उत्तर प्रदेश

पांच रुपये की लागत में बनाते थे 20 का सिक्का, असली जैसी चमक ने पुलिस को भी चौंकाया

Kavita2
14 Sept 2026 5:14 PM IST
पांच रुपये की लागत में बनाते थे 20 का सिक्का, असली जैसी चमक ने पुलिस को भी चौंकाया
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सहारनपुर: नकली सिक्के बनाने वाले कथित अंतरराज्यीय गिरोह ने अपने अवैध कारोबार में लागत से लेकर बिक्री और कमीशन तक का पूरा हिसाब तैयार कर रखा था। पुलिस की पूछताछ में सामने आया है कि छोटे मूल्यवर्ग के सिक्कों को तैयार करने में लागत अधिक और मुनाफा कम होने के कारण गिरोह ने अपना ध्यान 20 रुपये के सिक्कों पर केंद्रित कर दिया था। करीब पांच से छह रुपये में तैयार होने वाले नकली सिक्के को एजेंटों को 12 से 15 रुपये में दिया जाता था।

गिरोह के कथित सरगना उपकार लूथरा उर्फ अभय प्रताप सिंह ने पूछताछ में पुलिस को बताया कि दो और पांच रुपये के नकली सिक्के बनाने में भी लगभग पांच रुपये तक का खर्च आ जाता था। मशीन, धातु, डाई, बिजली, घिसाई और फिनिशिंग पर आने वाला खर्च जोड़ने के बाद छोटे सिक्कों में खास मुनाफा नहीं बचता था। इसके विपरीत लगभग उतनी ही लागत में 20 रुपये का सिक्का तैयार करने पर कई गुना अधिक लाभ मिल जाता था।

पुलिस के अनुसार, इसी आर्थिक गणित के कारण गिरोह ने धीरे-धीरे छोटे मूल्यवर्ग के सिक्के बनाने कम कर दिए और 20 रुपये के नकली सिक्कों का उत्पादन बढ़ा दिया। आरोपितों ने बाजार में इन्हें खपाने के लिए अलग-अलग राज्यों में एजेंटों और संपर्कों का नेटवर्क भी बना रखा था।

पांच आरोपी गिरफ्तार, 6400 सिक्के बरामद

शहर कोतवाली, एसओजी और सर्विलांस टीम ने संयुक्त अभियान चलाकर गिरोह के पांच आरोपितों को गिरफ्तार किया है। इनकी पहचान उपकार लूथरा उर्फ अभय प्रताप सिंह, हिमांशु उर्फ गुल्लू, कुलदीप, संतोष चौरसिया उर्फ जनार्दन और अनुराग पाल उर्फ लंकेश के रूप में हुई है।

पुलिस का दावा है कि आरोपितों के कब्जे से 20 रुपये मूल्यवर्ग के 6,400 कथित नकली सिक्के बरामद हुए हैं। इनका अंकित मूल्य एक लाख 28 हजार रुपये है। इसके अतिरिक्त लगभग पांच लाख रुपये मूल्य के अधबने सिक्के, सिक्के तैयार करने वाली छह मशीनें, पांच लोहे की डाई, बिना मुहर वाली 39 डाई और मुहर लगी 20 डाई बरामद की गईं।

सिक्कों को अंतिम रूप देने के लिए इस्तेमाल की जाने वाली डाई पॉलिश मशीन, दो घिसाई पत्थर, पांच हथौड़े, लोहे को काटने वाली आरी और इलेक्ट्रॉनिक तौल मशीन भी मिलने का दावा किया गया है। आरोपितों से आठ मोबाइल फोन, सात हिसाब-किताब के रजिस्टर, चेकबुक और दो कारें भी बरामद की गई हैं।

