उत्तर प्रदेश

कानपुर में दर्दनाक हादसा, जाम में फंसी एंबुलेंस में सिपाही की मौत, पिता लगाते रहे मदद की गुहार

Kavita2
6 Nov 2026 9:16 AM IST
कानपुर में दर्दनाक हादसा, जाम में फंसी एंबुलेंस में सिपाही की मौत, पिता लगाते रहे मदद की गुहार
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कानपुर। उत्तर प्रदेश के फतेहपुर में सड़क हादसे में गंभीर रूप से घायल एक युवा सिपाही की कानपुर के हैलट अस्पताल ले जाते समय एंबुलेंस में मौत हो गई। इस घटना के बाद परिजनों ने ट्रैफिक जाम को सिपाही की मौत के लिए जिम्मेदार ठहराते हुए गंभीर आरोप लगाए हैं। परिवार का कहना है कि घायल सिपाही को समय पर अस्पताल पहुंचाया जाता तो शायद उसकी जान बच सकती थी। आरोप है कि कानपुर के टाटमिल चौराहे पर एंबुलेंस जाम में फंस गई और करीब सात किलोमीटर दूर अस्पताल पहुंचने में लगभग दो घंटे लग गए। हालांकि, ट्रैफिक पुलिस ने इन आरोपों को गलत बताते हुए दावा किया है कि एंबुलेंस समय पर अस्पताल पहुंच गई थी।

मृतक सिपाही की पहचान 22 वर्षीय प्रांशु सचान के रूप में हुई है। वह कानपुर के घाटमपुर थाना क्षेत्र के मोतीपुर गांव का रहने वाला था और वर्ष 2025 बैच का सिपाही था। प्रांशु की तैनाती अंबेडकरनगर जिले की टांडा कोतवाली में थी। उसकी असमय मौत से परिवार में कोहराम मच गया है। जवान बेटे की मौत से माता-पिता और अन्य परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है।

जानकारी के अनुसार, बुधवार को प्रांशु अपने पिता के साथ बाइक से जा रहा था। इसी दौरान फतेहपुर के कल्याणपुर थाना क्षेत्र में बक्सर मोड़ के पास एक तेज रफ्तार डंपर ने उनकी बाइक को टक्कर मार दी। टक्कर इतनी जबरदस्त थी कि प्रांशु सड़क पर गिर गया और डंपर उसके पेट के ऊपर से गुजर गया। हादसे में वह गंभीर रूप से घायल हो गया। उसकी हालत को देखते हुए तत्काल उपचार की आवश्यकता थी।

हादसे के बाद घायल सिपाही को उपचार के लिए अस्पताल पहुंचाया गया। गंभीर स्थिति को देखते हुए उसे बेहतर इलाज के लिए कानपुर के लाला लाजपत राय (एलएलआर) हैलट अस्पताल रेफर किया गया। परिजनों को उम्मीद थी कि बड़े अस्पताल में समय पर उपचार मिलने से उसकी जान बचाई जा सकेगी, लेकिन रास्ते में ही उसकी मौत हो गई।

टाटमिल चौराहे पर जाम में फंसने का आरोप

परिजनों के अनुसार, घायल प्रांशु को लेकर एंबुलेंस जब कानपुर पहुंची तो टाटमिल चौराहे के पास भारी ट्रैफिक जाम लगा हुआ था। सड़क पर बड़ी संख्या में वाहनों के खड़े होने के कारण एंबुलेंस को आगे बढ़ने में परेशानी हुई। परिवार का आरोप है कि एंबुलेंस को लंबे समय तक रास्ता नहीं मिल सका।

प्रांशु के पिता का कहना है कि वह लगातार एंबुलेंस को रास्ता दिलाने की कोशिश करते रहे। उन्होंने वाहन चालकों और मौके पर मौजूद लोगों से रास्ता देने का अनुरोध किया। बेटे की गंभीर हालत देखकर वह बेहद परेशान थे। उनका पूरा ध्यान किसी तरह बेटे को जल्द अस्पताल पहुंचाने पर था।

परिवार का आरोप है कि टाटमिल चौराहे से हैलट अस्पताल की दूरी लगभग सात किलोमीटर होने के बावजूद एंबुलेंस को अस्पताल पहुंचने में करीब दो घंटे लग गए। इस दौरान घायल सिपाही की हालत लगातार बिगड़ती चली गई।

हाथ जोड़कर रास्ता मांगते रहे पिता

घटना का सबसे भावुक पहलू घायल सिपाही के पिता की बेबसी रही। जानकारी के मुताबिक, पिता अपने बेटे को बचाने के लिए लगातार लोगों से मदद मांगते रहे। उन्होंने ट्रैफिक में फंसे वाहन चालकों से एंबुलेंस को रास्ता देने की अपील की।

