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उत्तर प्रदेश
दर्दनाक हादसा, ट्यूशन जा रहे 12 साल के छात्र को ट्रैक्टर-ट्रॉली ने रौंदा, मौत
Rajeshwari Nishad
4 Nov 2026 7:19 PM IST

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संभल। उत्तर प्रदेश के संभल जिले के चंदौसी में बुधवार को एक दर्दनाक सड़क हादसे में 12 वर्षीय छात्र की जान चली गई। पुराना बाइपास मंडी रोड पर दोपहर करीब 3:30 बजे साइकिल से ट्यूशन पढ़ने जा रहे किशोर को पीछे से आ रही तेज रफ्तार ट्रैक्टर-ट्रॉली ने जोरदार टक्कर मार दी। हादसे में छात्र गंभीर रूप से घायल हो गया। उसे उपचार के लिए मुरादाबाद ले जाया जा रहा था, लेकिन रास्ते में ही उसकी मौत हो गई। इस घटना के बाद परिवार में मातम छा गया है।
मिली जानकारी के अनुसार, 12 वर्षीय किशोर बुधवार दोपहर घर से साइकिल लेकर ट्यूशन पढ़ने के लिए निकला था। वह पुराना बाइपास मंडी रोड से गुजर रहा था। इसी दौरान पीछे से आ रही ट्रैक्टर-ट्रॉली ने उसकी साइकिल को टक्कर मार दी। टक्कर इतनी जोरदार थी कि किशोर सड़क पर गिरकर गंभीर रूप से घायल हो गया।
ट्यूशन पहुंचने से पहले हुआ दर्दनाक हादसा
बताया जा रहा है कि छात्र रोजाना की तरह अपनी पढ़ाई के लिए ट्यूशन जा रहा था। बुधवार को भी वह दोपहर में साइकिल लेकर घर से निकला था। परिवार को अंदाजा नहीं था कि कुछ देर बाद उनके सामने इतनी दुखद खबर आने वाली है।पुराना बाइपास मंडी रोड पर पहुंचते ही पीछे से आ रही ट्रैक्टर-ट्रॉली ने छात्र को चपेट में ले लिया। टक्कर लगने से उसकी साइकिल अनियंत्रित हो गई और वह सड़क पर गिर पड़ा। हादसे में उसे गंभीर चोटें आईं।दुर्घटना के बाद किशोर को तत्काल उपचार की जरूरत थी। उसकी गंभीर स्थिति को देखते हुए उसे बेहतर इलाज के लिए मुरादाबाद ले जाने की व्यवस्था की गई।
मुरादाबाद पहुंचने से पहले टूट गई सांसें
छात्र को बचाने के लिए उसे मुरादाबाद ले जाया जा रहा था, लेकिन उसकी हालत लगातार गंभीर बनी हुई थी। उपचार के लिए अस्पताल पहुंचने से पहले ही रास्ते में उसकी मौत हो गई।एक मासूम की इस तरह अचानक हुई मौत से परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा। जिस बच्चे को परिवार ने पढ़ने के लिए घर से भेजा था, वह दोबारा जीवित नहीं लौट सका।किशोर की मौत ने एक बार फिर सड़क पर साइकिल से चलने वाले बच्चों की सुरक्षा को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं। स्कूल और ट्यूशन जाने वाले बड़ी संख्या में बच्चे रोजाना साइकिल से आवागमन करते हैं। कई सड़कों पर उन्हें भारी वाहनों के साथ ही चलना पड़ता है।
तेज रफ्तार ट्रैक्टर-ट्रॉली बनी हादसे की वजह
