उत्तर प्रदेश

तीन पीढ़ियां एक साथ उठा रहीं कांवड़, रजबन का परिवार बना आस्था और संस्कार की मिसाल

Kavita2
8 Aug 2026 5:14 PM IST
तीन पीढ़ियां एक साथ उठा रहीं कांवड़, रजबन का परिवार बना आस्था और संस्कार की मिसाल
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मेरठ। सावन का महीना भगवान शिव की भक्ति और आस्था के लिए विशेष माना जाता है। इन दिनों कांवड़ यात्रा के मार्गों पर हर तरफ भोलेनाथ के जयकारे गूंज रहे हैं। लाखों श्रद्धालु हरिद्वार और अन्य पवित्र स्थलों से गंगाजल लेकर अपने-अपने गंतव्य की ओर बढ़ रहे हैं। इस यात्रा में केवल धार्मिक आस्था ही नहीं, बल्कि पारिवारिक संस्कार और पीढ़ियों के बीच जुड़ाव की तस्वीर भी देखने को मिल रही है।

कांवड़ यात्रा श्रद्धालुओं के लिए भगवान भोलेनाथ की आराधना का माध्यम है, लेकिन इसके साथ यह नई पीढ़ी तक धार्मिक संस्कार और परंपराएं पहुंचाने का जरिया भी बन रही है। रजबन मोहल्ले का एक परिवार इसी भावना की मिसाल पेश कर रहा है। इस परिवार की तीन पीढ़ियां एक साथ कांवड़ यात्रा में शामिल हैं। बुजुर्गों से लेकर नई पीढ़ी तक सभी सदस्य कांवड़ लेकर भगवान शिव की भक्ति में आगे बढ़ रहे हैं।

परिवार के साथ भक्ति का सफर

रजबन मोहल्ले के इस परिवार ने कांवड़ यात्रा को केवल धार्मिक अनुष्ठान के रूप में नहीं, बल्कि परिवार को एक साथ जोड़ने वाले अवसर के तौर पर भी अपनाया है। परिवार के सदस्य एक-दूसरे का सहयोग करते हुए यात्रा पूरी कर रहे हैं।

बुजुर्ग पीढ़ी के लिए यह यात्रा वर्षों से चली आ रही आस्था और परंपरा का हिस्सा है, जबकि युवा और बच्चे इसे अपने परिवार के धार्मिक संस्कारों को समझने और आगे बढ़ाने के अवसर के रूप में देख रहे हैं।

तीन पीढ़ियों का एक साथ कांवड़ उठाना इस बात का संदेश भी देता है कि धार्मिक परंपराएं केवल एक पीढ़ी तक सीमित नहीं रहतीं। परिवार के बड़े जब अपने साथ बच्चों और युवाओं को इन परंपराओं से जोड़ते हैं तो संस्कार सहज रूप से अगली पीढ़ी तक पहुंचते हैं।

बुजुर्गों से सीख रही नई पीढ़ी

कांवड़ यात्रा के दौरान परिवार के बुजुर्ग सदस्य युवा पीढ़ी को यात्रा की परंपराओं और नियमों के बारे में बताते हुए नजर आते हैं। रास्ते में भगवान शिव के जयकारों के बीच परिवार के सभी सदस्य एक-दूसरे का उत्साह बढ़ाते हैं।

यात्रा में शामिल नई पीढ़ी के लिए यह अनुभव केवल पैदल चलने या कांवड़ उठाने तक सीमित नहीं है। उन्हें अपने परिवार के बुजुर्गों के साथ समय बिताने और उनसे धार्मिक परंपराओं के बारे में जानने का अवसर भी मिल रहा है।

बुजुर्गों का मानना है कि आज की तेज रफ्तार जिंदगी में बच्चों और युवाओं को अपनी संस्कृति और परंपराओं से जोड़ना जरूरी है। कांवड़ यात्रा ऐसा अवसर देती है, जहां परिवार साथ चलता है और एक-दूसरे के अनुभव साझा करता है।