परिजनों का आरोप है कि काफी प्रयास करने के बावजूद एंबुलेंस को समय पर रास्ता नहीं मिल सका। पिता की आंखों के सामने बेटे की हालत लगातार गंभीर होती जा रही थी। जब तक एंबुलेंस अस्पताल पहुंची, तब तक प्रांशु की सांसें थम चुकी थीं।

परिवार का कहना है कि यदि एंबुलेंस समय पर अस्पताल पहुंच जाती तो प्रांशु को उपचार मिलने की संभावना बढ़ सकती थी। हालांकि, चिकित्सकीय जांच के बिना यह निश्चित नहीं कहा जा सकता कि अस्पताल पहुंचने में कथित देरी ही उसकी मौत का कारण बनी।

ट्रैफिक पुलिस ने आरोपों को बताया गलत

दूसरी ओर, कानपुर ट्रैफिक पुलिस ने एंबुलेंस के लंबे समय तक जाम में फंसे रहने के आरोपों से इनकार किया है। पुलिस का कहना है कि एंबुलेंस को अस्पताल पहुंचने में ऐसी देरी नहीं हुई, जैसी परिजन बता रहे हैं।

इस मामले में परिवार और ट्रैफिक पुलिस के दावों में स्पष्ट अंतर सामने आया है। एक तरफ परिजन जाम के कारण इलाज में देरी होने का आरोप लगा रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ पुलिस का कहना है कि एंबुलेंस समय पर अस्पताल पहुंची थी।

ऐसे में एंबुलेंस के वास्तविक यात्रा समय, रास्ते की ट्रैफिक व्यवस्था और घटनाक्रम की निष्पक्ष जांच से ही स्थिति स्पष्ट हो सकेगी। अस्पताल पहुंचने का रिकॉर्ड, एंबुलेंस की आवाजाही का विवरण और रास्ते में लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज इस मामले में महत्वपूर्ण साबित हो सकती है।

जवान बेटे की मौत से परिवार में मातम

प्रांशु सचान की मौत से परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है। महज 22 वर्ष की उम्र में पुलिस सेवा में शामिल होकर उसने अपने भविष्य की शुरुआत की थी। परिवार को उम्मीद थी कि वह नौकरी में आगे बढ़ेगा और घर की जिम्मेदारियां संभालेगा।

लेकिन सड़क हादसे ने परिवार की खुशियां छीन लीं। जवान बेटे की मौत से पिता गहरे सदमे में हैं। परिजनों का कहना है कि दुर्घटना के बाद वे लगातार प्रांशु को बचाने की कोशिश करते रहे, लेकिन उनकी तमाम कोशिशें नाकाम रहीं।

इमरजेंसी वाहनों के लिए रास्ता सुनिश्चित करने पर उठे सवाल

इस घटना ने कानपुर की ट्रैफिक व्यवस्था और आपातकालीन चिकित्सा सेवाओं को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। सड़क दुर्घटना में गंभीर रूप से घायल मरीजों के लिए हर मिनट महत्वपूर्ण होता है। ऐसे में एंबुलेंस को बिना रुकावट अस्पताल पहुंचाना बेहद जरूरी है।

विशेषज्ञों के अनुसार, दुर्घटना के बाद गंभीर रूप से घायल मरीज को जितनी जल्दी उचित चिकित्सा सहायता मिलती है, उपचार की संभावनाएं उतनी बेहतर हो सकती हैं। हालांकि, प्रत्येक मामले में मरीज की चोटों की गंभीरता और अन्य चिकित्सकीय परिस्थितियां भी महत्वपूर्ण होती हैं।

कानपुर की इस घटना ने एक बार फिर एंबुलेंस के लिए रास्ता छोड़ने और भीड़भाड़ वाले चौराहों पर आपातकालीन यातायात प्रबंधन की आवश्यकता को सामने ला दिया है।

फिलहाल सिपाही प्रांशु सचान की मौत से परिवार में मातम पसरा हुआ है। परिजन अस्पताल पहुंचने में कथित देरी को लेकर सवाल उठा रहे हैं, जबकि ट्रैफिक पुलिस आरोपों को खारिज कर रही है। अब इस पूरे घटनाक्रम की वास्तविक स्थिति स्पष्ट होना जरूरी है, ताकि यह पता चल सके कि घायल सिपाही को अस्पताल पहुंचाने के दौरान किस स्तर पर और कितनी देरी हुई थी।

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