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Saharanpur's की लकड़ी नक्काशी का जलवा, परंपरा और तकनीक का संगम

Saharanpur सहारनपुर : विश्व प्रसिद्ध सहारनपुर की लकड़ी की नक्काशी (काष्ठकला) अब पारंपरिक हुनर और आधुनिक तकनीक के मेल से नई ऊंचाइयों की ओर बढ़ रही है। सदियों पुराने इस हस्तशिल्प उद्योग में अब लेजर और सीएनसी मशीनों जैसी आधुनिक तकनीकों का इस्तेमाल शुरू हो गया है, जिससे उत्पादन क्षमता बढ़ने के साथ-साथ गुणवत्ता में भी सुधार आ रहा है।
हाल ही में सहारनपुर दौरे पर पहुंचे मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी यहां के कारीगरों और काष्ठकला उद्योग की सराहना की थी। उन्होंने कहा था कि सहारनपुर से करीब 600 करोड़ रुपये का निर्यात होना इस उद्योग की बड़ी उपलब्धि है। मुख्यमंत्री ने कारीगरों के सम्मान और इस पारंपरिक व्यवसाय को आगे बढ़ाने के लिए सरकार की ओर से हरसंभव सहयोग देने की बात कही थी।
सहारनपुर के अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रसिद्ध काष्ठकला कारीगर मोहम्मद असलम सैफी का कहना है कि बदलते समय के साथ इस उद्योग को कई चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने बताया कि पहले की तुलना में लकड़ी के हस्तशिल्प उद्योग की स्थिति में बदलाव आया है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में प्रतिस्पर्धा बढ़ी है और कुछ देशों द्वारा निर्यात संबंधी नियमों में बदलाव के कारण कारोबारियों को परेशानियों का सामना करना पड़ा है।असलम सैफी ने बताया कि अब इस उद्योग में आधुनिक तकनीक के इस्तेमाल से नई संभावनाएं पैदा हुई हैं। बड़े उद्योगपतियों की रुचि के कारण लकड़ी के उत्पादों के निर्माण में लेजर और सीएनसी मशीनों का उपयोग बढ़ा है। इन मशीनों की मदद से कम समय में बेहतर गुणवत्ता वाले उत्पाद तैयार किए जा रहे हैं।
उन्होंने बताया कि लेजर मशीन से लकड़ी पर बेहद बारीक और आकर्षक नक्काशी की जाती है, जबकि सीएनसी मशीन से लकड़ी की कटिंग बिल्कुल सटीक तरीके से होती है। इससे उत्पादों की एकरूपता बनी रहती है और निर्माण लागत भी कम होती है। साथ ही नक्काशी खराब होने की संभावना भी काफी कम हो जाती है।सहारनपुर की काष्ठकला के उत्पादों की मांग देश ही नहीं, बल्कि विदेशों में भी है। यहां से तैयार किए गए फर्नीचर, लाइट लैंप, होटल में इस्तेमाल होने वाली सजावटी सामग्री, आभूषण बॉक्स, साइन बोर्ड, जालीदार पर्दे, टेबल-कुर्सियां और अन्य कलात्मक वस्तुएं अमेरिका, फ्रांस और यूरोप के कई देशों में निर्यात की जाती हैं।
कारीगर असलम सैफी विदेशी ग्राहकों की पसंद और डिजाइन के अनुसार उत्पाद तैयार करते हैं। उनका कहना है कि पारंपरिक कारीगरी और आधुनिक तकनीक का संतुलन सहारनपुर को वैश्विक बाजार में और मजबूत पहचान दिला सकता है।उन्होंने कहा कि चीन इस क्षेत्र में लंबे समय से मजबूत स्थिति में है, लेकिन सहारनपुर के कारीगरों के पास अपनी पारंपरिक कला की विशेष पहचान है। अगर आधुनिक मशीनों और तकनीक का सही इस्तेमाल किया जाए तो सहारनपुर की काष्ठकला अंतरराष्ट्रीय बाजार में चीन और अन्य देशों को कड़ी टक्कर दे सकती है।
हाल ही में सहारनपुर के जिलाधिकारी अरविंद चौहान ने भी काष्ठकला कारीगर मोहम्मद असलम सैफी से मुलाकात कर उनकी कला की सराहना की थी। उन्होंने कारीगर द्वारा तैयार किए गए उत्कृष्ट उत्पादों को देखने की इच्छा भी जताई।सहारनपुर की लकड़ी की नक्काशी आज परंपरा और तकनीक के संगम का उदाहरण बन रही है। सरकार के सहयोग और आधुनिक तकनीक के विस्तार से उम्मीद है कि यह उद्योग आने वाले वर्षों में वैश्विक स्तर पर और अधिक पहचान बनाएगा।





