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15 विदेशी पर्यटकों को लेकर 28 अक्टूबर को काशी पहुंचेगा गंगा विलास क्रूज

वाराणसी। भारत में निर्मित दुनिया के सबसे लंबे रिवर क्रूज के रूप में प्रसिद्ध 'एमवी गंगा विलास' एक बार फिर काशी की ओर बढ़ रहा है। उपलब्ध यात्रा कार्यक्रम के अनुसार, यह लग्जरी क्रूज 28 अक्टूबर 2026 के आसपास वाराणसी पहुंच सकता है। ताजा स्थानीय जानकारी में क्रूज पर 15 विदेशी पर्यटकों के सवार होने की बात कही गई है। बताया जा रहा है कि कोलकाता से रवाना होने के बाद क्रूज मंगलवार, 20 अक्टूबर की शाम पटना पहुंचा, जहां इसे मल्टी मॉडल टर्मिनल के नजदीक मितन घाट पर रोका गया। भारतीय अंतर्देशीय जलमार्ग प्राधिकरण (आईडब्ल्यूएआई) के निदेशक अरविंद कुमार के अनुसार, राष्ट्रीय जलमार्ग संख्या एक पर यात्री और मालवाहक जहाजों का परिचालन बढ़ रहा है। गंगा विलास की यह यात्रा देश में नदी आधारित पर्यटन को बढ़ावा देने की दिशा में महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
28 अक्टूबर को काशी पहुंचने की संभावना
गंगा विलास क्रूज के वाराणसी आगमन को लेकर तैयारियां की जा रही हैं। यह क्रूज गंगा नदी के रास्ते कोलकाता से पटना होते हुए काशी पहुंचेगा।
स्थानीय विवरण के अनुसार, क्रूज 12 अक्टूबर को कोलकाता से रवाना हुआ था। हालांकि, संचालक के प्रकाशित कार्यक्रम में यात्रा की शुरुआत 10 अक्टूबर और समाप्ति 29 अक्टूबर दर्ज है।
अन्य प्रकाशित रिपोर्टों में भी क्रूज के 27 या 28 अक्टूबर तक वाराणसी पहुंचने की संभावना जताई गई है।
क्रूज में सवार विदेशी पर्यटकों को गंगा किनारे स्थित ऐतिहासिक, धार्मिक और सांस्कृतिक स्थलों का भ्रमण कराया जाएगा।
पटना के मितन घाट पर रोका गया क्रूज
ताजा जानकारी के अनुसार, गंगा विलास मंगलवार शाम पटना पहुंचा। इसे मल्टी मॉडल टर्मिनल के नजदीक मितन घाट पर ठहराया गया।
पटना राष्ट्रीय जलमार्ग संख्या एक का महत्वपूर्ण पड़ाव है। यहां से क्रूज आगे वाराणसी की ओर बढ़ेगा।
नदी मार्ग से यात्रा करने वाले पर्यटक विभिन्न शहरों की प्राकृतिक सुंदरता और सांस्कृतिक विरासत का अनुभव कर सकते हैं।
क्रूज का ठहराव स्थानीय पर्यटन गतिविधियों के लिए भी महत्वपूर्ण माना जाता है।
हालांकि, पटना से आगे रवाना होने की निश्चित तारीख की स्वतंत्र आधिकारिक पुष्टि उपलब्ध नहीं है।
15 विदेशी पर्यटकों के सवार होने की जानकारी
इस यात्रा में 15 विदेशी पर्यटकों के सवार होने की जानकारी दी गई है।
हालांकि, 17 अक्टूबर को प्रकाशित एक रिपोर्ट में जर्मनी और यूरोप के अन्य देशों से आए लगभग 20 से 21 पर्यटकों के सवार होने का उल्लेख किया गया था।
ऐसे में यात्रियों की अंतिम संख्या को लेकर संबंधित क्रूज संचालक या आईडब्ल्यूएआई की ताजा पुष्टि आवश्यक है।
इन पर्यटकों को यात्रा के दौरान भारतीय संस्कृति, पारंपरिक जीवनशैली और नदी किनारे बसे शहरों की ऐतिहासिक विरासत को करीब से जानने का अवसर मिलेगा।
जनवरी 2023 में हुई थी ऐतिहासिक शुरुआत
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 13 जनवरी 2023 को वाराणसी से एमवी गंगा विलास क्रूज की पहली यात्रा को हरी झंडी दिखाई थी।
यह यात्रा वाराणसी से शुरू होकर बांग्लादेश के रास्ते असम के डिब्रूगढ़ तक पहुंची थी।
क्रूज ने लगभग 3,200 किलोमीटर की दूरी तय की और 27 नदी प्रणालियों से होकर यात्रा की।
इस ऐतिहासिक यात्रा का समापन 28 फरवरी 2023 को डिब्रूगढ़ में हुआ था।
केंद्र सरकार ने इसे देश के अंतर्देशीय जलमार्ग और क्रूज पर्यटन क्षेत्र की महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया था।
लग्जरी सुविधाओं से लैस है गंगा विलास
एमवी गंगा विलास को आधुनिक सुविधाओं के साथ तैयार किया गया है।
इसमें तीन डेक और 18 शानदार सुइट हैं। क्रूज में कुल 36 पर्यटकों के ठहरने की क्षमता है।
यात्रियों के लिए आरामदायक कमरे, भोजन और अन्य सुविधाएं उपलब्ध कराई जाती हैं।
