उत्तर प्रदेश

दिन में चाय की दुकान संभालती हैं तीन बहनें, रात में पढ़ाई कर देख रहीं IAS-IPS बनने का सपना

Kavita2
24 Sept 2026 1:00 PM IST
दिन में चाय की दुकान संभालती हैं तीन बहनें, रात में पढ़ाई कर देख रहीं IAS-IPS बनने का सपना
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गोरखपुर। दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय के गेट के सामने सुबह जैसे ही चाय की केतली चढ़ती है, उसके साथ तीन बहनों के सपनों की उड़ान भी शुरू हो जाती है। कोई ग्राहक चाय मांगता है तो कोई मैगी का ऑर्डर देता है। ग्राहकों की आवाज और चाय की भाप के बीच वर्तिका, वंदिता और अवंतिका अपने भविष्य की तैयारी में जुटी हैं। महराजगंज की रहने वाली इन तीन सगी बहनों का लक्ष्य प्रशासनिक सेवा में जाना है। परिवार की आर्थिक परेशानियों के बीच उन्होंने पढ़ाई जारी रखने और अपने पैरों पर खड़े होने के लिए चाय का स्टॉल शुरू किया है।

तीनों बहनों के लिए विश्वविद्यालय गेट के सामने स्थित ‘विलिवर विस्ट्रो’ सिर्फ चाय और मैगी बेचने की जगह नहीं है। यह उनके संघर्ष, आत्मनिर्भरता और सपनों को पूरा करने की कोशिश का माध्यम बन चुका है। दिन में तीनों बहनें मिलकर स्टॉल संभालती हैं और समय निकालकर अपनी पढ़ाई भी करती हैं।

परिवार की जिंदगी वर्ष 2017 में अचानक बदल गई थी। उनके पिता राम सकल उपाध्याय को लकवा पड़ गया। पिता की बीमारी के बाद इलाज और दवाइयों पर खर्च बढ़ने लगा। परिवार की आर्थिक स्थिति पर इसका सीधा असर पड़ा। जिम्मेदारियां बढ़ीं तो तीनों बहनों के सामने पढ़ाई जारी रखने की चुनौती भी खड़ी हो गई।

हालात कठिन जरूर थे, लेकिन तीनों ने अपनी पढ़ाई और भविष्य के सपनों को छोड़ने के बजाय खुद कमाई का रास्ता खोजने का फैसला किया। करीब तीन महीने पहले उन्होंने किसी तरह आठ हजार रुपये जुटाए और दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय के गेट के सामने एक छोटा चाय का स्टॉल शुरू कर दिया।

शुरुआत बेहद सीमित संसाधनों के साथ हुई। चाय बनाने के जरूरी सामान और छोटे से स्टॉल के सहारे तीनों ने काम शुरू किया। धीरे-धीरे ग्राहकों की संख्या बढ़ने लगी। विद्यार्थियों और आसपास के लोगों की मांग को देखते हुए उन्होंने चाय के साथ मैगी को भी अपने मेन्यू में शामिल कर लिया।

22 वर्षीय वर्तिका तीनों बहनों में सबसे बड़ी हैं। वह बीएससी की पढ़ाई पूरी कर चुकी हैं। उनका सपना सिविल सेवा परीक्षा पास कर प्रशासनिक अधिकारी बनने का है। स्टॉल की जिम्मेदारी निभाने के साथ वह अपनी तैयारी को भी समय देती हैं। उनका मानना है कि आर्थिक परेशानियां लक्ष्य तक पहुंचने का रास्ता मुश्किल जरूर कर सकती हैं, लेकिन मेहनत जारी रखी जाए तो आगे बढ़ने की उम्मीद बनी रहती है।

21 वर्षीय वंदिता का लक्ष्य भारतीय पुलिस सेवा यानी IPS में जाना है। वह भी प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रही हैं। ग्राहकों को चाय और मैगी देने से लेकर दुकान के रोजमर्रा के कामों में वह अपनी दोनों बहनों का साथ देती हैं। दुकान का काम खत्म होने के बाद पढ़ाई उनकी दिनचर्या का महत्वपूर्ण हिस्सा है।

