उत्तर प्रदेश

पार्किंग विवाद में तीन मौतें: लखनऊ के पीड़ित परिवार ने लगाई न्याय की गुहार

nidhi
29 Oct 2026 8:21 AM IST
पार्किंग विवाद में तीन मौतें: लखनऊ के पीड़ित परिवार ने लगाई न्याय की गुहार
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दोषियों पर सख्त कार्रवाई की मांग
लखनऊ: राजधानी के सआदतगंज क्षेत्र में एक ही परिवार के तीन लोगों की हत्या के बाद पीड़ित परिजनों का दुख और आक्रोश सामने आया है। नौबस्ता के ब्राह्मणी टोला में हुई इस वारदात में शिवाजी तिवारी, उनके भाई शिवेंद्र उर्फ शंभू तिवारी और बेटे सुयश तिवारी की जान चली गई। चबूतरे और गाड़ी खड़ी करने को लेकर चले आ रहे विवाद ने परिवार की जिंदगी बदल दी। परिजन अब आरोपियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई और पुलिस की कथित लापरवाही की जांच की मांग कर रहे हैं।
परिवार की पीड़ा पुराने परिचय और टूटे भरोसे से भी जुड़ी है। आपके दिए विवरण में परिजनों ने आरोप लगाया है कि जिस परिवार को करीब दस साल अपने घर में रहने दिया, उसी ने उनका घर उजाड़ दिया। हालांकि दस साल तक घर में रखने संबंधी इस दावे की स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध रिपोर्टों से नहीं हो सकी है। इसे परिजनों के आरोप के रूप में ही देखा जाना चाहिए।
पिता, पुत्र और भाई की मौत से गहरा सदमा
सोमवार, 26 अक्टूबर को हुई गोलीबारी में एक साथ तीन सदस्यों की मौत ने परिवार को गहरे संकट में डाल दिया। प्रकाशित रिपोर्टों के अनुसार, शिवाजी तिवारी सचिवालय से सेवानिवृत्त कर्मचारी थे। उनके बेटे सुयश कारोबार करते थे। पुलिस ने पड़ोसी ऋषभ शुक्ला को मुख्य आरोपी के रूप में गिरफ्तार किया है। आरोप है कि विवाद के दौरान उसने पिस्टल से फायरिंग की। AajTak
घटना के बाद परिवार की महिलाएं अपने प्रियजनों को खोने के सदमे में हैं। शिवाजी की पत्नी उषा और उनके भाई के परिवार के सामने अब अपनों की अनुपस्थिति में जीवन संभालने की चुनौती है। अमर उजाला की रिपोर्ट में शिवेंद्र की बेटी सुमेधा की मौजूदगी और घटना के दौरान परिवार की बेबसी का उल्लेख किया गया है।
पार्किंग और चबूतरे को लेकर था विवाद
शुरुआती रिपोर्टों के मुताबिक, दोनों परिवारों के बीच बरगद के पेड़ के पास की जगह, पार्किंग और चबूतरा बनाने को लेकर तनाव था। स्थानीय लोगों के हवाले से बताया गया कि इस मुद्दे पर पहले भी विवाद हो चुका था। घटना वाले दिन मामला बढ़ा और गोलीबारी हुई। पुलिस की जांच में घटनाक्रम तथा प्रत्येक आरोपी की भूमिका स्पष्ट होनी है।
विवाद की अवधि को लेकर प्रकाशित विवरण अलग-अलग हैं। टीवी9 की रिपोर्ट पुराने विवाद को लगभग दस साल से जोड़ती है, जबकि इंडियन एक्सप्रेस ने पुलिस के हवाले से पिछले दो महीनों में तनाव बढ़ने की बात लिखी है। इसलिए पुराने मतभेद और हाल के टकराव को एक ही अवधि मानकर प्रस्तुत करना उचित नहीं होगा।
शादी की तैयारियों के बीच परिवार पर टूटा दुख
सुयश की शादी की तैयारी इस घटना का सबसे भावुक पहलू बनकर सामने आई है। परिवार जिस आयोजन के लिए जुटा था, उससे पहले ही उसने होने वाले दूल्हे को खो दिया। इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, सुयश इलेक्ट्रिकल हार्डवेयर का कारोबार करते थे और उनकी शादी पांच दिसंबर को होनी थी। ऐसे में परिवार के लिए यह नुकसान केवल तीन सदस्यों की मृत्यु तक सीमित नहीं है। भविष्य की योजनाएं, पारिवारिक जिम्मेदारियां और रोजमर्रा के सहारे भी प्रभावित हुए हैं। परिजनों की न्याय की मांग के साथ उनके पुनर्वास और भावनात्मक सहारे की जरूरत भी जुड़ी हुई है।
शव घर पहुंचे तो बढ़ा आक्रोश
पोस्टमार्टम के बाद तीनों के शव घर पहुंचने पर परिजन और आसपास के लोग एकत्र हुए। नवभारत टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, परिवार तथा स्थानीय निवासियों ने पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए और नारेबाजी की। परिजनों का आरोप है कि पहले की शिकायतों पर प्रभावी कार्रवाई होती तो वारदात रोकी जा सकती थी।
पड़ोसी अनूप सक्सेना ने भी प्रकाशित बयान में कहा कि विवाद पहले से चल रहा था। हालांकि शिकायतों पर किस स्तर पर क्या कार्रवाई हुई और कहां चूक रही, इसका निर्धारण संबंधित रिकॉर्ड तथा विभागीय जांच से होगा। आरोपों को जांच के निष्कर्ष से अलग रखना आवश्यक है।
पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई, जांच जारी
मामले में सआदतगंज के थाना प्रभारी और संबंधित पुलिस चौकी के उपनिरीक्षक को निलंबित किया गया है। पुलिस आयुक्त ने कथित लापरवाही को लेकर विभागीय जांच के आदेश भी दिए हैं। इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, मुख्य आरोपी के अतिरिक्त उसके परिवार के पांच लोगों को गिरफ्तार किया गया है। उनकी व्यक्तिगत भूमिका जांच का विषय है।
पुलिस के बयान के हवाले से नवभारत टाइम्स ने घटना में इस्तेमाल पिस्टल और चार खोखा कारतूस बरामद होने की जानकारी दी है। घटना के बाद इलाके में पुलिस बल भी तैनात किया गया। अब पीड़ित परिवार की उम्मीद निष्पक्ष जांच और प्रभावी कानूनी कार्रवाई पर टिकी है। पुराने विवाद, पूर्व शिकायतों और गोलीबारी के घटनाक्रम की जांच इस मामले के अहम पहलू हैं। आरोपियों के विरुद्ध आरोपों का अंतिम निर्धारण अदालत में साक्ष्यों के आधार पर होगा।
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