उत्तर प्रदेश

रूस से 18 दिन बाद कानपुर पहुंचा चीफ मर्चेंट नेवी अफसर सागर गुप्ता का पार्थिव शरीर

Kavita2
6 Aug 2026 9:26 AM IST
रूस से 18 दिन बाद कानपुर पहुंचा चीफ मर्चेंट नेवी अफसर सागर गुप्ता का पार्थिव शरीर
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कानपुर। रूस-यूक्रेन युद्ध के बीच एक कार्गो शिप पर हुए यूक्रेनी ड्रोन हमले में जान गंवाने वाले उत्तर प्रदेश के कानपुर निवासी चीफ मर्चेंट नेवी अफसर सागर गुप्ता का पार्थिव शरीर घटना के 18 दिन बाद गुरुवार को उनके पैतृक घर पहुंचा। तिरंगे में लिपटा ताबूत जैसे ही घर के बाहर पहुंचा, पूरा इलाका गमगीन हो उठा। परिवार के सदस्यों का विलाप सुनकर वहां मौजूद हर व्यक्ति की आंखें नम हो गईं।

सबसे मार्मिक दृश्य तब देखने को मिला जब सागर गुप्ता की पत्नी शालू ताबूत से लिपटकर फूट-फूटकर रोने लगीं। उन्होंने अपने पति को बार-बार पुकारा, लेकिन ताबूत में बंद सागर अब कभी जवाब देने वाले नहीं थे। शालू की हालत इतनी खराब हो गई कि परिजनों को उन्हें संभालना पड़ा। वहां मौजूद लोगों के लिए यह दृश्य बेहद भावुक कर देने वाला था।

मां की पुकार ने सभी को रुलाया

सागर गुप्ता की मां घटना की जानकारी मिलने के बाद से ही गहरे सदमे में थीं। बेटे के पार्थिव शरीर के घर पहुंचते ही उनकी आंखों से आंसुओं की धारा बह निकली। कांपती आवाज में उन्होंने सिर्फ एक ही बात कही—"मुझे मेरे बेटे की शक्ल दिखा दो।"

एक मां की यह पुकार सुनकर वहां मौजूद लोगों की आंखें भर आईं। परिजन उन्हें लगातार ढांढस बंधाते रहे, लेकिन बेटे को खोने का दर्द उनके चेहरे पर साफ दिखाई दे रहा था।

बड़े भाई की खामोशी ने बयां किया दर्द

सागर गुप्ता के बड़े भाई मनीष, जिन्होंने पिता की तरह उनका पालन-पोषण किया था, पूरी तरह टूट चुके थे। आंखों में आंसू थे, लेकिन शब्द जैसे साथ छोड़ चुके थे। वे लगातार ताबूत के पास खड़े अपने छोटे भाई को निहारते रहे।

परिजनों के अनुसार, दोनों भाइयों के बीच बेहद गहरा लगाव था। सागर की सफलता पर सबसे ज्यादा गर्व मनीष को था, लेकिन आज वही भाई अंतिम विदाई देने के लिए मजबूर खड़ा था।

मासूम बेटी के सवालों ने सबको भावुक किया

घर में सबसे दर्दनाक दृश्य साढ़े चार साल की मासूम बेटी गौरी को देखकर सामने आया। उसे समझ ही नहीं आ रहा था कि आखिर घर में इतना सन्नाटा और रोना-धोना क्यों है।

वह बार-बार अपनी मां और परिजनों से पूछती रही—"पापा कहां हैं? मुझे पापा से बात करा दो... पापा सो क्यों रहे हैं... उठो न पापा।"

मासूम की इन बातों ने वहां मौजूद हर व्यक्ति को भावुक कर दिया। किसी के पास उसके सवालों का जवाब नहीं था। परिवार के लोग उसे चुप कराने की कोशिश करते रहे, लेकिन वह लगातार अपने पिता को पुकारती रही।

रूस-यूक्रेन युद्ध की भेंट चढ़ा एक भारतीय

सागर गुप्ता मर्चेंट नेवी में चीफ अफसर के पद पर कार्यरत थे। वह जिस कार्गो जहाज पर तैनात थे, वह रूस-यूक्रेन युद्ध के दौरान समुद्री मार्ग से गुजर रहा था। इसी दौरान जहाज पर यूक्रेन की ओर से ड्रोन हमला हुआ, जिसमें सागर गुप्ता की मृत्यु हो गई।

घटना के बाद भारतीय दूतावास, विदेश मंत्रालय और संबंधित एजेंसियों की ओर से पार्थिव शरीर को भारत लाने की प्रक्रिया शुरू की गई। आवश्यक औपचारिकताओं के कारण इसमें समय लगा और घटना के 18 दिन बाद उनका शव भारत लाया जा सका।

पूरे मोहल्ले में पसरा मातम

सागर गुप्ता के घर पर सुबह से ही रिश्तेदारों, पड़ोसियों और शुभचिंतकों का तांता लगा रहा। जैसे ही पार्थिव शरीर पहुंचा, पूरे क्षेत्र में शोक की लहर फैल गई। लोगों ने नम आंखों से अपने प्रिय बेटे को अंतिम श्रद्धांजलि दी।

पड़ोसियों ने बताया कि सागर बेहद मिलनसार और सरल स्वभाव के व्यक्ति थे। जब भी छुट्टियों में घर आते थे, सभी से आत्मीयता से मिलते थे। उनकी असमय मृत्यु ने पूरे इलाके को गहरे सदमे में डाल दिया है।

अंतिम दर्शन के लिए उमड़ी भीड़

पार्थिव शरीर के घर पहुंचने के बाद अंतिम दर्शन के लिए बड़ी संख्या में लोग पहुंचे। हर कोई तिरंगे में लिपटे ताबूत के सामने नतमस्तक हुआ और दिवंगत आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना की। परिजनों को सांत्वना देने वालों का सिलसिला लगातार चलता रहा।

स्थानीय लोगों ने कहा कि सागर ने देश का नाम रोशन किया था और कठिन परिस्थितियों में अपने कर्तव्यों का निर्वहन करते हुए उन्होंने प्राण गंवाए। उनकी यह कुर्बानी हमेशा याद रखी जाएगी।

युद्ध की मानवीय त्रासदी का एक और चेहरा

रूस-यूक्रेन युद्ध ने अब तक हजारों लोगों की जान ली है और इसका असर दुनिया के कई देशों के नागरिकों पर भी पड़ा है। सागर गुप्ता की मौत इस बात का एक और उदाहरण है कि युद्ध केवल सीमाओं तक सीमित नहीं रहता, बल्कि दूर-दराज के परिवारों की खुशियां भी छीन लेता है।

कानपुर में सागर गुप्ता के घर का यह दर्दनाक दृश्य इसी मानवीय त्रासदी की कहानी कहता है। एक पत्नी ने अपना जीवनसाथी खो दिया, एक मां ने अपना बेटा, एक भाई ने अपना सहारा और एक मासूम बच्ची ने अपने पिता का साया।

18 दिनों के लंबे इंतजार के बाद जब सागर गुप्ता अपने घर लौटे, तो परिवार ने उनका स्वागत मुस्कुराहट से नहीं, बल्कि आंसुओं और अंतिम विदाई के साथ किया। उनकी यादें अब हमेशा उनके परिजनों और उन्हें जानने वालों के दिलों में जीवित रहेंगी।

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