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गूगल पर बाजार तलाशकर नाबालिगों से कराते थे मोबाइल चोरी, तीन आरोपी गिरफ्तार

गुन्नौर। गूगल पर प्रसिद्ध बाजारों की जानकारी जुटाकर वहां नाबालिगों से मोबाइल फोन चोरी कराने वाले गिरोह का तरीका पुलिस पूछताछ में सामने आया है। गुन्नौर पुलिस की गिरफ्त में आए झारखंड के दिनेश कुमार मेहतो, सुरजन कुमार शाह और करन कुमार से पूछताछ के दौरान गिरोह के संचालन से जुड़ी जानकारी मिली है। पुलिस के अनुसार, आरोपी पहले इंटरनेट पर भीड़भाड़ वाले प्रसिद्ध बाजारों की तलाश करते थे। इसके बाद संबंधित बाजारों में पहुंचकर नाबालिगों से मोबाइल फोन चोरी कराते थे।
पूछताछ में यह भी सामने आया है कि कोरोना काल के लॉकडाउन में मजदूरी बंद होने के बाद गिरोह के सदस्य इस गतिविधि में सक्रिय हुए थे। आरोपियों पर बिहार और झारखंड के 10 से 15 वर्ष की उम्र के नाबालिगों को काम दिलाने के बहाने अपने साथ लाने और उनसे मोबाइल चोरी कराने का आरोप है। पकड़े गए 14 वर्षीय नाबालिग को बिहार के कटिहार से लाया गया था।
गूगल पर तलाशते थे प्रसिद्ध बाजार
गुन्नौर पुलिस की पूछताछ में गिरोह के काम करने का तरीका सामने आया है।
पुलिस के अनुसार, आरोपी गूगल की मदद से प्रसिद्ध बाजारों की जानकारी जुटाते थे। इसके बाद चयनित बाजारों में पहुंचकर नाबालिगों से मोबाइल फोन चोरी कराते थे।
इस तरीके से आरोपी अलग-अलग स्थानों के बाजारों को निशाना बनाते थे।
हालांकि, गिरोह ने अब तक किन-किन बाजारों में चोरी कराई और कुल कितने मोबाइल फोन चोरी हुए, इसकी विस्तृत जानकारी उपलब्ध नहीं है।
पुलिस पूछताछ में सामने आई जानकारी के आधार पर गिरोह के संचालन के तरीके का खुलासा हुआ है।
झारखंड के तीन आरोपी पुलिस की गिरफ्त में
गुन्नौर पुलिस ने झारखंड के रहने वाले तीन आरोपियों को पकड़ा है।
इनकी पहचान दिनेश कुमार मेहतो, सुरजन कुमार शाह और करन कुमार के रूप में हुई है।
तीनों से पूछताछ के दौरान नाबालिगों से मोबाइल चोरी कराने से जुड़ी जानकारी सामने आई।
पुलिस के अनुसार, आरोपी बच्चों को काम दिलाने के बहाने अपने साथ लाते थे और उनसे चोरी कराते थे।
हालांकि, तीनों आरोपियों की अलग-अलग भूमिका और उनके खिलाफ दर्ज धाराओं का पूरा विवरण उपलब्ध नहीं है।
10 से 15 वर्ष के बच्चों को बनाते थे निशाना
पुलिस पूछताछ में सामने आया है कि गिरोह के सदस्य बिहार और झारखंड से 10 से 15 वर्ष की उम्र के नाबालिगों को अपने साथ लाते थे।
इन बच्चों को काम दिलाने का भरोसा दिया जाता था।
इसके बाद आरोपियों द्वारा उनसे बाजारों में मोबाइल फोन चोरी कराने की जानकारी सामने आई है।
नाबालिगों को इस प्रकार की गतिविधियों में शामिल कराना गंभीर मामला है।
इसमें बच्चों की सुरक्षा, उनके अधिकारों और संभावित शोषण से जुड़े सवाल भी सामने आते हैं।
हालांकि, गिरोह के संपर्क में आए कुल नाबालिगों की संख्या अभी स्पष्ट नहीं है।
काम दिलाने के बहाने बच्चों को लाने का आरोप
आरोपियों पर नाबालिगों को रोजगार दिलाने का भरोसा देकर अपने साथ लाने का आरोप है।
पुलिस के अनुसार, गिरोह के सदस्य बिहार और झारखंड के बच्चों को काम दिलाने के बहाने लाते थे।
इसके बाद उन्हें मोबाइल चोरी कराने के लिए इस्तेमाल किया जाता था।
काम दिलाने का आश्वासन देकर किसी बच्चे को दूसरे स्थान पर ले जाना और उससे आपराधिक गतिविधि कराना गंभीर चिंता का विषय है।
ऐसे मामलों में बच्चों की वास्तविक परिस्थितियों और उन्हें अपने साथ लाने के तरीके की जांच महत्वपूर्ण होती है।
हालांकि, आरोपियों ने बच्चों को किस प्रकार का काम दिलाने का वादा किया था, इसकी जानकारी उपलब्ध नहीं है।
कटिहार से लाया गया था 14 वर्षीय नाबालिग
पुलिस की गिरफ्त में आए गिरोह से जुड़े मामले में एक 14 वर्षीय नाबालिग के बारे में भी जानकारी सामने आई है।
बताया गया है कि इस बच्चे को बिहार के कटिहार से लाया गया था।
