उत्तर प्रदेश

आयुष्‍मान कार्ड बनाने में गड़बड़ि‍यां सामने आई यह वहज

Admin4
6 July 2022 2:21 PM IST
आयुष्‍मान कार्ड बनाने में गड़बड़ि‍यां सामने आई यह वहज
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यूपी के कुछ जिलों में आयुष्‍मान कार्ड बनाने में गड़बड़ि‍यां सामने आई हैं। बताया जा रहा है कि मिलते-जुलते नाम वालों ने अपने आयुष्‍मान कार्ड बनवा लिए जिनकी वजह से असली जरूरतमंद परेशान हो रहे हैं। मिलते-जुलते नाम वालों ने बनवा लिए अपने आयुष्मान कार्ड, असली जरूरतमंद क्‍या करें अब?

यूपी के जालौन के अशोक कुमार सूरत में नौकरी करते हैं। कोरोना के बाद गांव वापस लौटे। आयुष्मान कार्ड के लिए आवेदन किया तो पता चला कि उनके नाम का कार्ड तो पहले ही बन चुका है। चंदौली के एक निजी अस्पताल में ऑपरेशन के क्लेम की जांच में जब मुख्यालय से संबंधित सर्जन को फोन किया गया तो उन्होंने कहा कि हम तो आज तक उस अस्पताल में गए ही नहीं। आयुष्मान योजना में ऐसे फर्जीवाड़े आए दिन सामने आ रहे हैं।
इन गड़बड़ियों के चलते प्रदेश में अब तक 1.62 लाख से अधिक आयुष्मान कार्ड निरस्त किए जा चुके हैं। केंद्र सरकार ने गरीब तबके को मुफ्त इलाज की सुविधा मुहैया कराने के लिए आयुष्मान भारत योजना शुरू की थी। इसके तहत पांच लाख तक की मुफ्त इलाज की सुविधा सरकारी और निजी अस्पतालों में दी जा रही है। मगर इस पैसे को हड़पने के लिए लोग फर्जी तरीके से आयुष्मान कार्ड बनवा रहे हैं। कई ऐसे मामले सामने आ चुके हैं, जिसमें इलाज के लिए व्यक्ति अस्पताल में भर्ती हुआ और खुद को योजना के लिए पात्र बताया। उसका कार्ड भी बना दिया गया मगर जांच में उसकी कलई खुल गई।
नाम में एक अक्षर बदला तो अपात्र हुए 1205 लोग
नाम में अंतर और स्पेलिंग में गलती के कारण कितनी परेशानी होती है, इसका उदाहरण इन दिनों कई आयुष्मान कार्ड धारकों की शिकायतों से पता चल रहा है। इस योजना में प्रदेशभर में 1205 से अधिक पात्र महज इसलिए हमेशा के लिए अपात्र की श्रेणी में आ गए हैं, क्योंकि आयुष्मान कार्ड और आधार कार्ड में उनके नाम की स्पेलिंग अलग है। पूरा परिवार आयुष्मान योजना का पात्र है, लेकिन जिनके नाम में स्पेलिंग गलत है, उन्हें अपात्र मान लिया गया है।
केंद्र और राज्य सरकार ने बढ़ाया सर्विलांस
योजना में फर्जीवाड़ा बढ़ने के बाद केंद्र और राज्य सरकार ने सर्विलांस बढ़ा दिया है। अब शिकायतों के अलावा तमाम दूसरे केसों की रैंडम जांच की जा रही है। नाम, पते में बदलाव जैसी चीजों को केंद्र का सॉफ्टवेयर रिजेक्ट कर देता है। वहीं राज्य मुख्यालय में कंट्रोल रूम के जरिए भी क्लेम करने वालों से फोन करके पूरी जानकारी ली जा रही है। जिला, प्रदेश और केंद्र को मिलाकर तीन स्तर पर जांच की जा रही है।
प्रदेशभर में फर्जी तरीकों से आयुष्मान कार्ड बनवाने के मामले सामने आए हैं। जांच में इनकी गड़बड़ी पकड़ी गई। अभी तक प्रदेश में 1.62 लाख से अधिक कार्ड निरस्त किए गए हैं।



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