आस्था के साथ पारिवारिक एकजुटता

कांवड़ यात्रा के दौरान श्रद्धालुओं को कई तरह की चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। लंबी दूरी तक पैदल चलना, मौसम की स्थिति और यात्रा की थकान के बावजूद श्रद्धालु भगवान शिव की भक्ति में आगे बढ़ते रहते हैं।

ऐसे में परिवार के सभी सदस्यों का साथ होना यात्रा को और आसान बनाता है। कोई सदस्य थकता है तो दूसरा उसका हौसला बढ़ाता है। बुजुर्गों का ध्यान युवा रखते हैं और छोटे सदस्यों की जिम्मेदारी परिवार के बड़े संभालते हैं।

रजबन का यह परिवार भी इसी तरह एक-दूसरे का सहारा बनकर यात्रा कर रहा है। तीन पीढ़ियों का साथ इस धार्मिक यात्रा को पारिवारिक उत्सव का रूप दे रहा है।

नई पीढ़ी तक पहुंच रहे संस्कार

कांवड़ यात्रा की सबसे खास बात यह है कि इसमें धार्मिक आस्था के साथ अनुशासन, सेवा और सहयोग की भावना भी देखने को मिलती है। परिवार के बड़े जब बच्चों को साथ लेकर यात्रा करते हैं तो उन्हें इन मूल्यों को करीब से समझने का अवसर मिलता है।

परिवार के सदस्यों का मानना है कि धार्मिक यात्राएं बच्चों को अपनी संस्कृति और परंपराओं से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। आधुनिक जीवनशैली के बीच ऐसे आयोजन नई पीढ़ी को अपनी जड़ों से जोड़ने का माध्यम बन सकते हैं।

तीन पीढ़ियों का एक साथ कांवड़ उठाना इसी परंपरा को आगे बढ़ाने की तस्वीर है।

भक्ति के साथ सेवा का भाव

कांवड़ यात्रा के दौरान मार्ग में जगह-जगह श्रद्धालुओं के लिए सेवा शिविर लगाए जाते हैं। स्थानीय लोग कांवड़ियों को भोजन, पानी, चिकित्सा सुविधा और आराम की व्यवस्था उपलब्ध कराते हैं।

ऐसे माहौल में परिवार के सदस्यों को सेवा और सहयोग की भावना को भी करीब से अनुभव करने का अवसर मिलता है। कांवड़ यात्रा केवल व्यक्तिगत आस्था नहीं, बल्कि सामूहिक भागीदारी और सेवा का भी बड़ा पर्व बन जाती है।

शिव भक्ति में लीन परिवार

रजबन मोहल्ले का यह परिवार यात्रा के दौरान भगवान शिव की भक्ति में लीन है। तीन पीढ़ियों के सदस्यों का एक साथ कांवड़ लेकर चलना आसपास के लोगों के लिए भी आकर्षण का केंद्र बना हुआ है।

परिवार के लिए यह यात्रा केवल गंगाजल लाकर भगवान शिव का जलाभिषेक करने तक सीमित नहीं है। यह उनके लिए परिवार की एकजुटता, धार्मिक विश्वास और पीढ़ियों के बीच संस्कारों के हस्तांतरण का प्रतीक भी है।

कांवड़ यात्रा के दौरान ऐसे परिवारों की तस्वीरें यह बताती हैं कि आस्था के साथ परंपराएं भी आगे बढ़ रही हैं। बुजुर्गों की श्रद्धा और नई पीढ़ी का उत्साह जब एक साथ दिखाई देता है तो धार्मिक यात्रा का स्वरूप और भी भावनात्मक हो जाता है।

रजबन मोहल्ले का यह परिवार इसी भावना को साकार कर रहा है। तीन पीढ़ियां एक साथ कांवड़ लेकर भगवान भोलेनाथ की भक्ति में आगे बढ़ रही हैं और अपनी परंपरा को अगली पीढ़ी तक पहुंचाने का संदेश दे रही हैं।

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