तीनों में सबसे छोटी 19 वर्षीय अवंतिका की आंखों में भी IAS बनने का सपना है। बड़ी बहनों के साथ वह स्टॉल संभालती हैं और अपनी पढ़ाई जारी रखे हुए हैं। कम उम्र में परिवार की आर्थिक जिम्मेदारियों को समझते हुए वह अपनी बहनों के साथ कदम से कदम मिलाकर चल रही हैं।

तीनों बहनों की दिनचर्या आसान नहीं है। चाय का स्टॉल चलाने के लिए सुबह से तैयारी करनी पड़ती है। ग्राहकों के आने के साथ काम बढ़ जाता है। चाय बनाना, मैगी तैयार करना, सामान का हिसाब रखना और स्टॉल की व्यवस्था संभालने जैसे काम तीनों मिलकर करती हैं। इसके बावजूद वे अपनी पढ़ाई के लिए समय निकालती हैं।

विश्वविद्यालय के सामने स्टॉल होने के कारण उनके ग्राहकों में बड़ी संख्या विद्यार्थियों की भी होती है। एक तरफ विश्वविद्यालय के छात्र अपनी कक्षाओं और परीक्षाओं की चर्चा करते हुए चाय पीते हैं, वहीं दूसरी तरफ चाय परोसने वाली तीनों बहनें भी अपने भविष्य की परीक्षा की तैयारी में जुटी रहती हैं।

पिता की बीमारी ने परिवार के सामने जो परिस्थितियां पैदा कीं, उनसे बाहर निकलने के लिए तीनों ने किसी पर निर्भर रहने के बजाय खुद मेहनत करने का रास्ता चुना। आठ हजार रुपये की छोटी सी पूंजी से शुरू हुआ यह स्टॉल अब परिवार के खर्च में मदद करने के साथ उनकी पढ़ाई को जारी रखने का साधन भी बन रहा है।

वर्तिका, वंदिता और अवंतिका की कहानी इसलिए भी खास है क्योंकि उन्होंने आर्थिक परेशानी को पढ़ाई छोड़ने की वजह नहीं बनने दिया। अक्सर आर्थिक संकट आने पर परिवार के बच्चों की शिक्षा सबसे पहले प्रभावित होती है। इन बहनों ने इसके उलट पढ़ाई जारी रखने के लिए काम करना शुरू किया और मेहनत के साथ दोनों जिम्मेदारियां निभाने का फैसला किया।

चाय के स्टॉल पर आने वाले लोग जब इन बहनों के लक्ष्य के बारे में जानते हैं तो उनकी मेहनत की चर्चा भी करते हैं। विश्वविद्यालय के माहौल के बीच अपना छोटा कारोबार चलाते हुए तीनों बहनें लगातार अपने सपनों की तरफ बढ़ने की कोशिश कर रही हैं।

उनका संघर्ष केवल प्रतियोगी परीक्षा पास करने तक सीमित नहीं है। उन्हें एक साथ परिवार की आर्थिक स्थिति, पिता के इलाज और अपनी शिक्षा की जिम्मेदारी से भी जूझना पड़ रहा है। इसके बावजूद उनके लक्ष्य स्पष्ट हैं। एक बहन प्रशासनिक अधिकारी बनना चाहती है, दूसरी IPS में जाने की तैयारी कर रही है और सबसे छोटी बहन भी IAS बनने का सपना देख रही है।

तीनों के सामने अभी लंबा सफर है। सिविल सेवा जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए लगातार अध्ययन, सही मार्गदर्शन और संसाधनों की जरूरत होती है। आर्थिक सीमाओं के बीच यह तैयारी उनके लिए चुनौतीपूर्ण है, लेकिन फिलहाल उन्होंने अपने सपनों को छोड़ने के बजाय संघर्ष के साथ आगे बढ़ने का रास्ता चुना है।

सुबह चाय की केतली से उठती भाप के साथ शुरू होने वाली इन तीन बहनों की दिनचर्या देर तक मेहनत और पढ़ाई के बीच चलती रहती है। ‘विलिवर विस्ट्रो’ की छोटी सी दुकान उनके लिए केवल रोजगार नहीं बल्कि उम्मीद का ठिकाना है। यहां बिकने वाली हर चाय के साथ परिवार को आर्थिक सहारा मिलता है और IAS-IPS बनने के उनके सपनों को आगे बढ़ाने की ताकत भी।

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