उत्तर प्रदेश

फरार कैदी और पेड़ की डाल का कनेक्शन जांच पूरी होने तक सुरक्षित रहेगा पेड़

Ratna Netam
24 Aug 2026 5:38 PM IST
फरार कैदी और पेड़ की डाल का कनेक्शन जांच पूरी होने तक सुरक्षित रहेगा पेड़
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गोरखपुर। उत्तर प्रदेश के गोरखपुर जिला कारागार में लगा एक पेड़ इन दिनों चर्चा का विषय बना हुआ है। जिस पेड़ की डाल को जेल की सुरक्षा के लिए खतरा मानते हुए काटने की तैयारी की जा रही थी, अब उसी पेड़ और उसकी डाल की सुरक्षा की जा रही है। जेल प्रशासन ने इस पेड़ को जांच पूरी होने तक सुरक्षित रखने का फैसला लिया है। इसके लिए दो बंदी रक्षकों की ड्यूटी भी लगाई गई है, जो 24 घंटे इसकी निगरानी कर रहे हैं।
दरअसल, पूरा मामला जेल से एक बंदी के फरार होने के बाद सामने आया। दुष्कर्म मामले में बंदी विपिन के जेल से भागने के बाद प्रशासन ने फरारी के संभावित रास्तों की जांच शुरू की। जांच के दौरान जेल की बाहरी दीवार के पास मौजूद एक पेड़ और उसकी एक मजबूत डाल पर अधिकारियों की नजर गई। आशंका जताई गई कि बंदी ने इसी पेड़ का सहारा लेकर जेल की ऊंची दीवार पार की होगी।
जांच में सामने आया कि पेड़ की डाल जेल की दीवार के काफी करीब थी। ऐसे में संभावना बनी कि बंदी पहले पेड़ पर चढ़ा होगा और फिर डाल के सहारे दीवार तक पहुंचकर दूसरी तरफ छलांग लगाई होगी। इसी आधार पर जेल प्रशासन ने सुरक्षा की दृष्टि से इस डाल को काटने का फैसला लिया था। लेकिन बाद में अधिकारियों को लगा कि यह डाल पूरे मामले की जांच में एक अहम सबूत साबित हो सकती है। इसलिए इसे काटने पर रोक लगा दी गई।
जांच पूरी होने तक सुरक्षित रहेगी डाल
जेल प्रशासन का मानना है कि अगर पेड़ की डाल काट दी जाती है तो फरारी की घटना से जुड़ा एक महत्वपूर्ण सुराग खत्म हो सकता है। इसलिए अब इस पेड़ को सुरक्षित रखा जा रहा है। जांच टीम यह पता लगाने में जुटी है कि क्या वास्तव में बंदी इसी रास्ते से फरार हुआ था या फिर उसने भागने के लिए किसी दूसरे तरीके का इस्तेमाल किया था।
अधिकारियों की टीम पेड़ की ऊंचाई, डाल की लंबाई, दीवार से उसकी दूरी और दीवार की ऊंचाई समेत कई तकनीकी पहलुओं की जांच कर रही है। इसके अलावा यह भी देखा जा रहा है कि एक व्यक्ति के लिए पेड़ पर चढ़ना और वहां से दीवार तक पहुंचना कितना आसान या मुश्किल था।
31 जुलाई को फरार हुआ था बंदी
गोरखपुर जिला जेल से दुष्कर्म मामले में बंद बंदी विपिन के फरार होने के बाद जेल की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल उठे थे। घटना के बाद जेल प्रशासन ने पूरे परिसर की सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा शुरू की। अधिकारियों ने यह जानने की कोशिश की कि आखिर इतनी सुरक्षा के बावजूद बंदी किस तरह जेल से बाहर निकलने में सफल रहा।
जांच के दौरान जेल परिसर के आसपास मौजूद हर संभावित रास्ते की पड़ताल की गई। इसी क्रम में यह पेड़ सबसे अहम बिंदु बनकर सामने आया। हालांकि जेल अधिकारी अभी यह मानकर नहीं चल रहे हैं कि फरारी केवल इसी रास्ते से हुई है। उनका कहना है कि जांच पूरी होने के बाद ही वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो पाएगी।
पेड़ बना जांच का अहम हिस्सा
आमतौर पर किसी पेड़ को सुरक्षा के लिहाज से हटाने का फैसला लिया जाता है, लेकिन इस मामले में वही पेड़ जांच का हिस्सा बन गया है। अब जेल प्रशासन इसे नुकसान पहुंचाने के बजाय इसकी निगरानी कर रहा है। अधिकारियों का मानना है कि घटनास्थल से जुड़े सभी सबूतों को सुरक्षित रखना जरूरी है ताकि जांच निष्पक्ष तरीके से पूरी हो सके।
जेल प्रशासन की इस कार्रवाई से यह भी साफ है कि किसी भी घटना के बाद केवल सुरक्षा व्यवस्था में बदलाव ही नहीं, बल्कि उससे जुड़े छोटे-छोटे साक्ष्यों को भी सुरक्षित रखना जरूरी होता है। यही कारण है कि जिस पेड़ को कभी खतरा माना जा रहा था, वही अब जांच की सबसे महत्वपूर्ण कड़ी बन गया है।
फिलहाल पेड़ की डाल सुरक्षित है और उस पर सुरक्षा कर्मियों की नजर बनी हुई है। जांच टीम की रिपोर्ट आने के बाद ही यह तय होगा कि बंदी वास्तव में इसी रास्ते से फरार हुआ था या नहीं। तब तक जेल प्रशासन इस पेड़ को एक संभावित सबूत के तौर पर सुरक्षित रखेगा।
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