पूछताछ में सामने आया कि नाबालिग के पिता पहले आरोपी सुरजन कुमार शाह के चाचा के साथ मजदूरी कर चुके थे।
इस पुराने परिचय का उल्लेख मामले में महत्वपूर्ण तथ्य के रूप में सामने आया है।
हालांकि, नाबालिग को कटिहार से कब लाया गया और उसके परिवार को किस प्रकार की जानकारी दी गई थी, इसका विस्तृत विवरण उपलब्ध नहीं है।
बच्चे की पहचान और उससे जुड़ी निजी जानकारी सार्वजनिक नहीं की जानी चाहिए।
मजदूरी के पुराने परिचय की जानकारी सामने आई
पकड़े गए 14 वर्षीय नाबालिग के पिता और आरोपी सुरजन कुमार शाह के परिवार के बीच पहले से परिचय होने की जानकारी सामने आई है।
नाबालिग के पिता सुरजन के चाचा के साथ मजदूरी कर चुके थे।
यह तथ्य पुलिस पूछताछ में सामने आया है।
हालांकि, इस परिचय के आधार पर नाबालिग को काम दिलाने का भरोसा किसने दिया और उसे किस परिस्थिति में साथ लाया गया, इसकी पूरी जानकारी उपलब्ध नहीं है।
इस संबंध में आगे की जांच से ही परिस्थितियां स्पष्ट हो सकेंगी।
लॉकडाउन के दौरान मजदूरी बंद होने के बाद हुए सक्रिय
पूछताछ में सामने आया है कि कोरोना काल के लॉकडाउन में मजदूरी बंद होने के बाद गिरोह के सदस्य इस गतिविधि में सक्रिय हुए थे।
लॉकडाउन के दौरान विभिन्न क्षेत्रों में कामकाज प्रभावित हुआ था।
पुलिस के अनुसार, मजदूरी बंद होने के बाद आरोपियों ने नाबालिगों के माध्यम से मोबाइल चोरी कराने की गतिविधि शुरू की।
हालांकि, गिरोह ने पहली बार किस स्थान पर चोरी कराई और कब से नियमित रूप से सक्रिय रहा, इसकी निश्चित जानकारी उपलब्ध नहीं है।
इसलिए गिरोह की पूरी गतिविधि की समयसीमा के बारे में अभी कोई अंतिम निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता।
मोबाइल चोरी के लिए बाजारों का चयन
गिरोह के तरीके में बाजारों का चयन महत्वपूर्ण था।
पुलिस पूछताछ के अनुसार, आरोपी गूगल पर प्रसिद्ध बाजारों की तलाश करते थे।
इसके बाद उन बाजारों में पहुंचकर नाबालिगों से मोबाइल चोरी कराते थे।
बाजारों में बड़ी संख्या में लोगों की आवाजाही होती है और ऐसे स्थानों पर मोबाइल फोन चोरी की घटनाएं सामने आती रहती हैं।
हालांकि, इस गिरोह ने किसी विशेष बाजार में कितनी घटनाओं को अंजाम दिया, इसका आंकड़ा उपलब्ध नहीं है।
नाबालिगों के इस्तेमाल से जुड़े गंभीर सवाल
इस मामले में सबसे महत्वपूर्ण पहलू नाबालिगों को चोरी जैसी गतिविधियों में शामिल किए जाने का है।
पुलिस के अनुसार, आरोपियों ने 10 से 15 वर्ष की उम्र के बच्चों को काम दिलाने के बहाने अपने साथ लाकर मोबाइल चोरी कराई।
ऐसी परिस्थितियों में बच्चों की सुरक्षा और उनके पुनर्वास से जुड़े पहलुओं पर भी ध्यान देना आवश्यक होता है।
कानून में नाबालिगों के मामलों के लिए विशेष प्रावधान हैं।
बच्चों से संबंधित मामलों में उनकी पहचान की गोपनीयता और बाल संरक्षण की प्रक्रिया का पालन महत्वपूर्ण है।
हालांकि, पकड़े गए 14 वर्षीय नाबालिग के संबंध में बाल कल्याण से जुड़ी किसी विशेष कार्रवाई का विवरण उपलब्ध नहीं है।
पूछताछ में सामने आया गिरोह का तरीका
गुन्नौर पुलिस की गिरफ्त में आए दिनेश कुमार मेहतो, सुरजन कुमार शाह और करन कुमार से पूछताछ के बाद गिरोह की गतिविधियों की जानकारी सामने आई है।
आरोपियों पर बिहार और झारखंड के नाबालिगों को काम दिलाने के बहाने लाकर मोबाइल चोरी कराने का आरोप है।
पुलिस के अनुसार, गिरोह गूगल पर प्रसिद्ध बाजारों की तलाश करता था और वहां बच्चों से मोबाइल चोरी कराता था।
कोरोना काल के लॉकडाउन में मजदूरी बंद होने के बाद गिरोह के सक्रिय होने की जानकारी भी सामने आई है।
इस मामले में बिहार के कटिहार से लाए गए 14 वर्षीय नाबालिग का भी पता चला है।
फिलहाल गिरोह की गतिविधियों, अन्य संभावित घटनाओं और बच्चों से जुड़े तथ्यों की पूरी स्थिति पुलिस की आगे की जांच से स्पष्ट होगी।





