उत्तर प्रदेश

कांवड़ यात्रा से पहले तमन्ना मलिक को नोटिस, क्या है पूरा विवाद?

Ratna Netam
4 Aug 2026 9:24 PM IST
कांवड़ यात्रा से पहले तमन्ना मलिक को नोटिस, क्या है पूरा विवाद?
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संभल : उत्तर प्रदेश के संभल जिले में पिछले वर्ष बुर्का पहनकर कांवड़ यात्रा करने के कारण चर्चा में आईं तमन्ना मलिक और उनके पति अमन त्यागी एक बार फिर सुर्खियों में हैं। इस बार भी दोनों ने हरिद्वार से कांवड़ लाने का ऐलान किया है, लेकिन यात्रा शुरू होने से पहले ही प्रशासन ने कानून-व्यवस्था बनाए रखने के उद्देश्य से दोनों के खिलाफ एहतियाती कार्रवाई की है। पुलिस की रिपोर्ट के आधार पर एसडीएम न्यायालय ने तमन्ना मलिक और अमन त्यागी को 20-20 हजार रुपये के निजी मुचलके पर पाबंद रहने का नोटिस जारी किया है।
प्रशासन की इस कार्रवाई के बाद मामला चर्चा का विषय बन गया है। अमन त्यागी ने नोटिस मिलने पर प्रशासनिक फैसले पर सवाल उठाते हुए कहा कि हरिद्वार जाकर कांवड़ लाना एक धार्मिक आस्था का विषय है और इसमें प्रशासन को कोई आपत्ति नहीं होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि यदि किसी प्रकार की सुरक्षा संबंधी आशंका है तो प्रशासन को सहयोग और सुरक्षा उपलब्ध करानी चाहिए, न कि इस तरह की कार्रवाई करनी चाहिए।
अमन त्यागी मंगलवार को नोटिस मिलने के बाद एसडीएम कार्यालय पहुंचे और वहां अपनी आपत्ति दर्ज कराई। उनका कहना है कि नोटिस में उनकी पत्नी तमन्ना मलिक के पहनावे का भी उल्लेख किया गया है, जिसे लेकर उन्हें आपत्ति है। उन्होंने कहा कि कोई व्यक्ति धार्मिक यात्रा के दौरान कौन से वस्त्र पहनता है, यह उसका व्यक्तिगत अधिकार है। इसे विवाद का विषय नहीं बनाया जाना चाहिए और किसी की धार्मिक स्वतंत्रता पर इस प्रकार सवाल नहीं उठाया जाना चाहिए।
अमन त्यागी ने कहा कि यदि उनकी पत्नी बुर्का पहनकर कांवड़ यात्रा करती हैं तो इससे किसी भी समुदाय की धार्मिक भावनाएं आहत नहीं होनी चाहिए। उन्होंने याद दिलाया कि पिछले वर्ष भी तमन्ना मलिक बुर्का पहनकर हरिद्वार से कांवड़ लेकर संभल पहुंची थीं। उस समय उनकी यात्रा को लेकर काफी चर्चा हुई थी और अंततः उनके द्वारा लाया गया गंगाजल बालयोगी दीनानाथ की मौजूदगी में शिवालय में भगवान शिव को अर्पित किया गया था। इस घटना ने राष्ट्रीय स्तर पर भी ध्यान आकर्षित किया था।
इस वर्ष भी दोनों ने हरिद्वार से कांवड़ लाने की घोषणा की थी, जिसके बाद स्थानीय पुलिस ने स्थिति का आकलन करते हुए रिपोर्ट तैयार की। पुलिस का मानना था कि उनकी यात्रा के दौरान कानून-व्यवस्था प्रभावित होने की आशंका हो सकती है। इसी रिपोर्ट के आधार पर भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की निवारक धाराओं के तहत एसडीएम न्यायालय ने दोनों को 20-20 हजार रुपये के निजी मुचलके पर पाबंद करने का आदेश जारी किया।
संभल के उपजिलाधिकारी विकास चंद्रा ने प्रशासन की कार्रवाई का बचाव करते हुए कहा कि आगामी धार्मिक आयोजनों और कांवड़ यात्रा के दौरान क्षेत्र में शांति एवं कानून-व्यवस्था बनाए रखना प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह कार्रवाई किसी व्यक्ति विशेष के धार्मिक अधिकारों को सीमित करने के उद्देश्य से नहीं, बल्कि संभावित विवाद या तनाव की आशंका को देखते हुए एहतियातन की गई है। उनके अनुसार पुलिस की रिपोर्ट और उपलब्ध तथ्यों के आधार पर कानून के दायरे में रहकर यह निर्णय लिया गया है।
प्रशासन का कहना है कि कांवड़ यात्रा के दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालु विभिन्न मार्गों से गुजरते हैं और किसी भी प्रकार की संवेदनशील स्थिति उत्पन्न होने से पहले आवश्यक कदम उठाना प्रशासन की जिम्मेदारी होती है। इसी कारण संभावित शांति भंग की आशंका वाले मामलों में निवारक कार्रवाई की जाती है, ताकि किसी प्रकार की अप्रिय घटना न हो।
दूसरी ओर, अमन त्यागी का कहना है कि वह और उनकी पत्नी शांतिपूर्ण तरीके से अपनी धार्मिक आस्था का पालन करना चाहते हैं। उनका दावा है कि उनकी यात्रा का उद्देश्य केवल भगवान शिव के प्रति श्रद्धा व्यक्त करना है और वे किसी प्रकार का विवाद या तनाव पैदा नहीं करना चाहते। उन्होंने प्रशासन से निष्पक्ष व्यवहार और पर्याप्त सुरक्षा उपलब्ध कराने की मांग की है।
फिलहाल यह मामला प्रशासनिक कार्रवाई और व्यक्तिगत धार्मिक स्वतंत्रता के बीच संतुलन को लेकर चर्चा का विषय बना हुआ है। अब सभी की नजर इस बात पर है कि आगामी कांवड़ यात्रा के दौरान प्रशासन इस पूरे मामले को किस तरह संभालता है और तमन्ना मलिक तथा अमन त्यागी की यात्रा किस प्रकार संपन्न होती है।
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