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उत्तर प्रदेश
UP में सपा के 3 बागी विधायक BJP में शामिल, स्मृति ईरानी और पंकज चौधरी ने किया स्वागत
jantaserishta.com
14 Oct 2026 3:53 PM IST

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लखनऊ: तीनों विधायकों ने 2022 का विधानसभा चुनाव समाजवादी पार्टी के टिकट पर जीता था। हालांकि, फरवरी 2024 में उत्तर प्रदेश के राज्यसभा चुनाव के दौरान उन्होंने पार्टी के निर्देशों के खिलाफ जाकर भाजपा प्रत्याशियों के पक्ष में मतदान किया था। इसके बाद से ही उनके राजनीतिक रुख को लेकर चर्चाएं तेज थीं।
कार्यक्रम में भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी और राष्ट्रीय महामंत्री स्मृति ईरानी मौजूद थीं। सदस्यता लेने के बाद पंकज चौधरी ने तीनों विधायकों को भगवा पटका पहनाकर पार्टी में उनका स्वागत किया।
राकेश प्रताप सिंह ने कहा कि उनका उद्देश्य गौरीगंज से खुद विधायक बनना नहीं, बल्कि वहां से भाजपा का विधायक जिताना है। उन्होंने कहा कि पार्टी जिसे भी उम्मीदवार बनाएगी, उसे जिताने के लिए वे काम करेंगे।
स्मृति ईरानी ने कांग्रेस और गांधी परिवार पर साधा निशाना
कार्यक्रम में स्मृति ईरानी ने कांग्रेस और गांधी परिवार पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि कई दलों को एक साथ लाने से कांग्रेस अपने नेता को देश का शीर्ष नेतृत्व नहीं दिला पाएगी। उन्होंने उत्तर प्रदेश में कांग्रेस के लगातार नौ विधानसभा चुनाव हारने का दावा भी किया।
स्मृति ईरानी ने अमेठी का जिक्र करते हुए कहा कि यदि गांधी परिवार अपने दम पर इस क्षेत्र में चुनाव नहीं लड़ सकता, तो वह पूरे देश का नेतृत्व कैसे करेगा। उन्होंने विपक्ष पर चुनाव आयोग को लेकर आरोप लगाने और लोकतंत्र को निशाना बनाने का भी आरोप लगाया।
भाजपा प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी ने कहा कि अमेठी और रायबरेली किसी एक परिवार की निजी जागीर नहीं हैं। उन्होंने दावा किया कि मौजूदा सरकार के कार्यकाल में इन क्षेत्रों में विकास कार्यों पर अधिक ध्यान दिया जा रहा है। उन्होंने विपक्ष की ओर से चुनाव आयोग पर लगाए जा रहे आरोपों का भी विरोध किया।
अभय सिंह बोले- रामचरितमानस जलाने पर सपा ने विरोध नहीं किया
भाजपा में शामिल होने के बाद अभय सिंह ने सपा छोड़ने के पीछे धार्मिक भावनाओं से जुड़ा कारण बताया। उन्होंने कहा कि रामचरितमानस जलाए जाने की घटना पर सपा की ओर से विरोध नहीं किए जाने से उन्हें दुख पहुंचा था। इसी वजह से उन्होंने पार्टी छोड़ने का निर्णय लिया।
अभय सिंह ने 2012 से 2017 के बीच सपा सरकार में नौकरियों में कथित गड़बड़ियों का भी आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि पहले भर्तियों में योग्य उम्मीदवारों के बजाय चापलूसी करने वालों को प्राथमिकता मिलती थी। उन्होंने दावा किया कि अब नौकरियों से जुड़े मामलों में कार्रवाई हो रही है।
उन्होंने राशन कार्ड और आवास जैसी योजनाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि महिलाओं को घर की मालकिन बनाने की दिशा में काम हुआ है। साथ ही उन्होंने आगामी चुनाव में सपा प्रत्याशी को बड़े अंतर से हराने का दावा किया।
विनोद चतुर्वेदी ने राम मंदिर और विकास का मुद्दा उठाया
विनोद चतुर्वेदी ने भाजपा में शामिल होने की वजह बताते हुए राम मंदिर का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि अयोध्या में राम मंदिर के उद्घाटन के समय सदन में दर्शन के लिए जाने की बात कही गई थी, लेकिन पार्टी नेतृत्व की ओर से इसकी अनुमति नहीं दी गई। उनके मुताबिक, यह उनकी धार्मिक आस्था से जुड़ा विषय था।
उन्होंने उत्तर प्रदेश में योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में हुए विकास कार्यों का भी जिक्र किया। चतुर्वेदी ने कहा कि जनता विकास चाहती है और वह इसी उद्देश्य से भाजपा के साथ आए हैं।
वहीं, राकेश प्रताप सिंह ने पहले भी सार्वजनिक रूप से कहा था कि उनका फैसला विधायक पद या टिकट से जुड़ा नहीं है। उन्होंने धार्मिक मामलों और गरीबों-वंचितों की मदद को अपनी राजनीति का अहम हिस्सा बताया था।
फरवरी 2024 में की थी क्रॉस वोटिंग
तीनों विधायकों ने 2022 का विधानसभा चुनाव समाजवादी पार्टी के टिकट पर जीता था। हालांकि, फरवरी 2024 में उत्तर प्रदेश के राज्यसभा चुनाव के दौरान उन्होंने पार्टी के निर्देशों के खिलाफ जाकर भाजपा प्रत्याशियों के पक्ष में मतदान किया था। इसके बाद से ही उनके राजनीतिक रुख को लेकर चर्चाएं तेज थीं।
उस चुनाव में सपा के सात विधायकों ने क्रॉस वोटिंग की थी। इनमें अभय सिंह, राकेश प्रताप सिंह और विनोद चतुर्वेदी के अलावा मनोज पांडेय, पूजा पाल, आशुतोष मौर्य और राकेश पांडेय के नाम शामिल थे।
तीनों विधायकों के भाजपा में शामिल होने से पहले ही उनके राजनीतिक रुख को लेकर चर्चाएं तेज थीं। अब औपचारिक सदस्यता के बाद अमेठी समेत संबंधित विधानसभा क्षेत्रों में सियासी समीकरण बदलने की संभावना है। हालांकि, भाजपा ने अभी तक उनकी भविष्य की चुनावी भूमिका या टिकट को लेकर कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की है।
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