उत्तर प्रदेश

तकनीक को बनाया अपराध के खिलाफ हथियार, साइबर ठगी नेटवर्क पर कार्रवाई में 23 आरोपी गिरफ्तार

Kavita2
26 Sept 2026 5:56 PM IST
तकनीक को बनाया अपराध के खिलाफ हथियार, साइबर ठगी नेटवर्क पर कार्रवाई में 23 आरोपी गिरफ्तार
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झांसी। कंप्यूटर साइंस में बीटेक की पढ़ाई, सिविल सेवा में चयन और फिर पुलिस सेवा में तकनीकी ज्ञान को अपराध के खिलाफ हथियार बनाने वाली अरीबा नोमान ने झांसी में अपने कार्यकाल के दौरान साइबर अपराधियों के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई की। कटेरा क्षेत्र के तीन गांवों में सक्रिय बताए जा रहे साइबर ठगी के नेटवर्क के खिलाफ उनके नेतृत्व में की गई कार्रवाई में 60 से अधिक लोगों को हिरासत में लिया गया। जांच और पूछताछ के बाद 23 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया।

कार्रवाई के दौरान पुलिस ने बड़ी मात्रा में मोबाइल फोन, बैंकिंग से जुड़े दस्तावेज और इलेक्ट्रॉनिक उपकरण बरामद किए। पुलिस के अनुसार आरोपियों और संदिग्धों के पास से 120 मोबाइल फोन, 35 डेबिट कार्ड, 29 बैंक पासबुक, लैपटॉप, टैबलेट और नकदी सहित अन्य सामग्री मिली। बरामद सामान की जांच के जरिए साइबर ठगी के पूरे नेटवर्क और उससे जुड़े लोगों के बारे में जानकारी जुटाई गई।

अरीबा नोमान की शैक्षणिक पृष्ठभूमि कंप्यूटर साइंस से जुड़ी रही है। कंप्यूटर साइंस में बीटेक की पढ़ाई करने के बाद उन्होंने सिविल सेवा में सफलता हासिल की और पुलिस सेवा में आईं। तकनीकी विषयों की समझ का उपयोग उन्होंने साइबर अपराधों की जांच और अपराधियों तक पहुंचने में किया।

झांसी में उनके कार्यकाल के दौरान साइबर अपराध के खिलाफ कार्रवाई को विशेष प्राथमिकता दी गई। ऑनलाइन ठगी में मोबाइल फोन, बैंक खातों, डिजिटल लेनदेन और अन्य तकनीकी माध्यमों के इस्तेमाल को देखते हुए पुलिस ने जांच में तकनीकी साक्ष्यों पर ध्यान केंद्रित किया। इसी क्रम में कटेरा क्षेत्र में साइबर ठगी से जुड़े एक नेटवर्क की जानकारी सामने आई।

पुलिस को सूचना मिली थी कि कटेरा क्षेत्र के तीन गांवों से साइबर ठगी से जुड़ी गतिविधियां संचालित की जा रही हैं। इसके बाद पुलिस ने सूचनाओं की जांच शुरू की। तकनीकी और स्थानीय स्तर पर जानकारी जुटाने के बाद संदिग्ध लोगों की पहचान की गई और कार्रवाई की योजना तैयार की गई।

पुलिस की टीमों ने संबंधित गांवों में कार्रवाई करते हुए 60 से अधिक लोगों को हिरासत में लिया। बड़ी संख्या में लोगों को एक साथ हिरासत में लेने के बाद प्रत्येक की भूमिका की अलग-अलग जांच की गई। पूछताछ और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर जिन लोगों की कथित संलिप्तता सामने आई, उनके खिलाफ आगे की कानूनी कार्रवाई की गई।

जांच पूरी होने के बाद 23 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया। पुलिस ने अन्य लोगों की भूमिका की भी जांच की और यह पता लगाने का प्रयास किया कि नेटवर्क किस तरीके से काम कर रहा था। बरामद मोबाइल फोन और बैंकिंग सामग्री को जांच में महत्वपूर्ण माना गया।

कार्रवाई में 120 मोबाइल फोन बरामद होना जांच के लिए अहम रहा। साइबर अपराध के मामलों में मोबाइल फोन के जरिए कॉल, मैसेज, सोशल मीडिया और अन्य डिजिटल माध्यमों का इस्तेमाल किया जा सकता है। ऐसे में बरामद उपकरणों की तकनीकी जांच से पुलिस को ठगी के तरीके और नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों तक पहुंचने में मदद मिल सकती है।

