उत्तर प्रदेश

जौनपुर में टेलीमेडिसिन बनी बेकार, मरीजों की बढ़ी परेशानी

Saba Naaz
11 July 2026 4:18 PM IST
जौनपुर में टेलीमेडिसिन बनी बेकार, मरीजों की बढ़ी परेशानी
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जौनपुर। ग्रामीण क्षेत्रों के मरीजों को विशेषज्ञ डॉक्टरों की सुविधा उपलब्ध कराने के उद्देश्य से शुरू की गई टेलीमेडिसिन और टेली रेडियोलॉजी योजना जौनपुर में पिछले एक साल से बंद पड़ी है। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत संचालित इस महत्वाकांक्षी योजना का अनुबंध अपोलो अस्पताल से समाप्त होने के बाद मरीजों को इसका लाभ नहीं मिल पा रहा है। इसके चलते ग्रामीण इलाकों के गरीब मरीजों को अब निजी अस्पतालों में महंगा उपचार कराने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है।

सरकार ने दूरदराज के क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए वर्ष 2018 में टेलीमेडिसिन योजना की शुरुआत की थी। इसका उद्देश्य उन मरीजों तक विशेषज्ञ डॉक्टरों की सलाह पहुंचाना था, जहां बड़े अस्पतालों और विशेषज्ञ चिकित्सकों की उपलब्धता नहीं थी।

योजना के तहत जिले के 14 सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों (सीएचसी) पर टेलीमेडिसिन सेवा संचालित की जा रही थी। वहीं सात अस्पतालों में टेली रेडियोलॉजी की सुविधा भी उपलब्ध थी। इसके माध्यम से मरीजों को विशेषज्ञ डॉक्टरों की सलाह, जांच रिपोर्ट की समीक्षा और आवश्यक चिकित्सकीय मार्गदर्शन मिल रहा था।

लेकिन अपोलो अस्पताल चेन्नई से हुआ सरकारी अनुबंध समाप्त होने के बाद यह सुविधा बंद हो गई। पिछले करीब एक साल से ग्रामीण मरीज इस सेवा से वंचित हैं। इसका सबसे अधिक असर आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों पर पड़ा है।

पहले जिन मरीजों को सीएचसी स्तर पर विशेषज्ञ डॉक्टरों की सलाह मिल जाती थी, उन्हें अब निजी अस्पतालों का रुख करना पड़ रहा है। गंभीर बीमारियों से जूझ रहे मरीजों को जांच और इलाज के लिए बड़ी रकम खर्च करनी पड़ रही है। कई परिवार इलाज का खर्च उठाने के लिए कर्ज लेने को भी मजबूर हो रहे हैं।

स्वास्थ्य विभाग की इस महत्वपूर्ण योजना के बंद होने से सरकारी संसाधनों पर भी सवाल उठ रहे हैं। योजना के लिए लगाए गए उपकरण और अन्य व्यवस्थाएं अब बिना उपयोग के पड़े हैं। करोड़ों रुपये खर्च कर तैयार की गई स्वास्थ्य सुविधा का लाभ मरीजों तक नहीं पहुंच पा रहा है।

ग्रामीण क्षेत्रों में विशेषज्ञ डॉक्टरों की कमी को देखते हुए टेलीमेडिसिन सेवा को काफी उपयोगी माना गया था। इसके जरिए मरीजों को जिला मुख्यालय या बड़े शहरों में जाने की जरूरत कम हो जाती थी। खासतौर पर हृदय रोग, न्यूरो, त्वचा रोग और अन्य गंभीर बीमारियों के मरीजों को विशेषज्ञ सलाह मिल जाती थी।

स्थानीय लोगों का कहना है कि सरकार को जल्द से जल्द इस सेवा को दोबारा शुरू करना चाहिए, ताकि गरीब और जरूरतमंद मरीजों को राहत मिल सके। स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच बढ़ाने के लिए शुरू की गई इस योजना का बंद होना ग्रामीण स्वास्थ्य व्यवस्था के लिए बड़ा नुकसान माना जा रहा है।

वहीं, स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों का कहना है कि योजना को दोबारा शुरू करने के लिए प्रक्रिया पर विचार किया जा रहा है। नए अनुबंध या वैकल्पिक व्यवस्था के माध्यम से टेलीमेडिसिन और टेली रेडियोलॉजी सेवा बहाल करने की दिशा में कदम उठाए जा सकते हैं।

फिलहाल मरीजों को इस सुविधा के दोबारा शुरू होने का इंतजार है। यदि जल्द ही योजना को फिर से शुरू किया जाता है तो ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले हजारों मरीजों को राहत मिल सकती है और सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी।

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