असली जैसी बनावट ने किया हैरान

बरामद सिक्कों की बनावट देखकर पुलिस अधिकारी भी शुरुआत में हैरान रह गए। कथित नकली सिक्कों पर असली सिक्कों की तरह अशोक स्तंभ, ‘सत्यमेव जयते’, रुपये का प्रतीक और निर्धारित मूल्य अंकित था। आकार, चमक और बाहरी डिजाइन भी पहली नजर में असली जैसे दिखाई दे रहे थे।

पुलिस के मुताबिक, आरोपितों के पास सिक्के की ढलाई से लेकर घिसाई, पॉलिश और डिजाइन अंकित करने तक के उपकरण उपलब्ध थे। उपकार लूथरा पहले सुनार का काम करता था और उसे चांदी के सिक्के तैयार करने का अनुभव था। पुलिस का आरोप है कि उसने इसी तकनीकी जानकारी का इस्तेमाल नकली सिक्के बनाने में किया।

इसके बावजूद असली और नकली सिक्कों के वजन, धातु की संरचना, किनारों की बनावट, डिजाइन की बारीकी तथा ढलाई की गुणवत्ता में अंतर हो सकता है। इन सभी बिंदुओं की वैज्ञानिक पुष्टि विशेषज्ञ और फॉरेंसिक जांच से होगी। आम नागरिक के लिए केवल चमक या आवाज के आधार पर सिक्के को नकली घोषित करना उचित नहीं है।

ठेकों और टोल प्लाजा को बनाया निशाना

पुलिस की प्रारंभिक जांच के अनुसार, गिरोह नकली सिक्कों को शराब की दुकानों, किराना बाजारों और टोल प्लाजा के माध्यम से प्रचलन में लाता था। इन स्थानों पर प्रतिदिन बड़ी संख्या में नकद लेनदेन होता है और सिक्कों को बारीकी से जांचने के लिए कम समय मिलता है। इसी का फायदा उठाकर कथित रूप से सिक्के सामान्य मुद्रा में मिला दिए जाते थे।

गिरोह से जुड़े एजेंटों को कमीशन देकर अलग-अलग क्षेत्रों में नकली सिक्के चलाने के लिए भेजा जाता था। पुलिस के मुताबिक मशीनों की मदद से प्रतिदिन 10 से 12 हजार सिक्के तैयार करने की क्षमता होने का दावा किया गया है। आरोपित हर व्यक्ति को अलग जिम्मेदारी देते थे, जिससे एक सदस्य के पकड़े जाने पर पूरे नेटवर्क की पहचान न हो सके।

सोनीपत में चल रही थी इकाई

पुलिस का दावा है कि नकली सिक्के बनाने की इकाई पहले हरियाणा के सोनीपत क्षेत्र में संचालित की जा रही थी। गिरोह अब मशीनों को सहारनपुर लाकर नई इकाई स्थापित करने की तैयारी में था। रविवार को मशीनों और उपकरणों को स्थानांतरित करते समय आरोपितों को पकड़ा गया।

पुलिस ने गिरोह द्वारा अब तक करीब 70 करोड़ रुपये मूल्य के नकली सिक्के बाजार में खपाने का अनुमान जताया है। इसका अर्थ करीब साढ़े तीन करोड़ 20 रुपये के सिक्के होता है। हालांकि, पुलिस अधिकारी ने स्पष्ट किया है कि 70 करोड़ रुपये का आंकड़ा फिलहाल अनुमानित है। बरामद रजिस्टर, मोबाइल फोन, बैंक खातों और आपूर्ति शृंखला की जांच के बाद ही वास्तविक मात्रा सामने आएगी। इसलिए इस आंकड़े को अंतिम और प्रमाणित तथ्य नहीं माना जाना चाहिए।

उपकार लूथरा को इससे पहले भी वर्ष 2017 में दिल्ली पुलिस ने कथित नकली सिक्का कारोबार के मामले में गिरफ्तार किया था। पुलिस अब यह पता लगा रही है कि मशीनें कहां से खरीदी गईं, धातु की आपूर्ति किसने की और तैयार सिक्के किन राज्यों में किन एजेंटों को भेजे गए।

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