इसी तरह 35 डेबिट कार्ड और 29 बैंक पासबुक की बरामदगी के बाद बैंक खातों से जुड़े लेनदेन की जानकारी भी जांच के दायरे में आई। पुलिस ने यह पता लगाने का प्रयास किया कि इन बैंक खातों का उपयोग किस तरह किया जा रहा था और इनके माध्यम से हुए लेनदेन का संबंध किन लोगों से था।

लैपटॉप और टैबलेट जैसे इलेक्ट्रॉनिक उपकरण भी बरामद किए गए। डिजिटल उपकरणों में उपलब्ध डेटा साइबर अपराध की जांच में महत्वपूर्ण साबित हो सकता है। पुलिस ने बरामद सामग्री को कब्जे में लेकर उसकी जांच शुरू की, ताकि आरोपियों की गतिविधियों और नेटवर्क के संचालन से संबंधित तथ्य सामने आ सकें।

इस पूरी कार्रवाई में तकनीकी जांच के साथ जमीनी स्तर पर पुलिस की सक्रियता भी महत्वपूर्ण रही। तीन गांवों में फैले कथित नेटवर्क के खिलाफ कार्रवाई के लिए अलग-अलग स्तर पर जानकारी जुटाई गई। इसके बाद संदिग्धों से पूछताछ और डिजिटल साक्ष्यों के आधार पर आरोपियों की भूमिका निर्धारित करने का प्रयास किया गया।

साइबर अपराध लगातार पुलिस के सामने नई चुनौती के रूप में उभर रहा है। अपराधी मोबाइल फोन, इंटरनेट और डिजिटल बैंकिंग सुविधाओं का इस्तेमाल कर लोगों को निशाना बनाते हैं। ऐसे मामलों में पारंपरिक जांच के साथ तकनीकी जानकारी और डिजिटल साक्ष्यों का विश्लेषण भी जरूरी हो जाता है।

अरीबा नोमान की कंप्यूटर साइंस की पढ़ाई ऐसे मामलों में उपयोगी साबित हुई। पुलिस सेवा में आने के बाद उन्होंने तकनीक की अपनी समझ को अपराध की जांच से जोड़ा। झांसी में साइबर अपराधियों के खिलाफ कार्रवाई में भी तकनीकी जानकारी का इस्तेमाल कर संदिग्ध नेटवर्क तक पहुंचने का प्रयास किया गया।

कटेरा क्षेत्र में की गई कार्रवाई में बरामद मोबाइल फोन, डेबिट कार्ड, बैंक पासबुक और इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की संख्या से मामले के व्यापक स्वरूप का अंदाजा लगाया जा सकता है। पुलिस अब इन उपकरणों और दस्तावेजों से मिली जानकारियों के आधार पर नेटवर्क से जुड़े अन्य पहलुओं की जांच कर रही है।

पुलिस की जांच में यह भी पता लगाने का प्रयास किया गया कि साइबर ठगी के जरिए प्राप्त रकम किन खातों में भेजी जाती थी और इसके बाद उसका लेनदेन किस तरह किया जाता था। बैंक खातों और डिजिटल रिकॉर्ड की जांच के माध्यम से रकम के प्रवाह को समझने की कोशिश की गई।

अरीबा नोमान के नेतृत्व में हुई इस कार्रवाई में पहले 60 से अधिक लोगों को हिरासत में लेकर उनकी भूमिका की जांच की गई और उसके बाद 23 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया। बड़ी मात्रा में बरामद डिजिटल और बैंकिंग सामग्री को भी जांच का हिस्सा बनाया गया।

झांसी में साइबर अपराध के खिलाफ हुई इस कार्रवाई ने यह भी दिखाया कि तकनीकी ज्ञान का इस्तेमाल पुलिसिंग में किस तरह किया जा सकता है। कंप्यूटर साइंस की पढ़ाई से लेकर सिविल सेवा और फिर पुलिस सेवा तक पहुंचीं अरीबा नोमान ने तकनीक को अपराधियों के खिलाफ जांच के महत्वपूर्ण माध्यम के रूप में इस्तेमाल किया।

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