क्रूज को इस तरह डिजाइन किया गया है कि यात्री लंबी नदी यात्रा के दौरान सुविधाजनक तरीके से अलग-अलग पर्यटन स्थलों का आनंद ले सकें।
केंद्र सरकार के अनुसार, इस क्रूज का निर्माण भारत में किया गया है।
काशी में गंगा आरती और मंदिर दर्शन करेंगे पर्यटक
वाराणसी पहुंचने के बाद विदेशी पर्यटकों के लिए धार्मिक और सांस्कृतिक स्थलों के भ्रमण की योजना है।
इसमें श्रीकाशी विश्वनाथ मंदिर, सारनाथ और गंगा घाटों का भ्रमण शामिल हो सकता है।
पर्यटक दशाश्वमेध घाट की प्रसिद्ध गंगा आरती का भी अनुभव कर सकेंगे।
पूर्व प्रकाशित यात्रा कार्यक्रमों के अनुसार, क्रूज के वाराणसी में दो से तीन दिन ठहरने की संभावना है।
इस दौरान पर्यटकों को काशी की प्राचीन संस्कृति और स्थानीय जीवनशैली से परिचित कराने की योजना है।
राष्ट्रीय जलमार्ग संख्या एक पर बढ़ रही गतिविधियां
भारतीय अंतर्देशीय जलमार्ग प्राधिकरण के निदेशक अरविंद कुमार के अनुसार, राष्ट्रीय जलमार्ग संख्या एक पर यात्री और मालवाहक जहाजों की गतिविधियां बढ़ी हैं।
राष्ट्रीय जलमार्ग संख्या एक हल्दिया से प्रयागराज तक गंगा-भागीरथी-हुगली नदी प्रणाली पर विकसित किया गया है।
यह देश के महत्वपूर्ण अंतर्देशीय जल परिवहन मार्गों में शामिल है।
इस मार्ग का उपयोग यात्री परिवहन के साथ माल ढुलाई के लिए भी किया जाता है।
आईडब्ल्यूएआई के अनुसार, इस जलमार्ग पर कई निजी संचालक क्रूज पर्यटन सेवाएं उपलब्ध करा रहे हैं।
जलस्तर पर निर्भर रहेगा क्रूज का संचालन
गंगा विलास के वाराणसी पहुंचने में नदी का जलस्तर महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
अधिक या कम जलस्तर की स्थिति में क्रूज के संचालन में कठिनाई आ सकती है।
इससे पहले वर्ष 2025 के अंत में कोलकाता से वाराणसी आ रहा क्रूज कम जलस्तर के कारण पटना से ही वापस लौट गया था।
उस समय पर्यटकों को सड़क मार्ग से वाराणसी पहुंचाने की व्यवस्था की गई थी।
अक्टूबर 2026 की प्रस्तावित यात्रा में भी जलस्तर के अनुसार अंतिम कार्यक्रम में बदलाव संभव है।
विदेशी पर्यटकों के बीच लोकप्रिय हो रहा नदी पर्यटन
भारत में नदी आधारित पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए विभिन्न राज्यों में क्रूज सेवाओं का विस्तार किया जा रहा है।
गंगा विलास जैसी यात्राएं विदेशी पर्यटकों को देश की सांस्कृतिक विविधता से परिचित कराने का अवसर देती हैं।
लंबी नदी यात्रा के दौरान पर्यटक अलग-अलग राज्यों के धार्मिक स्थलों, ऐतिहासिक शहरों और प्राकृतिक दृश्यों का अनुभव कर सकते हैं।
इस तरह के पर्यटन से स्थानीय गाइड, परिवहन, होटल और हस्तशिल्प से जुड़े कारोबारों को भी लाभ मिलने की संभावना है।
30 अक्टूबर से वापसी यात्रा प्रस्तावित
क्रूज संचालक की आधिकारिक समय-सारिणी के अनुसार, 10 से 29 अक्टूबर तक कोलकाता से वाराणसी की यात्रा निर्धारित है।
इसके बाद 30 अक्टूबर से 18 नवंबर 2026 तक वाराणसी से कोलकाता की वापसी यात्रा प्रस्तावित है।
इससे यात्रियों को दोनों दिशाओं में गंगा नदी के रास्ते यात्रा करने की सुविधा मिलेगी।
हालांकि, यात्रा की वास्तविक तारीख मौसम और नदी की स्थिति के आधार पर बदल सकती है।
काशी के पर्यटन को मिलेगा बढ़ावा
गंगा विलास क्रूज का वाराणसी आगमन शहर के पर्यटन क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
काशी पहले से ही देश के प्रमुख धार्मिक पर्यटन स्थलों में शामिल है।
अब नदी आधारित लग्जरी पर्यटन के माध्यम से यहां आने वाले विदेशी पर्यटकों को अलग अनुभव उपलब्ध कराया जा रहा है।
गंगा विलास जैसी सेवाएं वाराणसी को अंतरराष्ट्रीय पर्यटन मानचित्र पर और अधिक प्रमुख बनाने में सहायता कर सकती हैं।
फिलहाल क्रूज के 28 अक्टूबर के आसपास काशी पहुंचने की संभावना है। यात्रा पूरी होने के बाद यहां ठहराव और पर्यटकों के भ्रमण कार्यक्रम की स्थिति स्पष्ट होगी।