प्रारंभिक विवरण के अनुसार, दुर्घटना में ट्रैक्टर-ट्रॉली की तेज रफ्तार प्रमुख कारण बताई जा रही है। हालांकि, वाहन चालक की वास्तविक गति, टक्कर की परिस्थितियों और लापरवाही के संबंध में आधिकारिक जांच से ही स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।ट्रैक्टर-ट्रॉलियों का इस्तेमाल कृषि कार्यों के अलावा अनाज, निर्माण सामग्री और दूसरे सामान की ढुलाई में भी किया जाता है। मंडी क्षेत्रों के आसपास इन वाहनों का आवागमन अधिक रहता है।
ऐसी सड़कों पर साइकिल, मोटरसाइकिल और पैदल चलने वाले लोगों को विशेष सावधानी बरतनी पड़ती है। भारी वाहनों के अचानक नजदीक आने या पर्याप्त दूरी नहीं मिलने से दुर्घटना का खतरा बढ़ जाता है।विशेषज्ञों के अनुसार, सड़क पर बड़े वाहनों को छोटे वाहनों से पर्याप्त दूरी बनाकर चलना चाहिए। ओवरटेक करते समय भी चालक को आगे चल रहे साइकिल सवार की सुरक्षा का ध्यान रखना जरूरी है।
स्कूल और ट्यूशन जाने वाले बच्चों की सुरक्षा पर सवाल
इस हादसे ने अभिभावकों की चिंता बढ़ाने वाला सवाल खड़ा किया है कि आखिर साइकिल से पढ़ाई के लिए निकलने वाले बच्चे सड़कों पर कितने सुरक्षित हैं।शहरी और कस्बाई इलाकों में बड़ी संख्या में छात्र साइकिल से स्कूल और कोचिंग संस्थानों तक जाते हैं। कई जगह अलग साइकिल लेन की व्यवस्था नहीं होने के कारण बच्चों को मुख्य सड़क से होकर गुजरना पड़ता है।जब उसी मार्ग से तेज रफ्तार ट्रक, ट्रैक्टर-ट्रॉली और अन्य भारी वाहन गुजरते हैं, तो दुर्घटना की आशंका बनी रहती है।ऐसे में स्कूलों और कोचिंग संस्थानों के आसपास सुरक्षित यातायात व्यवस्था सुनिश्चित करना आवश्यक है। भीड़भाड़ वाले मार्गों पर वाहनों की रफ्तार नियंत्रित रखने और सड़क सुरक्षा के नियमों का पालन कराने से हादसों के जोखिम को कम किया जा सकता है।
भारी वाहनों की आवाजाही पर निगरानी जरूरी
पुराना बाइपास और मंडी रोड जैसे मार्गों पर भारी वाहनों का संचालन सड़क सुरक्षा के लिहाज से महत्वपूर्ण विषय है। मंडी में सामान लेकर आने-जाने वाले वाहनों के साथ साइकिल सवार और पैदल लोगों की आवाजाही भी रहती है।ऐसी परिस्थितियों में वाहन चालकों की सतर्कता बेहद जरूरी हो जाती है। सड़क पर किसी साइकिल सवार बच्चे को देखते समय चालक को गति धीमी रखनी चाहिए और उससे पर्याप्त दूरी बनाकर निकलना चाहिए।सड़क सुरक्षा के लिए यातायात संकेतकों, स्पीड ब्रेकर और जरूरत के अनुसार चेतावनी बोर्ड की व्यवस्था भी उपयोगी हो सकती है। हालांकि, इन उपायों का निर्धारण संबंधित सड़क की वास्तविक स्थिति और यातायात आकलन के आधार पर ही किया जाना चाहिए।
परिवार में मातम, उठ रहे कई सवाल
12 वर्षीय छात्र की अचानक मौत से परिवार का जीवन बदल गया है। पढ़ाई के लिए निकले बच्चे की मौत किसी भी परिवार के लिए असहनीय दुख है।घटना के बाद यह सवाल भी महत्वपूर्ण है कि हादसे के समय ट्रैक्टर-ट्रॉली किस रफ्तार से चल रही थी और क्या चालक ने साइकिल सवार को सुरक्षित दूरी दी थी। इन सवालों का जवाब दुर्घटना की जांच में सामने आ सकता है।
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