उत्तर प्रदेश

लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे पर उखड़ रही सड़क की तारकोल, कई हिस्सों में दोबारा लेपन

Kavita2
22 Aug 2026 9:14 AM IST
लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे पर उखड़ रही सड़क की तारकोल, कई हिस्सों में दोबारा लेपन
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लखनऊ/कानपुर। उत्तर प्रदेश में विश्वस्तरीय सड़क के दावे के साथ शुरू किए गए लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे पर समस्याएं कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। एक्सप्रेसवे शुरू होने के बाद से ही कई स्थानों पर सड़क की ऊपरी परत यानी तारकोल उखड़ने की शिकायतें सामने आती रही हैं। अब एक बार फिर सड़क के कई हिस्सों में तारकोल उखड़ने के बाद मरम्मत का काम कराया जा रहा है। कानपुर से लखनऊ की ओर जाने वाली लेन में कई किलोमीटर के हिस्से पर नए सिरे से तारकोल का लेपन किया गया है।

जानकारी के मुताबिक, कानपुर से लखनऊ वाली लेन में किमी 48 से 49 और किमी 46.9 से 47 तक सड़क की ऊपरी सतह पर नए सिरे से तारकोल बिछाया गया है। इन हिस्सों में पहले सड़क की सतह खराब होने और तारकोल उखड़ने की स्थिति सामने आई थी। इसके बाद संबंधित हिस्सों में दोबारा लेपन का काम किया गया। हालांकि, एक्सप्रेसवे के अन्य हिस्सों में भी सड़क की सतह को लेकर स्थिति पूरी तरह सामान्य नहीं दिखाई दे रही है।

कई स्थानों पर सड़क की ऊपरी परत खराब

एक्सप्रेसवे पर आवागमन शुरू होने के बाद यात्रियों को बेहतर और तेज सड़क सुविधा मिलने की उम्मीद थी। परियोजना को आधुनिक सुविधाओं से लैस और विश्वस्तरीय मानकों के अनुरूप तैयार किए जाने का दावा किया गया था। लेकिन सड़क की ऊपरी परत के कई स्थानों पर खराब होने से इसकी गुणवत्ता को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं।

कई जगहों पर तारकोल हल्का सा दबा हुआ दिखाई दे रहा है। सड़क की सतह पर ऐसे स्थानों को देखकर संभावना जताई जा रही है कि यहां भी नए सिरे से तारकोल बिछाने का काम कराया जा सकता है। यदि इन स्थानों पर भी मरम्मत की जरूरत पड़ती है तो एक्सप्रेसवे के निर्माण और सड़क की गुणवत्ता को लेकर उठ रहे सवाल और गंभीर हो सकते हैं।

सड़क की ऊपरी परत का दबना या उसका उखड़ना वाहन चालकों के लिए भी परेशानी का कारण बन सकता है। खासकर तेज रफ्तार वाले एक्सप्रेसवे पर सड़क की सतह का समान होना बेहद जरूरी होता है। ऊंच-नीच या सड़क की सतह में अचानक बदलाव होने से वाहनों की गति और नियंत्रण प्रभावित हो सकता है।

मरम्मत के बाद भी उठ रहे सवाल

किमी 48 से 49 और किमी 46.9 से 47 के बीच दोबारा तारकोल का लेपन किए जाने से यह साफ है कि सड़क के कुछ हिस्सों में मरम्मत की जरूरत महसूस की गई। हालांकि, यह सवाल भी महत्वपूर्ण है कि सड़क की ऊपरी परत इतनी जल्दी खराब क्यों हुई और निर्माण के दौरान किन मानकों का पालन किया गया था।

किसी भी एक्सप्रेसवे की गुणवत्ता केवल उसके निर्माण और उद्घाटन के समय से तय नहीं होती, बल्कि लंबे समय तक सड़क की मजबूती और टिकाऊपन भी महत्वपूर्ण होता है। यदि सड़क के निर्माण के कुछ समय बाद ही अलग-अलग स्थानों पर ऊपरी परत उखड़ने लगे और बार-बार मरम्मत की आवश्यकता पड़े तो इससे निर्माण की गुणवत्ता पर सवाल उठना स्वाभाविक है।

विशेषज्ञों के अनुसार सड़क की ऊपरी परत के खराब होने के पीछे कई कारण हो सकते हैं। इनमें निर्माण सामग्री की गुणवत्ता, सड़क निर्माण की प्रक्रिया, तापमान, जल निकासी व्यवस्था और भारी वाहनों का दबाव शामिल हो सकता है। हालांकि, किसी विशेष हिस्से में सड़क खराब होने का वास्तविक कारण तकनीकी जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकता है।

यात्रियों की नजर अब गुणवत्ता पर

लखनऊ और कानपुर के बीच यात्रा को आसान और तेज बनाने के उद्देश्य से एक्सप्रेसवे को महत्वपूर्ण परियोजना माना गया है। दोनों शहरों के बीच आवागमन करने वाले लोगों के लिए यह मार्ग समय बचाने वाला विकल्प है। ऐसे में यात्रियों की अपेक्षा है कि एक्सप्रेसवे की सड़क लंबे समय तक मजबूत और सुरक्षित बनी रहे।

लेकिन सड़क की सतह पर बार-बार होने वाली मरम्मत के कारण अब यात्रियों की नजर एक्सप्रेसवे की गुणवत्ता पर टिक गई है। सड़क निर्माण के बाद यदि अलग-अलग हिस्सों में तारकोल उखड़ने और दबने की समस्या सामने आती है तो इससे न केवल यात्रियों की परेशानी बढ़ती है, बल्कि परियोजना की विश्वसनीयता पर भी असर पड़ता है।

आगे और हिस्सों में हो सकता है लेपन

फिलहाल कानपुर से लखनऊ जाने वाली लेन में किमी 48 से 49 और किमी 46.9 से 47 तक नए सिरे से तारकोल का लेपन किया गया है। इसके अलावा कई स्थानों पर तारकोल हल्का दबा हुआ है। ऐसे स्थानों पर भी स्थिति की निगरानी की जा रही है और जरूरत पड़ने पर वहां दोबारा लेपन कराए जाने की संभावना है।

अब देखना यह होगा कि मरम्मत के बाद इन हिस्सों की सड़क कितने समय तक टिकाऊ रहती है। साथ ही, एक्सप्रेसवे के दूसरे हिस्सों में दिखाई दे रही कमियों को किस तरह दूर किया जाता है। सड़क की गुणवत्ता को लेकर उठ रहे सवालों के बीच जरूरी है कि संबंधित एजेंसियां निर्माण सामग्री, सड़क की मोटाई, लेपन की गुणवत्ता और अन्य तकनीकी पहलुओं की नियमित जांच करें।

लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे को बेहतर कनेक्टिविटी और तेज आवागमन के लिए महत्वपूर्ण परियोजना माना जा रहा है। ऐसे में इसकी सड़क की गुणवत्ता को लेकर सामने आ रही शिकायतों को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। यात्रियों को विश्वस्तरीय सड़क का भरोसा देने वाली इस परियोजना के लिए अब सबसे बड़ी चुनौती यही है कि सड़क की मौजूदा कमियों को स्थायी रूप से दूर किया जाए और बार-बार होने वाली मरम्मत की जरूरत को खत्म किया जा सके।

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