उत्तर प्रदेश

आतंकियों का पीछा करने वाली नस्ल का डॉग अब बरेली पुलिस में

Ratna Netam
4 Aug 2026 8:16 PM IST
आतंकियों का पीछा करने वाली नस्ल का डॉग अब बरेली पुलिस में
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उत्तर प्रदेश : बरेली पुलिस डॉग स्क्वाड को दो नए प्रशिक्षित खोजी श्वानों की सौगात मिली है, जिससे पुलिस की जांच और अपराध नियंत्रण क्षमता पहले से अधिक मजबूत हो गई है। इनमें सबसे अधिक चर्चा बेल्जियन शेफर्ड (मेलिनोइस) नस्ल के श्वान **‘बेन’** की हो रही है। यह वही नस्ल है, जिसका उपयोग दुनिया के सबसे चर्चित आतंकवाद विरोधी अभियानों में किया जा चुका है। अमेरिकी सुरक्षा एजेंसियों ने इसी नस्ल के श्वानों की मदद से अल-कायदा सरगना ओसामा बिन लादेन और आईएसआईएस प्रमुख अबू बक्र अल-बगदादी जैसे कुख्यात आतंकियों तक पहुंच बनाई थी। अब इसी नस्ल का प्रशिक्षित श्वान बरेली पुलिस के डॉग स्क्वाड का हिस्सा बन गया है।
‘बेन’ के साथ **लैब्राडोर रिट्रीवर नस्ल** की मादा श्वान **‘चिक्की’** को भी पुलिस स्क्वाड में शामिल किया गया है। पहले से मौजूद प्रशिक्षित श्वान ‘लाना’ के साथ अब बरेली पुलिस के पास कुल तीन अत्याधुनिक प्रशिक्षण प्राप्त खोजी श्वान हैं। अधिकारियों का मानना है कि इनकी मदद से अपराधों की जांच, लापता लोगों की तलाश और संवेदनशील मामलों में साक्ष्य जुटाने की प्रक्रिया और अधिक प्रभावी होगी।
बेल्जियन शेफर्ड (मेलिनोइस) नस्ल को दुनिया की सबसे बुद्धिमान, फुर्तीली और उच्च प्रशिक्षित डॉग ब्रीड्स में गिना जाता है। इसकी सूंघने की क्षमता बेहद तेज होती है और यह कई किलोमीटर तक लगातार किसी व्यक्ति की गंध का पीछा कर सकता है। यही कारण है कि अमेरिका, ब्रिटेन, फ्रांस और कई अन्य देशों की सैन्य एवं सुरक्षा एजेंसियां आतंकवाद विरोधी अभियानों में इस नस्ल का व्यापक उपयोग करती हैं।
वर्ष 2011 में पाकिस्तान के एबटाबाद में अल-कायदा सरगना ओसामा बिन लादेन के खिलाफ अमेरिकी नेवी सील्स द्वारा चलाए गए **ऑपरेशन नेपच्यून स्पीयर** में इसी नस्ल का श्वान **‘काइरो’** शामिल था। इसी प्रकार वर्ष 2019 में सीरिया में आईएसआईएस प्रमुख अबू बक्र अल-बगदादी के खिलाफ **ऑपरेशन कायला म्यूलर** के दौरान बेल्जियन मेलिनोइस नस्ल के श्वान **‘कोनान’** ने सुरंगों में उसका पीछा किया था। बगदादी ने घिरने के बाद खुद को विस्फोट से उड़ा लिया था, जबकि घायल होने के बावजूद ‘कोनान’ ने उसे भागने का अवसर नहीं दिया। बाद में इस बहादुर श्वान को व्हाइट हाउस में सम्मानित भी किया गया था।
बरेली पुलिस के नए सदस्य ‘बेन’ और ‘चिक्की’ की उम्र लगभग डेढ़ वर्ष है। दोनों को मध्य प्रदेश के ग्वालियर स्थित **बीएसएफ टेकनपुर ट्रेनिंग सेंटर** में नौ महीने का विशेष प्रशिक्षण दिया गया है। प्रशिक्षण के दौरान इन्हें मानव गंध पहचानना, अपराध स्थल से सुराग तलाशना, संदिग्ध व्यक्तियों का पीछा करना, लापता लोगों की खोज करना और विभिन्न परिस्थितियों में काम करने जैसी तकनीकों में दक्ष बनाया गया।
पुलिस अधिकारियों के अनुसार ‘बेन’ लगभग 10 किलोमीटर तक लगातार ट्रैकिंग करने में सक्षम है। आने वाले समय में उसे विस्फोटक पदार्थों और हथियारों की पहचान के लिए भी विशेष प्रशिक्षण दिया जाएगा, जिससे वह बम निरोधक और सुरक्षा अभियानों में भी उपयोगी साबित हो सके।
डॉग स्क्वाड में शामिल होने के कुछ ही समय बाद ‘बेन’ ने अपनी कार्यकुशलता का प्रदर्शन भी कर दिया। आंवला क्षेत्र के मोहल्ला खेड़ा निवासी नंदराम प्रजापति का छह वर्षीय दिव्यांग पुत्र **प्रीत** 28 जुलाई को तेज बारिश के दौरान आठ फीट गहरे नाले में गिरकर लापता हो गया था। नगरपालिका की कई टीमें और एसडीआरएफ लगभग 47 घंटे तक बच्चे की तलाश करती रहीं, लेकिन सफलता नहीं मिली।
इसके बाद डॉग स्क्वाड को मौके पर बुलाया गया। टीम प्रभारी बृजेश यादव ‘बेन’ को लेकर घटनास्थल पहुंचे। मानव गंध के आधार पर ‘बेन’ ने मात्र 15 मिनट के भीतर जलकुंभी में फंसे बच्चे के शव का सटीक स्थान खोज निकाला। इस सफलता ने पुलिस अधिकारियों को भी प्रभावित किया और ‘बेन’ की कार्यक्षमता की सराहना की गई।
वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक अनुराग आर्य ने बताया कि नए प्रशिक्षित श्वान अपराधियों की तलाश, घटनास्थल से अहम सुराग जुटाने, लापता व्यक्तियों की खोज और गंभीर अपराधों की जांच में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। भविष्य में इनका उपयोग हत्या, अपहरण, डकैती और अन्य संगीन मामलों की जांच के साथ-साथ विशेष सुरक्षा अभियानों में भी किया जाएगा।
बरेली पुलिस का मानना है कि आधुनिक तकनीक और प्रशिक्षित डॉग स्क्वाड का संयोजन अपराध जांच को अधिक वैज्ञानिक और प्रभावी बनाएगा। ‘बेन’ और ‘चिक्की’ जैसे प्रशिक्षित खोजी श्वानों के शामिल होने से पुलिस की ट्रैकिंग क्षमता मजबूत होगी और जटिल मामलों के खुलासे में तेजी आएगी। इससे न केवल अपराधियों तक पहुंचना आसान होगा, बल्कि लापता लोगों की तलाश और आपदा जैसी परिस्थितियों में राहत एवं बचाव कार्यों को भी नई मजबूती मिलेगी।
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