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- ढिबरी का दौर खत्म, अब...

अयोध्या: बांस गांव में आखिरकार 79 वर्षों का लंबा इंतजार खत्म होने जा रहा है। स्वतंत्रता के बाद से अब तक बिजली की सुविधा से वंचित रहे इस गांव में अब बिजली के खंभे और तार पहुंचने लगे हैं। वर्षों तक ढिबरी और सोलर पैनल के सहारे जीवन गुजारने वाले ग्रामीणों के घर अब जल्द ही बिजली की रोशनी से जगमगाएंगे। गांव में बिजली पहुंचने की खबर से ग्रामीणों में खुशी की लहर दौड़ गई है।
बांस गांव के लोगों ने आजादी के बाद से कई दशक तक बिजली आने का इंतजार किया। इस दौरान कई सरकारें बदलीं, जनप्रतिनिधि बदले और विकास के कई दावे किए गए, लेकिन गांव में विद्युतीकरण का सपना पूरा नहीं हो सका। ग्रामीणों को रात के समय रोशनी के लिए ढिबरी का सहारा लेना पड़ता था। बच्चों को भी इसी मंद रोशनी में पढ़ाई करनी पड़ती थी।
गांव के लोगों की सबसे बड़ी समस्या मोबाइल चार्ज करने और बिजली से जुड़े छोटे-छोटे कामों को लेकर थी। कई ग्रामीणों को मोबाइल चार्ज कराने के लिए पड़ोसी गांवों तक जाना पड़ता था। कुछ परिवारों ने अपनी जरूरतों को पूरा करने के लिए सोलर पैनल लगवा रखे थे, लेकिन सीमित क्षमता के कारण उससे सभी जरूरतें पूरी नहीं हो पाती थीं।
ग्रामीणों का कहना है कि बिजली नहीं होने के कारण बच्चों की पढ़ाई सबसे ज्यादा प्रभावित होती थी। शाम के बाद घरों में पर्याप्त रोशनी नहीं होती थी, जिससे विद्यार्थियों को परेशानियों का सामना करना पड़ता था। इसके अलावा गर्मी के दिनों में पंखे और अन्य बिजली उपकरणों की सुविधा भी नहीं मिल पाती थी।
गांव के प्रशासक सदल प्रसाद निषाद ने बताया कि बांस गांव में बिजली पहुंचाने के लिए ग्रामीणों ने कई बार जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों से गुहार लगाई थी। ग्रामीणों ने विद्युत मंत्री तक पत्र भेजकर गांव के विद्युतीकरण की मांग की थी, लेकिन लंबे समय तक इस दिशा में कोई ठोस पहल नहीं हो सकी।
सरकार की हर घर बिजली योजना के तहत भी गांव को बिजली सुविधा नहीं मिल पाई थी। इसके बाद स्थानीय विधायक रामचंद्र यादव के प्रयासों से गांव के विद्युतीकरण का काम शुरू हुआ। ग्रामीणों ने इसके लिए विधायक का आभार जताया है और कहा कि वर्षों पुरानी समस्या अब खत्म होने जा रही है।
विद्युत निगम के अधिशासी अभियंता रोहित जैन ने बताया कि गांव में बिजली पहुंचाने का काम तेजी से चल रहा है। पूरे गांव में बिजली के खंभे लगाए जा चुके हैं और तार खींचने का काम जारी है। उन्होंने बताया कि जल्द ही कनेक्शन देने की प्रक्रिया शुरू कर दी जाएगी।
बिजली आने की उम्मीद से ग्रामीणों में खासा उत्साह है। लोगों का कहना है कि बिजली केवल रोशनी का साधन नहीं बल्कि विकास का रास्ता भी खोलती है। इससे बच्चों की पढ़ाई बेहतर होगी, घरों में आधुनिक सुविधाएं बढ़ेंगी और गांव के विकास को नई गति मिलेगी।
बांस गांव की कहानी उन दूरदराज इलाकों की तस्वीर दिखाती है, जहां आज भी मूलभूत सुविधाओं के लिए लोगों को लंबा इंतजार करना पड़ता है। 79 साल बाद बिजली पहुंचना ग्रामीणों के लिए किसी बड़े त्योहार से कम नहीं है। अब गांव के लोग उम्मीद कर रहे हैं कि बिजली के साथ-साथ सड़क, शिक्षा और अन्य सुविधाओं का भी तेजी से विस्तार होगा।





