उत्तर प्रदेश

Janmabhoomi परिसर में दर्शन व्यवस्था में अस्थायी बदलाव, पास प्रणाली बाद में फिर लागू होगी

Kavita2
23 May 2026 1:53 PM IST
Janmabhoomi परिसर में दर्शन व्यवस्था में अस्थायी बदलाव, पास प्रणाली बाद में फिर लागू होगी
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Uttar Pradesh उत्तर प्रदेश: रामजन्मभूमि परिसर में आने वाले श्रद्धालुओं के लिए दर्शन व्यवस्था में इन दिनों अस्थायी बदलाव किए गए हैं। वर्तमान में सभी श्रद्धालुओं को परिसर के भीतर स्थित विभिन्न मंदिरों में बिना किसी पास के दर्शन की सुविधा दी जा रही है। इस व्यवस्था के तहत भक्तों को सातों पूरक मंदिरों और सातों ऋषि-मुनियों के मंदिरों में स्वतंत्र रूप से दर्शन करने की अनुमति मिल रही है।

प्रशासनिक व्यवस्था के अनुसार, फिलहाल किसी भी मंदिर में प्रवेश के लिए पास की अनिवार्यता समाप्त कर दी गई है, जिससे श्रद्धालु अपने मनचाहे ढंग से दर्शन कर पा रहे हैं। यह बदलाव श्रद्धालुओं की बढ़ती संख्या और सुगम दर्शन व्यवस्था को ध्यान में रखते हुए किया गया है।

हालांकि, प्रशासन ने यह भी स्पष्ट किया है कि यह व्यवस्था स्थायी नहीं है। वर्तमान में पासधारक और बिना पास वाले श्रद्धालुओं के लिए अलग-अलग प्रवेश मार्ग बनाए गए हैं, जबकि निकासी भी अलग-अलग रास्तों से की जा रही है ताकि भीड़ नियंत्रण में रहे और व्यवस्था सुचारु बनी रहे।

अधिकारियों के अनुसार, जैसे ही श्रद्धालुओं की संख्या एक लाख या उससे अधिक पहुंचती है, तब ट्रस्ट द्वारा पूर्व में लागू की गई व्यवस्था को फिर से बहाल कर दिया जाएगा। उस स्थिति में श्रद्धालुओं को पास प्रणाली के आधार पर दर्शन की अनुमति दी जाएगी।

पूर्व व्यवस्था के तहत सुगम, विशिष्ट, नित्य और सामान्य पासधारकों के लिए अलग-अलग समय और मार्ग निर्धारित किए जाते थे, जिससे दर्शन प्रक्रिया को नियंत्रित और व्यवस्थित तरीके से संचालित किया जा सके।

प्रशासन का कहना है कि यह अस्थायी बदलाव श्रद्धालुओं की सुविधा और भीड़ प्रबंधन को ध्यान में रखकर किया गया है, लेकिन भविष्य में भीड़ बढ़ने की स्थिति में पुरानी प्रणाली को फिर से लागू करना आवश्यक होगा।

स्थानीय सूत्रों के अनुसार, राम मंदिर परिसर में दर्शन के लिए देशभर से बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंच रहे हैं, जिसके चलते व्यवस्थाओं में समय-समय पर बदलाव किए जा रहे हैं।

कुल मिलाकर, रामजन्मभूमि परिसर में फिलहाल दर्शन व्यवस्था को सरल बनाया गया है, लेकिन भीड़ बढ़ने की स्थिति में पास आधारित पुरानी व्यवस्था फिर से लागू की जाएगी, ताकि श्रद्धालुओं को सुव्यवस्थित और सुरक्षित दर्शन सुनिश्चित किया जा सके।

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