उत्तर प्रदेश

शिक्षा में राजनीति नहीं होनी चाहिए बोले CM योगी

Kavita2
5 Sept 2026 6:07 PM IST
शिक्षा में राजनीति नहीं होनी चाहिए बोले CM योगी
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लखनऊ। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शिक्षा व्यवस्था को राजनीति से दूर रखने की जरूरत पर जोर देते हुए कहा कि शिक्षा को राजनीतिक नजरिए से नहीं देखा जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि जो लोग हर विषय को राजनीति के चश्मे से देखते हैं, उन्हें वर्ष 2017 के बाद प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था में आया व्यापक बदलाव दिखाई नहीं देगा। मुख्यमंत्री ने शिक्षकों से शिक्षा में उत्कृष्टता और नवाचार को लेकर स्वस्थ प्रतिस्पर्धा को आगे बढ़ाने का आह्वान किया।

मुख्यमंत्री शनिवार को शिक्षक दिवस के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में बेसिक और माध्यमिक शिक्षा के उत्कृष्ट शिक्षकों को राज्य अध्यापक पुरस्कार और मुख्यमंत्री अध्यापक पुरस्कार प्रदान करने के बाद संबोधित कर रहे थे। उन्होंने सम्मानित शिक्षकों को बधाई देते हुए कहा कि शिक्षक केवल विद्यार्थियों को पाठ्यक्रम की शिक्षा नहीं देते बल्कि उनके व्यक्तित्व और भविष्य के निर्माण में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि शिक्षकों के बीच स्वस्थ प्रतिस्पर्धा से विद्यालयों में शिक्षा की गुणवत्ता बेहतर होगी और नए प्रयोगों को बढ़ावा मिलेगा। शिक्षा के क्षेत्र में होने वाले सकारात्मक प्रयासों का लाभ आखिरकार विद्यार्थियों और समाज को मिलता है।

शिक्षा को राजनीति के चश्मे से न देखें

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपने संबोधन में कहा कि शिक्षा जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्र में राजनीति नहीं होनी चाहिए। शिक्षा व्यवस्था में सुधार और उसके परिणामों का मूल्यांकन विद्यार्थियों के हित और शैक्षणिक गुणवत्ता के आधार पर होना चाहिए।

उन्होंने कहा कि वर्ष 2017 के बाद प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था में आमूलचूल परिवर्तन आया है। सरकार ने विद्यालयों की बुनियादी सुविधाओं से लेकर शैक्षणिक गुणवत्ता तक विभिन्न स्तरों पर काम किया है।

मुख्यमंत्री के अनुसार यदि इन बदलावों को राजनीतिक नजरिए से देखा जाएगा तो वास्तविक उपलब्धियां और जमीनी स्तर पर हुए सुधार दिखाई नहीं देंगे। शिक्षा व्यवस्था में सकारात्मक परिवर्तन के लिए सरकार, शिक्षक, अभिभावक और समाज सभी की भागीदारी जरूरी है।

शिक्षकों से स्वस्थ प्रतिस्पर्धा का आह्वान

सीएम योगी ने प्रदेशभर के शिक्षकों से उत्कृष्टता और नवाचार को लेकर स्वस्थ प्रतिस्पर्धा विकसित करने को कहा। उन्होंने कहा कि कोई विद्यालय यदि शिक्षा के क्षेत्र में अच्छा प्रयोग करता है तो दूसरे विद्यालयों को भी उससे प्रेरणा लेकर बेहतर करने का प्रयास करना चाहिए।

उन्होंने कहा कि यही स्वस्थ प्रतिस्पर्धा भविष्य में प्रदेश और देश को आगे ले जाएगी। जब शिक्षक नई तकनीक, नए तरीकों और विद्यार्थियों की जरूरतों के अनुरूप पढ़ाने की पद्धति अपनाते हैं तो शिक्षा अधिक प्रभावी होती है।

विद्यालयों के बीच भी बेहतर शैक्षणिक परिणाम, स्वच्छता, अनुशासन, तकनीक के उपयोग और विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास को लेकर सकारात्मक प्रतिस्पर्धा होनी चाहिए।

उत्कृष्ट शिक्षकों को मिला सम्मान

शिक्षक दिवस के अवसर पर आयोजित समारोह में बेसिक और माध्यमिक शिक्षा के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य करने वाले शिक्षकों को सम्मानित किया गया। मुख्यमंत्री ने राज्य अध्यापक पुरस्कार और मुख्यमंत्री अध्यापक पुरस्कार प्रदान कर शिक्षकों के योगदान की सराहना की।

पुरस्कार प्राप्त करने वाले शिक्षकों ने अपने विद्यालयों और विद्यार्थियों के लिए विभिन्न स्तरों पर उल्लेखनीय कार्य किए हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि ऐसे शिक्षकों का सम्मान दूसरे शिक्षकों के लिए भी प्रेरणा का माध्यम बनता है।

उन्होंने शिक्षकों से कहा कि सम्मान मिलने के बाद उनकी जिम्मेदारी और बढ़ जाती है। उनके प्रयोग और अनुभव दूसरे विद्यालयों तथा शिक्षकों तक भी पहुंचने चाहिए, ताकि इसका लाभ अधिक से अधिक विद्यार्थियों को मिल सके।

