उत्तर प्रदेश

रूसी मिसाइल हमले में मारे अभिषेक निषाद का शव 34 दिन बाद भारत पहुंचा

Kavita2
23 Aug 2026 12:38 PM IST
रूसी मिसाइल हमले में मारे अभिषेक निषाद का शव 34 दिन बाद भारत पहुंचा
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देवरिया। यूक्रेन के ओडेसा तट के निकट रूसी मिसाइल हमले में मारे गए देवरिया के अभिषेक निषाद और कर्नाटक के अखिल जोयन का शव 34 दिन बाद रविवार को भारत लाया गया। लंबे इंतजार के बाद अभिषेक का शव दिल्ली के इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पहुंचा। शव के दिल्ली पहुंचते ही परिजनों और रिश्तेदारों की आंखें नम हो गईं। करीब आठ बजे रिश्तेदार पार्थिव शरीर को लेकर उनके पैतृक गांव करमेल के लिए रवाना हो गए।

अभिषेक निषाद की मौत की खबर सामने आने के बाद से ही परिवार के लोग उनके शव के भारत लौटने का इंतजार कर रहे थे। 34 दिनों तक चले इस इंतजार ने परिवार की बेचैनी को और बढ़ा दिया था। हर दिन परिजन यही उम्मीद लगाए बैठे थे कि जल्द ही अभिषेक का पार्थिव शरीर स्वदेश लाया जाएगा और उन्हें अंतिम विदाई दी जा सकेगी। रविवार को शव दिल्ली पहुंचने की जानकारी मिलने के बाद परिवार और गांव के लोगों ने राहत की सांस तो ली, लेकिन अपनों को खोने का दर्द और गहरा हो गया।

बताया गया कि यूक्रेन से शव को मोल्दोवा के रास्ते भारत लाया गया। आवश्यक प्रक्रिया पूरी होने के बाद दोनों शवों को भारत भेजा गया। अभिषेक का शव दिल्ली एयरपोर्ट पहुंचने के बाद रिश्तेदार उसे लेकर देवरिया के लिए रवाना हुए। पार्थिव शरीर के पैतृक गांव पहुंचने के बाद अंतिम संस्कार की प्रक्रिया पूरी की जाएगी। शव के गांव पहुंचने की खबर से ग्रामीणों में शोक की लहर दौड़ गई।

अभिषेक निषाद की मौत यूक्रेन के ओडेसा तट के निकट हुए रूसी मिसाइल हमले में हुई थी। युद्ध प्रभावित क्षेत्र में हुए इस हमले ने उनके परिवार को गहरा सदमा दिया। अभिषेक के साथ कर्नाटक के अखिल जोयन की भी मौत हुई थी। दोनों के शवों को स्वदेश लाने की प्रक्रिया में समय लगा। 34 दिन बाद शव भारत पहुंचने से परिवार को अपने प्रियजन के अंतिम दर्शन और अंतिम संस्कार का अवसर मिल सका।

रविवार सुबह दिल्ली एयरपोर्ट से अभिषेक का पार्थिव शरीर पैतृक गांव करमेल के लिए रवाना हुआ। रिश्तेदार शव को लेकर सड़क मार्ग से देवरिया के लिए निकले। गांव में भी लोग अभिषेक के पार्थिव शरीर के पहुंचने का इंतजार कर रहे हैं। ग्रामीणों के मुताबिक, लंबे समय से परिवार जिस कठिन दौर से गुजर रहा था, उसमें शव के भारत आने से कम से कम अंतिम संस्कार की प्रक्रिया पूरी हो सकेगी।

अभिषेक की मौत की सूचना मिलने के बाद से ही परिवार में मातम पसरा हुआ है। परिजन लगातार उनके शव को स्वदेश लाने की मांग और प्रयास में जुटे थे। युद्ध प्रभावित यूक्रेन से शव को भारत लाने की प्रक्रिया आसान नहीं थी। विभिन्न औपचारिकताओं और आवश्यक प्रक्रियाओं के बाद शव को यूक्रेन से मोल्दोवा के रास्ते भारत लाया गया।

अभिषेक के गांव में उनके पार्थिव शरीर के पहुंचने की खबर फैलते ही बड़ी संख्या में ग्रामीण परिवार के आसपास जुटने लगे। हर किसी की जुबान पर अभिषेक की चर्चा थी। गांव के लोगों ने परिवार के प्रति संवेदना जताई और इस दुख की घड़ी में उनके साथ खड़े रहने की बात कही। ग्रामीणों का कहना है कि अभिषेक की असमय मौत पूरे गांव के लिए बेहद दुखद है।

यूक्रेन में जारी युद्ध के बीच ओडेसा क्षेत्र के निकट हुए मिसाइल हमले ने एक बार फिर वहां मौजूद लोगों की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ा दी है। अभिषेक और अखिल की मौत ने उनके परिवारों को ऐसी पीड़ा दी है, जिसकी भरपाई संभव नहीं है। दोनों के शव 34 दिन बाद भारत पहुंचने से परिजनों को अंतिम विदाई का मौका मिला।

दिल्ली एयरपोर्ट से शव को लेकर रवाना हुए रिश्तेदारों के साथ परिवार की भावनाएं भी जुड़ी हुई हैं। लंबे इंतजार के बाद अब अभिषेक अपने गांव लौट रहे हैं, लेकिन जीवित नहीं। परिवार के लिए यह पल बेहद भावुक और पीड़ादायक है। जिन अपनों के लौटने का इंतजार था, उनके स्थान पर पार्थिव शरीर पहुंचना परिवार के लिए किसी बड़े आघात से कम नहीं है।

पैतृक गांव करमेल में अभिषेक के अंतिम दर्शन के लिए ग्रामीणों के पहुंचने की संभावना है। परिवार और ग्रामीण अब उनके अंतिम संस्कार की तैयारी में जुटेंगे। 34 दिनों के इंतजार के बाद अभिषेक का पार्थिव शरीर अपने गांव पहुंचेगा, जहां उन्हें अंतिम विदाई दी जाएगी।

अभिषेक निषाद की मौत ने उनके परिवार के साथ पूरे गांव को गहरे शोक में डाल दिया है। रविवार को उनके शव के भारत पहुंचने से स्वजन का लंबा इंतजार खत्म हुआ, लेकिन बेटे और अपने के खोने का दर्द हमेशा परिवार के साथ रहेगा। यूक्रेन से मोल्दोवा के रास्ते भारत लाया गया अभिषेक का पार्थिव शरीर अब अपने पैतृक गांव करमेल पहुंचेगा, जहां नम आंखों से उन्हें अंतिम विदाई दी जाएगी।

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