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बैराजों से पानी छोड़े जाने के बाद घाघरा नदी का जलस्तर बढ़ा

उत्तर प्रदेश : बैराजों से लगातार पानी छोड़े जाने के बाद घाघरा नदी का जलस्तर तेजी से बढ़ने लगा है। घाघराघाट स्थित एल्गिन ब्रिज पर नदी अब खतरे के निशान के बेहद करीब पहुंच गई है। जल संसाधन विभाग के अनुसार नदी का जलस्तर खतरे के निशान से मात्र छह सेंटीमीटर नीचे दर्ज किया गया है। पिछले 16 घंटे के दौरान जलस्तर में तीन सेंटीमीटर की वृद्धि हुई है, जिससे तटीय क्षेत्रों में रहने वाले लोगों की चिंता बढ़ गई है। हालांकि जिला प्रशासन ने फिलहाल बाढ़ की स्थिति से इनकार करते हुए कहा है कि हालात पूरी तरह नियंत्रण में हैं और लगातार निगरानी की जा रही है।
अधिकारियों के अनुसार ऊपरी क्षेत्रों के बैराजों से पानी छोड़े जाने के कारण नदी के जलस्तर में धीरे-धीरे वृद्धि हो रही है। जलस्तर में लगातार बढ़ोतरी को देखते हुए सिंचाई विभाग और प्रशासन की टीमें स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं। जल मापन केंद्रों से नियमित रूप से आंकड़े एकत्र किए जा रहे हैं ताकि समय रहते आवश्यक कदम उठाए जा सकें।
घाघराघाट स्थित एल्गिन ब्रिज पर जलस्तर खतरे के निशान से केवल छह सेंटीमीटर नीचे पहुंचने के बाद आसपास के गांवों में सतर्कता बढ़ा दी गई है। प्रशासन ने तटबंधों की निगरानी तेज कर दी है और संबंधित अधिकारियों को संवेदनशील क्षेत्रों का लगातार निरीक्षण करने के निर्देश दिए हैं। इसके साथ ही बाढ़ चौकियों को भी सक्रिय कर दिया गया है, ताकि किसी भी आपात स्थिति से तुरंत निपटा जा सके।
हालांकि प्रशासन का कहना है कि वर्तमान में बाढ़ जैसी स्थिति नहीं है, लेकिन नदी के बढ़ते जलस्तर को देखते हुए किसी भी संभावना को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। अधिकारियों ने बताया कि यदि ऊपरी इलाकों से और अधिक पानी छोड़ा जाता है या क्षेत्र में भारी वर्षा होती है तो जलस्तर में और बढ़ोतरी हो सकती है। ऐसे में हालात पर लगातार नजर रखी जा रही है।
तटवर्ती गांवों के लोगों में नदी के बढ़ते जलस्तर को लेकर चिंता का माहौल है। ग्रामीणों का कहना है कि हर वर्ष बरसात के मौसम में घाघरा नदी का जलस्तर बढ़ने से बाढ़ का खतरा बना रहता है। नदी के खतरे के निशान के करीब पहुंचने से किसानों और स्थानीय निवासियों की चिंता बढ़ गई है। विशेष रूप से नदी किनारे बसे गांवों के लोग प्रशासन की गतिविधियों पर नजर बनाए हुए हैं।
किसानों का कहना है कि यदि नदी का जलस्तर और बढ़ा तो निचले इलाकों में खड़ी फसलें प्रभावित हो सकती हैं। धान, मक्का और अन्य खरीफ फसलों की खेती करने वाले किसानों को आशंका है कि बाढ़ आने की स्थिति में उन्हें भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है। इसलिए वे प्रशासन से समय रहते आवश्यक कदम उठाने की मांग कर रहे हैं।
प्रशासन ने बताया कि राहत और बचाव से संबंधित सभी विभागों को अलर्ट मोड पर रखा गया है। नावों, राहत सामग्री और आपदा प्रबंधन टीमों को भी तैयार रहने के निर्देश दिए गए हैं। साथ ही तटबंधों की स्थिति की लगातार निगरानी की जा रही है ताकि कहीं भी रिसाव या कटान जैसी समस्या उत्पन्न होने पर तत्काल कार्रवाई की जा सके।
सिंचाई विभाग के अधिकारियों का कहना है कि नदी के जलस्तर में वृद्धि सामान्य प्रक्रिया का हिस्सा है, क्योंकि मानसून के दौरान बैराजों से पानी छोड़ा जाता है। इसके बावजूद विभाग पूरी सतर्कता बरत रहा है और जलस्तर में होने वाले हर बदलाव का रिकॉर्ड रखा जा रहा है। यदि जलस्तर खतरे के निशान को पार करता है तो उसके अनुरूप आवश्यक कदम उठाए जाएंगे।
जिला प्रशासन ने तटीय क्षेत्रों के लोगों से अफवाहों पर ध्यान न देने और केवल प्रशासन द्वारा जारी आधिकारिक सूचनाओं पर भरोसा करने की अपील की है। अधिकारियों ने कहा कि फिलहाल घबराने की आवश्यकता नहीं है, लेकिन एहतियात के तौर पर संवेदनशील क्षेत्रों पर विशेष निगरानी रखी जा रही है। साथ ही ग्राम प्रधानों और स्थानीय प्रशासन को लोगों को सतर्क रखने तथा किसी भी आपात स्थिति की तत्काल सूचना देने के निर्देश दिए गए हैं।
फिलहाल घाघरा नदी का जलस्तर लगातार बढ़ रहा है और प्रशासन पूरी स्थिति पर नजर बनाए हुए है। आने वाले दिनों में ऊपरी क्षेत्रों से छोड़े जाने वाले पानी और मौसम की स्थिति के आधार पर नदी के जलस्तर में बदलाव संभव है। ऐसे में तटवर्ती इलाकों के लोगों को सतर्क रहने और प्रशासन के दिशा-निर्देशों का पालन करने की सलाह दी गई है।





