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उग्रसेन पुल की मरम्मत के लिए कानपुर-लखनऊ से पहुंचीं टीमें

देवरिया: बरहज क्षेत्र में सरयू नदी पर बने उग्रसेन सेतु पर गड्ढा होने के बाद प्रशासन ने सुरक्षा के मद्देनजर सभी प्रकार के वाहनों का आवागमन बंद कर दिया है। पुल बंद होने से गोरखपुर, आजमगढ़, वाराणसी, बलिया और बिहार की ओर जाने वाले यात्रियों और वाहन चालकों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। सेतु की तकनीकी जांच और मरम्मत के लिए कानपुर, लखनऊ और गाजियाबाद की विशेषज्ञ कंपनियों को बुलाया गया है।
जानकारी के अनुसार, उग्रसेन सेतु के पश्चिमी छोर पर अचानक गड्ढा हो गया था। पुल की संरचना को देखते हुए प्रशासन ने किसी भी तरह के हादसे की आशंका को देखते हुए वाहनों की आवाजाही रोक दी। फिलहाल पुल पर भारी और हल्के दोनों प्रकार के वाहनों के प्रवेश पर प्रतिबंध लगा दिया गया है।
उग्रसेन सेतु क्षेत्र के लिए एक महत्वपूर्ण संपर्क मार्ग है। यह पुल बड़हलगंज, गोरखपुर, आजमगढ़, वाराणसी और बिहार को जोड़ता है। इसके बंद होने से हजारों यात्रियों और मालवाहक वाहनों की आवाजाही प्रभावित हुई है। प्रशासन की ओर से वैकल्पिक मार्गों से यातायात संचालित कराया जा रहा है।
सरयू नदी पर भागलपुर के पास स्थित यह पुल पहले से ही महत्वपूर्ण माना जाता था, क्योंकि आसपास के अन्य मार्गों पर भी समस्याएं बनी हुई हैं। भागलपुर पुल के क्षतिग्रस्त होने के बाद उग्रसेन सेतु बलिया की ओर जाने के लिए प्रमुख वैकल्पिक रास्ता बन गया था। अब इसके बंद होने से लोगों की मुश्किलें और बढ़ गई हैं।
प्रशासन ने भारी वाहनों को दूसरे रास्तों से भेजना शुरू किया है। गोरखपुर जाने वाले वाहनों को बड़हलगंज से हाटा बाजार होते हुए असवनपार के सामने राप्ती नदी के पुल से नगवाखास और फिर नारायणपुर स्थित गोर्रा नदी के पुल के रास्ते रुद्रपुर भेजा जा रहा है।
इस डायवर्जन के कारण वाहन चालकों को करीब 20 किलोमीटर अतिरिक्त दूरी तय करनी पड़ रही है। इसके अलावा यात्रा में लगभग 45 मिनट से अधिक का अतिरिक्त समय लग रहा है। सड़कें संकरी होने के कारण कई जगहों पर यातायात का दबाव भी बढ़ गया है।
ट्रक चालकों का कहना है कि लंबा रास्ता तय करने से डीजल की खपत बढ़ रही है और समय भी ज्यादा लग रहा है। वाहन चालकों ने प्रशासन से बेहतर व्यवस्था और पर्याप्त संकेतक बोर्ड लगाने की मांग की है। उनका कहना है कि कई बाहरी वाहन चालक सही रास्ते की जानकारी नहीं होने के कारण भटक रहे हैं, जिससे जाम की स्थिति भी बन रही है।
यात्रियों को भी काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। पटनवा जा रहीं मालती देवी ने बताया कि रास्ता बदलने के कारण उन्हें अपने गंतव्य तक पहुंचने में अधिक समय लग रहा है। वहीं, बलिया के भीमपुरा जाने वाले यात्रियों ने बताया कि अब यात्रा में कई घंटे अतिरिक्त लग रहे हैं।
उधर, पुल की स्थिति का निरीक्षण करने के लिए राजनीतिक दलों के नेता भी मौके पर पहुंचे। कांग्रेस प्रवक्ता रवि प्रताप सिंह और समाजवादी लोहिया वाहिनी के राष्ट्रीय सचिव अर्जुन सिंह ने समर्थकों के साथ पुल का निरीक्षण किया। उन्होंने छोटे वाहनों के लिए भी रास्ता बंद किए जाने पर नाराजगी जताई और जल्द मरम्मत की मांग की।
नेताओं ने चेतावनी दी कि अगर पांच दिनों के भीतर मरम्मत कार्य शुरू नहीं किया गया तो आंदोलन किया जाएगा। उन्होंने प्रशासन से यात्रियों की परेशानी को देखते हुए जल्द से जल्द समाधान निकालने की मांग की।
सेतु की तकनीकी जांच और मरम्मत के लिए विशेषज्ञ एजेंसियों को जिम्मेदारी दी गई है। अधिकारियों के अनुसार, लखनऊ, कानपुर और गाजियाबाद की कंपनियों को बुलाया गया है। दो से तीन दिन के भीतर मरम्मत कार्य शुरू कराने का प्रयास किया जा रहा है।
प्रशासन का कहना है कि पुल की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है। जांच रिपोर्ट के आधार पर आवश्यक कदम उठाए जाएंगे, ताकि जल्द से जल्द उग्रसेन सेतु पर आवागमन सामान्य किया जा सके।





