उत्तर प्रदेश

30 सूत्रीय मांगों को लेकर शिक्षकों का विरोध प्रदर्शन, काली पट्टी बांधकर पढ़ा रहे छात्र

Kavita2
3 Nov 2026 5:14 PM IST
30 सूत्रीय मांगों को लेकर शिक्षकों का विरोध प्रदर्शन, काली पट्टी बांधकर पढ़ा रहे छात्र
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कुशीनगर। उत्तर प्रदेश के कुशीनगर जिले में उच्च शिक्षा से जुड़े शिक्षकों ने अपनी लंबित मांगों को लेकर विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया है। विश्वविद्यालय-महाविद्यालय शिक्षक महासंघ (फुपुक्टा) और गोरखपुर विश्वविद्यालय संबद्ध महाविद्यालय शिक्षक संघ (गुआक्टा) के संयुक्त आह्वान पर बुद्ध पीजी कॉलेज के शिक्षकों ने सोमवार को 30 सूत्रीय मांगों के समर्थन में काली पट्टी बांधकर शिक्षण कार्य किया। शिक्षकों का यह विरोध प्रदर्शन 4 नवंबर तक जारी रहेगा। प्रदर्शनकारी शिक्षक पुरानी पेंशन व्यवस्था की बहाली, सेवानिवृत्ति आयु बढ़ाने और अन्य लंबित मांगों पर सरकार से सकारात्मक निर्णय लेने की मांग कर रहे हैं।

शिक्षकों ने विरोध का ऐसा तरीका अपनाया है, जिससे विद्यार्थियों की नियमित पढ़ाई प्रभावित न हो। कॉलेज में शिक्षक काली पट्टी बांधकर कक्षाओं में पहुंचे और निर्धारित समय के अनुसार विद्यार्थियों को पढ़ाया। इस दौरान उन्होंने अपनी मांगों के प्रति सरकार का ध्यान आकर्षित करने का प्रयास किया। शिक्षकों का कहना है कि उच्च शिक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए शिक्षकों की सेवा संबंधी समस्याओं का समाधान आवश्यक है।

महासंघ की प्रमुख मांगों में पुरानी पेंशन योजना को दोबारा लागू करना शामिल है। शिक्षकों का मानना है कि सेवानिवृत्ति के बाद आर्थिक सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए पुरानी पेंशन व्यवस्था महत्वपूर्ण है। उनका कहना है कि लंबे समय तक शिक्षण कार्य करने वाले कर्मचारियों को सेवानिवृत्ति के बाद स्थायी आर्थिक सहारा मिलना चाहिए।

शिक्षक संगठनों ने अधिवर्षता आयु 65 वर्ष करने की मांग भी प्रमुखता से उठाई है। वर्तमान व्यवस्था में बदलाव की मांग करते हुए महासंघ का तर्क है कि अनुभवी शिक्षकों की सेवाएं लंबे समय तक उच्च शिक्षण संस्थानों को मिलनी चाहिए। संगठनों के अनुसार, वरिष्ठ शिक्षकों का अनुभव विद्यार्थियों के मार्गदर्शन, शोध गतिविधियों और शैक्षणिक गुणवत्ता को बेहतर बनाने में उपयोगी हो सकता है।

इसके अतिरिक्त शिक्षकों ने फीडर कैडर व्यवस्था लागू करने की मांग की है। शिक्षक संगठनों का मानना है कि सेवा संरचना में स्पष्टता और पदोन्नति के अवसर उपलब्ध होने से शिक्षकों को अपने करियर में आगे बढ़ने का बेहतर अवसर मिलेगा। इसके लिए सरकार से आवश्यक नीतिगत निर्णय लेने की मांग की जा रही है।

महासंघ की 30 सूत्रीय मांगों में पीएचडी उपाधि प्राप्त शिक्षकों को पांच इंक्रीमेंट देने का मुद्दा भी शामिल है। शिक्षकों का कहना है कि उच्च शैक्षणिक योग्यता प्राप्त करने के लिए वर्षों तक अध्ययन और शोध करना पड़ता है। ऐसे में शोध उपाधि प्राप्त शिक्षकों को प्रोत्साहित करने के लिए वेतन संबंधी लाभ प्रदान किए जाने चाहिए।

अनुदानित महाविद्यालयों में कार्यरत स्ववित्तपोषित शिक्षकों के विनियमितीकरण का मुद्दा भी आंदोलन का महत्वपूर्ण हिस्सा है। शिक्षक संगठनों के अनुसार, स्ववित्तपोषित व्यवस्था के अंतर्गत लंबे समय से कार्यरत शिक्षकों के भविष्य और सेवा सुरक्षा से जुड़े सवालों का समाधान जरूरी है। महासंघ ने इन शिक्षकों के लिए स्पष्ट और न्यायसंगत व्यवस्था तैयार करने की मांग की है।

इसके साथ ही शिक्षक श्री पुरस्कार योजना लागू करने की मांग भी उठाई गई है। इस योजना के माध्यम से उत्कृष्ट शिक्षण कार्य, शोध, नवाचार और शिक्षा के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान देने वाले शिक्षकों को सम्मानित करने की अपेक्षा जताई गई है। संगठनों का मानना है कि शिक्षकों को प्रोत्साहन मिलने से उच्च शिक्षा संस्थानों में बेहतर शैक्षणिक वातावरण विकसित हो सकता है।

यह विरोध केवल एक महाविद्यालय तक सीमित नहीं है। प्रदेश के विभिन्न महाविद्यालयों में भी फुपुक्टा के आह्वान पर शिक्षकों ने काली पट्टी बांधकर प्रदर्शन किया है। आंदोलन का पहला चरण 2 से 4 नवंबर तक निर्धारित किया गया है। इससे स्पष्ट है कि शिक्षक संगठन अपनी लंबित मांगों को लेकर प्रदेश स्तर पर एकजुट होकर आवाज उठा रहे हैं।

शिक्षक महासंघ ने अपनी मांगों को लेकर चरणबद्ध आंदोलन की रूपरेखा भी तैयार की है। घोषित कार्यक्रम के अनुसार, 5 नवंबर को जिला मुख्यालयों पर शिक्षक एकत्रित होकर जिलाधिकारी के माध्यम से मुख्यमंत्री को संबोधित ज्ञापन सौंपेंगे। इसके बाद भी मांगों पर समाधान नहीं निकलने की स्थिति में लखनऊ में क्रमिक धरना आयोजित करने की योजना है। हालांकि, उसके लिए अलग से कार्यक्रम घोषित किया जाएगा।

बुद्ध पीजी कॉलेज में काली पट्टी बांधकर शिक्षण कार्य करने वाले शिक्षकों का विरोध उच्च शिक्षा क्षेत्र से जुड़ी समस्याओं की ओर ध्यान आकर्षित कर रहा है। इस आंदोलन में पेंशन, वेतनवृद्धि, सेवा सुरक्षा और पदोन्नति जैसी मांगों को प्रमुखता दी गई है।

अब शिक्षक संगठनों की नजर सरकार के रुख पर है। शिक्षकों को उम्मीद है कि शासन उनकी मांगों पर विचार करेगा और समस्याओं के समाधान के लिए ठोस पहल करेगा। फिलहाल, 4 नवंबर तक काली पट्टी बांधकर विरोध जताने का कार्यक्रम जारी रहेगा। इसके बाद अगले चरण में ज्ञापन के माध्यम से शिक्षकों की आवाज सरकार तक पहुंचाने की तैयारी है।

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