते हुए कहा कि उन्हें शिक्षा, राशन कार्ड, स्वास्थ्य और रोजगार जैसी बुनियादी सुविधाओं में कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। उन्होंने ट्रांसजेंडर कल्याण आयोग की संरचना पर सवाल उठाते हुए कहा कि आयोग में शीर्ष पदों पर पुरुषों की नियुक्ति से समुदाय को न्याय मिलने पर प्रश्नचिह्न खड़ा होता है।
इस पर समाज कल्याण राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) असीम अरुण ने कहा कि लोकतंत्र के इस मंदिर में यह इस विषय पर पहला प्रश्न है। उन्होंने कहा कि सरकार ट्रांसजेंडर समुदाय के प्रति संवेदनशील है और उनके कल्याण के लिए अनेक कदम उठाए गए हैं। मंत्री ने 2014 के राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण बनाम भारत संघ के निर्णय का उल्लेख करते हुए बताया कि प्रदेश में ट्रांसजेंडर पहचान पत्र जारी किए जा रहे हैं, आयुष्मान भारत योजना का लाभ दिया जा रहा है, थानों में विशेष सेल बनाई गई है तथा ट्रांसजेंडर महोत्सव के माध्यम से मुख्यधारा से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है।
वहीं, सपा विधायक अतुल प्रधान ने नियम 300 के तहत एआई तकनीक के दुरुपयोग का मुद्दा उठाया। उन्होंने आशंका जताई कि एआई के माध्यम से किसी व्यक्ति की आवाज और चेहरा हूबहू प्रस्तुत कर गलत संदेश प्रसारित किए जा सकते हैं। उन्होंने अपने एक प्रकरण में शिकायत के बावजूद कार्रवाई न होने की बात कही और अध्यक्ष से हस्तक्षेप की मांग की। विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना ने संसदीय कार्यमंत्री सुरेश खन्ना को मामले का संज्ञान लेने के निर्देश दिए।
सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री सुनील कुमार शर्मा ने कहा कि 10 फरवरी 2026 को केंद्र सरकार द्वारा जारी गाइडलाइंस के अनुसार ही कार्रवाई संभव है। संसदीय कार्यमंत्री ने विधिक राय लेने के बाद आगे कदम उठाने की बात कही। औद्योगिक निवेश पर चर्चा के दौरान संसदीय कार्यमंत्री सुरेश खन्ना ने सपा सदस्य रागिनी सोनकर के प्रश्न का उत्तर देते हुए कहा कि निवेश प्रक्रिया तीन चरणों एमओयू, ग्राउंड ब्रेकिंग सेरेमनी और धरातल पर क्रियान्वयन में आगे बढ़ती है। उन्होंने बताया कि प्रदेश में 12 लाख करोड़ रुपये से अधिक के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं, जिनमें से चार लाख करोड़ रुपए की परियोजनाएं जमीन पर उतर चुकी हैं।
उनके अनुसार, इससे 15 लाख से अधिक लोगों को रोजगार मिला है। उन्होंने कर्मचारी भविष्य निधि संगठन के आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि वर्ष 2017 से पहले 21.24 लाख सदस्य थे, जो अब बढ़कर 40.20 लाख हो गए हैं। उन्होंने दावा किया कि राष्ट्रीय औद्योगिक वृद्धि दर 11.9 प्रतिशत है, जबकि उत्तर प्रदेश की दर 25 प्रतिशत है। निजी क्षेत्र में दलित और पिछड़े वर्ग के रोजगार को लेकर उठे प्रश्न पर उन्होंने कहा कि निजी कंपनियां अपनी आवश्यकता के अनुसार नियुक्तियां करती हैं और वहां आरक्षण का प्रावधान लागू नहीं होता। उल्लेखनीय है कि एक दिन पूर्व 11 फरवरी को राज्य का बजट पेश किया गया था। गुरुवार को राज्यपाल के अभिभाषण पर भी चर्चा जारी रही, जिसमें विभिन्न दलों के सदस्यों ने भाग लिया। सदन की कार्यवाही देर शाम तक चलती रही।
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