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3.97 करोड़ की पानी की टंकी नदी में समाई कटान बना वजह
बरेली: उत्तर प्रदेश के बरेली में शेरगढ़ विकासखंड के बैरमनगर गांव में जल जीवन मिशन के तहत बन रहा निर्माणाधीन ओवरहेड टैंक किच्छा नदी के तेज कटान की चपेट में आकर गिर गया। घटना के बाद निर्माण की गुणवत्ता और स्थान चयन को लेकर सवाल उठे थे। अब जल निगम (ग्रामीण) की जांच रिपोर्ट में दावा किया गया है कि टैंक के निर्माण में सामग्री या गुणवत्ता से जुड़ी कोई कमी नहीं मिली है। हादसे की मुख्य वजह नदी में अचानक आई बाढ़ और बेहद तेज कटान को माना गया है। जांच रिपोर्ट के मुताबिक ओवरहेड टैंक का निर्माण शुरू होने के समय किच्छा नदी का किनारा निर्माण स्थल से करीब 500 फीट दूर था। यह स्थान फ्लड प्लेन जोन के बाहर था। निर्माण शुरू करने से पहले मिट्टी की जांच कराई गई थी और टैंक का निर्माण स्वीकृत ड्राइंग डिजाइन और निर्धारित मानकों के अनुसार किया जा रहा था।
अचानक बदली किच्छा नदी की धारा
अधिकारियों के मुताबिक सितंबर के पहले सप्ताह में पहाड़ी क्षेत्रों में हुई भारी बारिश के कारण किच्छा नदी का जलस्तर तेजी से बढ़ गया। जल निगम का कहना है कि सात सितंबर को भारी बारिश के साथ गौला बैराज से 67 हजार क्यूसेक से अधिक पानी छोड़े जाने के बाद नदी में अचानक तेज बाढ़ की स्थिति बनी। तेज जलप्रवाह के कारण नदी की धारा में बदलाव आया और महज तीन से चार दिनों में कटान तेजी से टैंक परिसर की तरफ बढ़ गया। नदी का पानी निर्माणाधीन टैंक के बिल्कुल करीब पहुंच गया और उसकी नींव के आसपास की मिट्टी कटने लगी।
सैंड बैग और पिचिंग भी नहीं रोक सके कटान
टैंक को बचाने के लिए निर्माण स्थल पर सैंड बैग लगाने और पिचिंग जैसे उपाय किए गए थे। इसके बावजूद नदी के तेज और गहरे बहाव के कारण कटान को रोका नहीं जा सका। लगातार मिट्टी बहने के कारण करीब तीन मीटर गहरी नींव के आसपास का धरातलीय सहारा कमजोर हो गया। इसके बाद टैंक एक तरफ झुकने लगा और आठ सितंबर को निर्माणाधीन ढांचा किच्छा नदी में समा गया।
325 किलोलीटर क्षमता का था टैंक
बैरमनगर पेयजल योजना के तहत 325 किलोलीटर क्षमता और 16 मीटर स्टेजिंग वाले ओवरहेड टैंक का निर्माण किया जा रहा था। हादसे के समय टैंक का करीब 30 प्रतिशत निर्माण पूरा हो चुका था। योजना के तहत ट्यूबवेल पंप हाउस और 129 मीटर बाउंड्रीवॉल का निर्माण पूरा हो चुका था। प्रस्तावित 14.69 किलोमीटर पाइपलाइन में से 13.72 किलोमीटर बिछाई जा चुकी है। 1552 घरों के लक्ष्य में 1223 पेयजल कनेक्शन दिए जा चुके हैं। पूरी योजना की प्रगति 61.35 प्रतिशत बताई गई है।
ग्रामीणों ने स्थान चयन पर उठाए सवाल
जल निगम ने भले ही निर्माण गुणवत्ता में कमी से इनकार किया है लेकिन स्थानीय ग्रामीणों ने टैंक के लिए चुने गए स्थान पर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि किच्छा नदी लंबे समय से इलाके में कटान करती रही है इसलिए निर्माण से पहले संभावित खतरे का बेहतर आकलन होना चाहिए था। नदी के कटान से टैंक के अलावा बड़ी मात्रा में कृषि भूमि और पेड़ों को भी नुकसान पहुंचा है। ग्रामीणों ने कटान रोकने के लिए स्थायी सुरक्षा उपाय करने और पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच कराने की मांग की है।
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