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यूपी विधान परिषद चुनाव में बढ़ी सरगर्मी, 11 सीटों के लिए 137 प्रत्याशी मैदान में

लखनऊ। उत्तर प्रदेश विधान परिषद की 11 सीटों पर होने वाले चुनाव को लेकर राजनीतिक सरगर्मी तेज हो गई है। खंड स्नातक और खंड शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों की इन सीटों के लिए सोमवार तक कुल 137 प्रत्याशियों ने नामांकन पत्र दाखिल कर दिए हैं। मंगलवार, 6 अक्टूबर को नामांकन दाखिल करने की अंतिम तारीख है। ऐसे में आखिरी दिन उम्मीदवारों की संख्या और बढ़ने की संभावना है। निर्वाचन प्रक्रिया पूरी होने के बाद इन सीटों के लिए 23 अक्टूबर को मतदान होगा, जबकि 27 अक्टूबर को मतगणना कर परिणाम घोषित किए जाएंगे।
उत्तर प्रदेश के मुख्य निर्वाचन अधिकारी कार्यालय की ओर से जारी आंकड़ों के मुताबिक सबसे ज्यादा नामांकन वाराणसी खंड स्नातक निर्वाचन क्षेत्र में हुए हैं। यहां सोमवार तक 23 उम्मीदवारों ने अपने पर्चे दाखिल किए। इसके बाद गोरखपुर-फैजाबाद खंड शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र का नंबर है, जहां 16 प्रत्याशी मैदान में उतर चुके हैं। इन दोनों सीटों पर बड़ी संख्या में उम्मीदवारों के नामांकन से मुकाबला दिलचस्प होता दिखाई दे रहा है।
बरेली-मुरादाबाद खंड शिक्षक सीट से अब तक 14 उम्मीदवारों ने नामांकन किया है। वहीं लखनऊ खंड स्नातक और आगरा खंड स्नातक निर्वाचन क्षेत्रों में 13-13 उम्मीदवारों ने पर्चे दाखिल किए हैं। आगरा खंड शिक्षक और वाराणसी खंड शिक्षक सीटों पर 12-12 उम्मीदवार नामांकन कर चुके हैं। लखनऊ खंड शिक्षक सीट से 10 उम्मीदवार मैदान में हैं, जबकि मेरठ खंड स्नातक और मेरठ खंड शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों से अब तक 7-7 प्रत्याशियों ने नामांकन दाखिल किया है।
लखनऊ की दोनों विधान परिषद सीटों पर सोमवार को नामांकन को लेकर खासा उत्साह दिखाई दिया। लखनऊ खंड स्नातक और लखनऊ खंड शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों के लिए भाजपा, समाजवादी पार्टी और बहुजन समाज पार्टी समेत कुल 19 प्रत्याशियों ने सोमवार को नामांकन पत्र जमा किए। मंडलायुक्त कार्यालय में रिटर्निंग ऑफिसर के समक्ष प्रत्याशियों ने अपने नामांकन दाखिल किए।
लखनऊ खंड शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र के लिए सोमवार को सात उम्मीदवारों ने नामांकन किया, जबकि स्नातक खंड के लिए 12 प्रत्याशियों ने पर्चे दाखिल किए। शिक्षक सीट से भाजपा उम्मीदवार उमेश द्विवेदी और समाजवादी पार्टी के सुशील कुमार ने नामांकन किया। वहीं लखनऊ स्नातक सीट के लिए भाजपा के अवनीश कुमार सिंह, सपा की कांति सिंह और बसपा के चंद्र भान मौर्य समेत अन्य उम्मीदवार चुनावी मैदान में उतर चुके हैं।
