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दो साल पहले जिसका किया अंतिम संस्कार वही बेटी जिंदा लौटी

लखनऊ। राजधानी लखनऊ के बख्शी का तालाब क्षेत्र से एक हैरान करने वाला मामला सामने आया है। जिस 28 वर्षीय शिवानी को करीब दो साल पहले मृत मानकर उसके परिवार ने अंतिम संस्कार कर दिया था, वही शिवानी 5 सितंबर को अचानक अपने घर नवीकोट नंदना पहुंच गई। बेटी को जिंदा सामने देखकर परिवार के लोग हैरान रह गए। शिवानी के वापस आने के बाद अब दो साल पहले आईआईएम रोड के पीछे नाले में मिले शव की पहचान को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। सबसे बड़ा सवाल यह है कि जिस शव को शिवानी का मानकर भैसाकुंड में अंतिम संस्कार किया गया था, वह आखिर किसका था?
मामला सामने आने के बाद दो साल पुरानी घटना एक बार फिर चर्चा में आ गई है। शिवानी के परिवार के लिए भी यह घटनाक्रम किसी चौंकाने वाली घटना से कम नहीं है। जिस बेटी को परिवार ने हमेशा के लिए खो चुका मान लिया था और जिसका अंतिम संस्कार तक कर दिया था, वह अचानक घर के दरवाजे पर जिंदा खड़ी मिली। परिवार में एक ओर बेटी के लौटने की खुशी है तो दूसरी ओर उस अज्ञात शव को लेकर कई सवाल उठ रहे हैं, जिसका अंतिम संस्कार शिवानी समझकर किया गया था।
जानकारी के मुताबिक शिवानी बख्शी का तालाब क्षेत्र के नवीकोट नंदना की रहने वाली है। करीब दो साल पहले एक शव आईआईएम रोड के पीछे स्थित नाले में मिला था। उस समय शव की पहचान शिवानी के रूप में की गई थी। परिवार ने भी उसे शिवानी का शव मान लिया और इसके बाद भैसाकुंड में अंतिम संस्कार कर दिया गया। अंतिम संस्कार के बाद परिवार यही मानता रहा कि शिवानी अब इस दुनिया में नहीं है।
लेकिन 5 सितंबर को पूरी कहानी अचानक बदल गई। शिवानी अपने घर पहुंच गई। उसे जिंदा देखकर परिजनों को पहले तो विश्वास ही नहीं हुआ। जिस सदस्य के लिए परिवार शोक मना चुका था और अंतिम संस्कार की सभी प्रक्रियाएं पूरी कर चुका था, उसका इस तरह वापस लौटना परिवार के लिए बेहद अप्रत्याशित था।
शिवानी के लौटने के साथ ही पुरानी जांच और शव की पहचान की प्रक्रिया सवालों के घेरे में आ गई है। अब यह पता लगाना जरूरी हो गया है कि दो साल पहले नाले से बरामद शव किस महिला का था। यदि वह शव शिवानी का नहीं था तो उसकी वास्तविक पहचान क्या थी और उस समय किन आधारों पर उसे शिवानी का शव माना गया था? यह भी महत्वपूर्ण सवाल है कि शव की पहचान सुनिश्चित करने के लिए उस समय कौन-कौन सी प्रक्रिया अपनाई गई थी।
मामले में शव की शिनाख्त की प्रक्रिया भी अहम हो गई है। सामान्य तौर पर किसी अज्ञात या संदिग्ध शव की पहचान के लिए उपलब्ध परिस्थितियों, कपड़ों, शरीर पर मौजूद पहचान के निशानों और परिजनों से पुष्टि जैसे विभिन्न पहलुओं को देखा जाता है। आवश्यकता पड़ने पर वैज्ञानिक तरीकों का भी सहारा लिया जा सकता है। ऐसे में इस मामले में उस समय अपनाई गई प्रक्रिया की समीक्षा से ही स्पष्ट हो सकेगा कि पहचान में चूक कहां और कैसे हुई।
शिवानी के जिंदा लौटने के बाद अब उस अज्ञात महिला के परिवार का सवाल भी सामने है, जिसके शव का अंतिम संस्कार शिवानी समझकर कर दिया गया। यदि शव किसी अन्य महिला का था तो संभव है कि उसके परिजन आज भी उसकी तलाश कर रहे हों या उन्हें उसके बारे में कोई जानकारी न मिली हो। ऐसे में पुराने रिकॉर्ड और उस समय दर्ज किए गए विवरण की दोबारा जांच महत्वपूर्ण हो सकती है।
इस पूरे घटनाक्रम में परिवार की स्थिति भी बेहद भावुक करने वाली है। करीब दो वर्षों तक परिवार अपनी बेटी को मृत मानकर जीता रहा। उसके अंतिम संस्कार के बाद परिवार ने शायद उसके वापस आने की उम्मीद भी छोड़ दी थी। लेकिन अब अचानक शिवानी के लौट आने से परिवार की जिंदगी में बड़ा बदलाव आया है। हालांकि इस खुशी के साथ यह सवाल लगातार बना हुआ है कि आखिर उस समय अंतिम संस्कार किसका किया गया था।
अब इस मामले की पूरी सच्चाई सामने आने के लिए शिवानी के पिछले दो वर्षों के बारे में जानकारी भी अहम होगी। वह इतने समय तक कहां थी, किन परिस्थितियों में परिवार से दूर रही और अचानक घर कैसे पहुंची, इन सवालों के जवाब से घटनाक्रम की कई कड़ियां जुड़ सकती हैं। साथ ही दो साल पहले शव मिलने से लेकर उसकी पहचान और अंतिम संस्कार तक की पूरी प्रक्रिया को समझना भी जरूरी होगा।
मामला इसलिए भी गंभीर है क्योंकि यह केवल एक परिवार की पहचान संबंधी गलती तक सीमित नहीं है। इसके साथ एक अज्ञात महिला की पहचान का सवाल भी जुड़ा हुआ है। यदि पुराने शव की पहचान गलत हुई थी तो उसकी वास्तविक पहचान स्थापित करना जरूरी होगा।
शिवानी के घर लौटने से जहां परिवार को अपनी बेटी वापस मिल गई है, वहीं दो साल पुराना रहस्य फिर सामने आ गया है। अब सभी की निगाह इस सवाल पर टिकी है कि आईआईएम रोड के पीछे नाले में मिला वह शव आखिर किसका था और किन परिस्थितियों में उसकी पहचान शिवानी के रूप में कर दी गई थी। इस सवाल का जवाब मिलने के बाद ही इस पूरे मामले की वास्तविक तस्वीर साफ हो सकेगी।





