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ताजमहल के प्रवेश द्वार पर झुके पर्यटक लगाए बम-बम भोले के नारे

आगरा। विश्व प्रसिद्ध ताजमहल में कुछ पर्यटकों द्वारा चप्पल उतारने, प्रवेश द्वार की चौखट को झुककर छूने और हाथ जोड़कर ‘बम-बम भोले’ का उद्घोष करने के पांच वीडियो रविवार को इंटरनेट मीडिया पर प्रसारित हुए। वीडियो में पर्यटक ताजमहल के रॉयल गेट से प्रवेश करते समय धार्मिक स्थलों की तरह चौखट के सामने झुकते और हाथ जोड़ते नजर आ रहे हैं। इन वीडियो के सामने आने के बाद ताजमहल और उससे जुड़े पुराने दावों को लेकर इंटरनेट मीडिया पर एक बार फिर चर्चा शुरू हो गई है।
बताया जा रहा है कि इंटरनेट मीडिया पर 14 सेकेंड अवधि वाले कुल पांच वीडियो प्रसारित हुए हैं। इनमें अलग-अलग पर्यटक रॉयल गेट के पास दिखाई दे रहे हैं। वीडियो में कुछ लोग गेट की चौखट के सामने झुकते हैं और उसे छूने के बाद हाथ जोड़ते नजर आते हैं। इसके बाद पर्यटक ‘बम-बम भोले’ का उद्घोष करते हुए परिसर में प्रवेश करते दिखाई देते हैं।
प्रसारित वीडियो में कुछ पर्यटकों ने रॉयल गेट से अंदर जाने से पहले अपनी चप्पलें भी उतार दीं। वे नंगे पैर प्रवेश द्वार की ओर बढ़ते और चौखट के सामने सिर झुकाते दिख रहे हैं। पर्यटकों का यह व्यवहार आम तौर पर मंदिरों एवं अन्य धार्मिक स्थलों पर प्रवेश करते समय अपनाई जाने वाली परंपरा जैसा दिखाई दे रहा है। इसी कारण वीडियो तेजी से लोगों का ध्यान खींच रहे हैं।
वीडियो किस दिन और किस समय रिकॉर्ड किए गए, इसकी स्पष्ट जानकारी सामने नहीं आई है। इन्हें बनाने वाले व्यक्ति और वीडियो में दिखाई दे रहे पर्यटकों की पहचान भी सार्वजनिक नहीं हुई है। रविवार को इंटरनेट मीडिया पर प्रसारित होने के बाद इन्हें अलग-अलग मंचों पर साझा किया जाने लगा। वीडियो पर लोग अपने-अपने नजरिये से प्रतिक्रियाएं व्यक्त कर रहे हैं।
ताजमहल को लेकर लंबे समय से अलग-अलग दावे सामने आते रहे हैं। कुछ संगठन और व्यक्ति इसे प्राचीन शिव मंदिर ‘तेजोमहालय’ बताते रहे हैं। हालांकि ताजमहल के शिव मंदिर होने के दावे को भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण यानी एएसआई लगातार स्वीकार नहीं करता रहा है। एएसआई ताजमहल को मुगलकालीन संरक्षित स्मारक मानता है और इसका संरक्षण निर्धारित पुरातात्विक नियमों के तहत किया जाता है।
ऐसे में पर्यटकों द्वारा रॉयल गेट की चौखट छूने, चप्पल उतारने और ‘बम-बम भोले’ का उद्घोष करने की घटना को इसी पुराने विवाद से जोड़कर देखा जा रहा है। वीडियो में दिखाई दे रहे पर्यटकों ने ऐसा क्यों किया, इसके बारे में उनकी ओर से कोई औपचारिक बयान सामने नहीं आया है। इसलिए उनके उद्देश्य को लेकर निश्चित रूप से कुछ नहीं कहा जा सकता।
ताजमहल भारत के सर्वाधिक महत्वपूर्ण संरक्षित स्मारकों में शामिल है। यहां प्रतिदिन देश-विदेश से बड़ी संख्या में पर्यटक पहुंचते हैं। स्मारक परिसर में प्रवेश और भ्रमण के लिए एएसआई द्वारा कई नियम निर्धारित किए गए हैं। सुरक्षा जांच के बाद पर्यटकों को परिसर में प्रवेश दिया जाता है। स्मारक की सुरक्षा और व्यवस्था के लिए सुरक्षाकर्मी भी तैनात रहते हैं।
रॉयल गेट ताजमहल परिसर के प्रमुख प्रवेश स्थलों में से एक है। मुख्य मकबरे की ओर जाने वाले पर्यटक इस भव्य दरवाजे से होकर गुजरते हैं। इंटरनेट मीडिया पर सामने आए पांचों वीडियो इसी गेट के आसपास बनाए गए बताए जा रहे हैं। वीडियो में पर्यटकों की गतिविधियों के दौरान वहां दूसरे पर्यटक भी मौजूद दिखाई देते हैं।
इस घटना ने संरक्षित स्मारकों के भीतर धार्मिक गतिविधियों और उद्घोषों से जुड़े नियमों को लेकर भी चर्चा खड़ी कर दी है। ऐतिहासिक स्थलों पर अलग-अलग धर्मों, क्षेत्रों और देशों से लोग पहुंचते हैं। ऐसे स्थानों पर व्यवस्था और स्मारक की गरिमा बनाए रखने के लिए पर्यटकों से निर्धारित नियमों का पालन करने की अपेक्षा की जाती है।
हालांकि इन वीडियो के संबंध में किसी पर्यटक के खिलाफ कार्रवाई होने या अधिकारियों को औपचारिक शिकायत मिलने की जानकारी सामने नहीं आई है। वीडियो सामने आने के बाद ताजमहल की सुरक्षा व्यवस्था से जुड़े अधिकारियों की प्रतिक्रिया भी उपलब्ध नहीं हो सकी है। वीडियो में दिख रही गतिविधि सुरक्षा कर्मचारियों की मौजूदगी में हुई या उनसे बचकर की गई, यह भी स्पष्ट नहीं है।
इससे पहले भी ताजमहल परिसर में धार्मिक गतिविधियों के प्रयासों से जुड़े मामले सामने आते रहे हैं। हर बार स्मारक के ऐतिहासिक स्वरूप और ‘तेजोमहालय’ के दावे को लेकर बहस तेज होती रही है। वर्तमान वीडियो ने भी उसी बहस को एक बार फिर इंटरनेट मीडिया पर चर्चा के केंद्र में ला दिया है।
ताजमहल यूनेस्को की विश्व धरोहर सूची में शामिल है और इसकी पहचान विश्व स्तर पर मुगल स्थापत्य कला के प्रमुख उदाहरण के रूप में होती है। एएसआई इसके संरक्षण, मरम्मत और परिसर की व्यवस्थाओं का संचालन करता है। दूसरी ओर, कुछ पक्ष इसे शिव मंदिर बताते हुए समय-समय पर अपने दावे प्रस्तुत करते रहे हैं। इसके बावजूद एएसआई का पक्ष स्पष्ट रहा है कि ताजमहल के ‘तेजोमहालय’ होने के दावे का पुरातात्विक आधार स्वीकार्य नहीं है।
फिलहाल रविवार को प्रसारित हुए इन पांच वीडियो की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है। वीडियो कहां से सबसे पहले साझा हुए और इन्हें किसने रिकॉर्ड किया, इसकी जानकारी भी सामने नहीं आई है। वीडियो में दिखाई दे रही गतिविधियों के संबंध में आधिकारिक प्रतिक्रिया मिलने के बाद ही स्थिति अधिक स्पष्ट हो सकेगी।