निर्दलीय उम्मीदवार भी विधान परिषद चुनाव में बड़ी संख्या में किस्मत आजमा रहे हैं। लखनऊ में कई निर्दलीय उम्मीदवारों ने नामांकन दाखिल किया है, जबकि कुछ अन्य ने चुनाव लड़ने के लिए नामांकन पत्र प्राप्त किए हैं। इससे साफ है कि मुकाबला केवल प्रमुख राजनीतिक दलों के बीच सीमित नहीं रहने वाला है। विभिन्न शिक्षक संगठनों, स्नातक समूहों और स्वतंत्र उम्मीदवारों की मौजूदगी से कई सीटों पर बहुकोणीय मुकाबले की स्थिति बन सकती है।
इस चुनाव में भाजपा ने सभी 11 सीटों के लिए उम्मीदवार घोषित किए हैं। पार्टी ने सितंबर के अंत में अपनी शेष छह सीटों के प्रत्याशियों का भी ऐलान कर दिया था। इनमें कुछ मौजूदा विधान परिषद सदस्यों को दोबारा मौका दिया गया है।
समाजवादी पार्टी भी कई सीटों पर अपने उम्मीदवार उतार चुकी है। इस दौरान टिकट वितरण को लेकर कुछ राजनीतिक उठापटक भी सामने आई। गोरखपुर-फैजाबाद क्षेत्र में भाजपा से टिकट नहीं मिलने के बाद संजयन त्रिपाठी ने पार्टी छोड़ी और बाद में समाजवादी पार्टी में शामिल हुए। सपा ने उन्हें अपना प्रत्याशी भी घोषित कर दिया।
आगरा स्नातक निर्वाचन क्षेत्र में आजाद समाज पार्टी ने भी उम्मीदवार उतारकर इस चुनाव में अपनी मौजूदगी दर्ज कराई है। पार्टी ने दक्ष यादव को प्रत्याशी बनाया है। नामांकन के दौरान पार्टी प्रमुख चंद्रशेखर आजाद भी मौजूद रहे।
वाराणसी में भी मुकाबला रोचक हो गया है। यहां कुछ सीटों पर कांग्रेस और समाजवादी पार्टी दोनों के उम्मीदवार मैदान में हैं। इससे विपक्षी दलों के बीच स्थानीय स्तर पर अलग-अलग चुनावी रणनीतियां दिखाई दे रही हैं।
विधान परिषद की ये 11 सीटें पांच स्नातक और छह शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों से जुड़ी हैं। इन सीटों पर सामान्य विधानसभा चुनाव की तरह सभी मतदाता वोट नहीं करते। संबंधित स्नातक और शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों में पंजीकृत पात्र मतदाता ही अपने प्रतिनिधि का चुनाव करते हैं। इसलिए उम्मीदवारों का फोकस शिक्षक संगठनों, शैक्षणिक संस्थानों और स्नातक मतदाताओं के बीच संपर्क बढ़ाने पर है।
नामांकन प्रक्रिया पूरी होने के बाद प्रत्याशियों के नामांकन पत्रों की जांच होगी। इसके बाद नाम वापसी की प्रक्रिया पूरी की जाएगी और अंतिम उम्मीदवारों की तस्वीर साफ होगी। फिलहाल 137 प्रत्याशियों के नामांकन के साथ ही चुनावी मुकाबला व्यापक दिखाई दे रहा है। मंगलवार को आखिरी दिन बड़ी संख्या में नामांकन होने की स्थिति में यह आंकड़ा और बढ़ सकता है।
23 अक्टूबर को होने वाली वोटिंग से पहले सभी प्रमुख दल और उम्मीदवार अपने-अपने निर्वाचन क्षेत्रों में प्रचार तेज करेंगे। शिक्षक और स्नातक वर्ग से जुड़े स्थानीय मुद्दे, रोजगार, शिक्षा व्यवस्था, शिक्षकों की सेवा शर्तें और उच्च शिक्षा से जुड़ी समस्याएं चुनावी प्रचार में प्रमुख मुद्दे बन सकती हैं। 27 अक्टूबर को मतगणना के साथ यह स्पष्ट होगा कि विधान परिषद की इन 11 सीटों पर मतदाताओं ने किसे अपना प्रतिनिधि चुना है।