2017 के बाद बदलाव का किया जिक्र

मुख्यमंत्री ने प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था में 2017 के बाद हुए बदलावों का उल्लेख करते हुए कहा कि विद्यालयों को बेहतर बनाने की दिशा में लगातार प्रयास किए गए हैं। स्कूलों में बुनियादी सुविधाओं को बेहतर करने के साथ पढ़ाई की गुणवत्ता सुधारने पर भी जोर दिया गया।

सरकारी विद्यालयों की छवि बदलने और उन्हें विद्यार्थियों के लिए बेहतर शैक्षणिक वातावरण उपलब्ध कराने की दिशा में विभिन्न कार्यक्रम चलाए गए हैं। विद्यालयों में भवन, कक्षाओं, पेयजल, शौचालय और दूसरी बुनियादी सुविधाओं को मजबूत करने के साथ डिजिटल माध्यमों का उपयोग भी बढ़ाया गया है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि इन प्रयासों का उद्देश्य बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराना और सरकारी विद्यालयों को समाज के विश्वास का केंद्र बनाना है।

नवाचार पर दिया जोर

योगी आदित्यनाथ ने शिक्षकों से बदलते समय के अनुरूप शिक्षण पद्धतियों में नवाचार करने की अपील की। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में शिक्षा केवल किताबों और कक्षाओं तक सीमित नहीं रह गई है।

तकनीक के विस्तार के साथ विद्यार्थियों के पास जानकारी हासिल करने के अनेक माध्यम मौजूद हैं। ऐसे में शिक्षक की भूमिका भी बदल रही है। अब शिक्षक को विद्यार्थियों का मार्गदर्शक बनकर उनकी प्रतिभा और क्षमता को पहचानना होगा।

शिक्षा में नवाचार का मतलब केवल डिजिटल उपकरणों का इस्तेमाल नहीं बल्कि बच्चों को विषय समझाने के लिए नए और प्रभावी तरीके विकसित करना भी है।

शिक्षक तैयार करते हैं भविष्य की पीढ़ी

मुख्यमंत्री ने शिक्षक की भूमिका को राष्ट्र निर्माण से जोड़ते हुए कहा कि आने वाली पीढ़ी कैसी होगी, इसमें शिक्षकों का महत्वपूर्ण योगदान होता है। एक अच्छा शिक्षक विद्यार्थी में ज्ञान के साथ अनुशासन, आत्मविश्वास, जिम्मेदारी और सकारात्मक सोच विकसित करता है।

विद्यालय में मिले संस्कार और शिक्षा लंबे समय तक व्यक्ति के जीवन को प्रभावित करते हैं। इसी कारण शिक्षकों की जिम्मेदारी केवल परीक्षा में अच्छे अंक दिलाने तक सीमित नहीं हो सकती।

विद्यार्थियों की रुचि और क्षमता पहचानकर उन्हें सही दिशा देना भी शिक्षक की जिम्मेदारी है। इससे बच्चे भविष्य में अपनी प्रतिभा का बेहतर इस्तेमाल कर सकते हैं।

अच्छे प्रयोगों को दूसरे स्कूल भी अपनाएं

मुख्यमंत्री ने संकेत दिया कि प्रदेश के अलग-अलग विद्यालयों में किए जा रहे सफल प्रयोगों को दूसरे स्कूलों तक पहुंचाने की जरूरत है। किसी शिक्षक की अभिनव शिक्षण पद्धति से यदि विद्यार्थियों के परिणाम बेहतर होते हैं तो उसका मॉडल दूसरे शिक्षकों के लिए भी उपयोगी हो सकता है।

इसी तरह किसी विद्यालय ने उपस्थिति बढ़ाने, पढ़ाई में कमजोर विद्यार्थियों को आगे लाने या तकनीक का बेहतर इस्तेमाल करने में सफलता हासिल की है तो उस अनुभव को साझा किया जाना चाहिए।

इस तरह एक विद्यालय की सफलता पूरे शिक्षा तंत्र में सकारात्मक बदलाव का माध्यम बन सकती है।

शिक्षा की गुणवत्ता सबसे बड़ी प्राथमिकता

मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि सरकार का उद्देश्य केवल स्कूलों में संसाधन उपलब्ध कराना नहीं बल्कि शिक्षा की गुणवत्ता को लगातार बेहतर करना भी है। इसके लिए शिक्षकों को अपनी जिम्मेदारी के साथ नवाचार और उत्कृष्टता की दिशा में काम करना होगा।

उन्होंने पुरस्कार प्राप्त शिक्षकों को शुभकामनाएं देते हुए उम्मीद जताई कि वे अपने काम से दूसरे शिक्षकों को भी प्रेरित करेंगे। शिक्षक दिवस पर उनका संदेश रहा कि शिक्षा को राजनीतिक विवाद का विषय बनाने के बजाय बच्चों के बेहतर भविष्य और राष्ट्र निर्माण का माध्यम बनाया जाना चाहिए।

मुख्यमंत्री के मुताबिक शिक्षकों के बीच उत्कृष्टता की स्वस्थ प्रतिस्पर्धा, नए प्रयोग और विद्यार्थियों के प्रति समर्पण ही प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था को नई ऊंचाइयों तक ले जा सकते हैं।

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