उत्तर प्रदेश

दान चोरी मामले के बाद राम मंदिर में बदली व्यवस्था SBI के 10 कर्मचारी करेंगे गणना

Ratna Netam
9 Aug 2026 6:58 PM IST
दान चोरी मामले के बाद राम मंदिर में बदली व्यवस्था SBI के 10 कर्मचारी करेंगे गणना
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अयोध्या : राम मंदिर में चढ़ावे की धनराशि की गणना और उसके प्रबंधन को लेकर चल रही एसआईटी जांच के बीच व्यवस्थाओं में बदलाव का सिलसिला जारी है। चढ़ावा चोरी के आरोपों के बाद मंदिर में दानपात्रों से प्राप्त धनराशि की गणना प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और व्यवस्थित बनाने के लिए नई व्यवस्था लागू की जा रही है। इसी क्रम में भारतीय स्टेट बैंक यानी एसबीआई प्रबंधन ने अब गणना कार्य के लिए सेना से जुड़े रहे रिटायर बैंक कर्मियों का चयन किया है। बैंक की अलग-अलग शाखाओं में कार्यरत 10 नियमित कर्मचारियों की ड्यूटी इस काम के लिए लगाई गई है।
जानकारी के मुताबिक, चढ़ावे की धनराशि की गणना के लिए कुल 12 कर्मचारियों की आवश्यकता बताई गई है। फिलहाल बैंक प्रबंधन ने 10 कर्मचारियों को जिम्मेदारी सौंप दी है। इनके अलावा गणना की पूरी प्रक्रिया की निगरानी के लिए एक प्रभारी अधिकारी भी नियुक्त किया गया है। बताया जा रहा है कि सुपरविजन की जिम्मेदारी क्लास टू स्तर के एक अधिकारी को दी गई है। इस नई व्यवस्था का उद्देश्य गणना प्रक्रिया को निर्धारित एसओपी के अनुसार संचालित करना और इसमें किसी भी तरह की अनियमितता की संभावना को कम करना है।
चढ़ावा चोरी के मामले के सामने आने के बाद मंदिर में दानराशि की गणना को लेकर सुरक्षा और पारदर्शिता पर कई सवाल उठे थे। अब बैंक प्रबंधन ने गणना प्रक्रिया में शामिल कर्मचारियों के चयन और निगरानी व्यवस्था को अधिक मजबूत करने का फैसला किया है। बैंक के नियमित कर्मचारियों को जिम्मेदारी दिए जाने से प्रक्रिया में जवाबदेही बढ़ने की उम्मीद जताई जा रही है।
सिक्योरिटी एजेंसी की सेवाएं खत्म करने की तैयारी
इसी बीच एसबीआई प्रबंधन ने राम मंदिर में तैनात सिक्योरिटी सर्विस एजेंसी की सेवाएं समाप्त करने को लेकर सर्कुलर भी जारी किया है। हालांकि एजेंसी से जुड़े तीन कर्मचारियों को फिलहाल काम पर बनाए रखा गया है। इन तीन कर्मचारियों की जिम्मेदारी दानपात्रों को खाली करने के बाद चढ़ावे की धनराशि को जिन पेटियों में रखा जाता है, उन्हें गणना स्थल तक पहुंचाने की है। गणना पूरी होने के बाद इन्हीं पेटियों को सुरक्षित तरीके से बैंक तक पहुंचाने का काम भी इन कर्मचारियों के जिम्मे रहेगा।
इसके अलावा संबंधित एजेंसी के बाकी सभी कर्मचारियों को राम मंदिर से हटा दिया गया है। बताया गया है कि इससे पहले मंदिर में इस एजेंसी के करीब तीन दर्जन कर्मचारी काम कर रहे थे। चढ़ावा चोरी के आरोप में जेल भेजे गए आठ आरोपियों में से छह आरोपी इसी एजेंसी के माध्यम से राम मंदिर में गणना कार्य से जुड़े हुए थे। इस घटनाक्रम के बाद बैंक और मंदिर प्रशासन की ओर से सुरक्षा तथा गणना प्रक्रिया को लेकर नए सिरे से व्यवस्था बनाने की जरूरत महसूस की गई।
एजेंसी के अनुभव पर भी उठे सवाल
चढ़ावा चोरी के मामले की जांच के दौरान बैंक द्वारा अनुबंधित सिक्योरिटी एजेंसी की भूमिका और उसकी योग्यता को लेकर भी सवाल उठे। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, संबंधित एजेंसी के पास वित्तीय प्रबंधन से जुड़े काम का पर्याप्त अनुभव नहीं था। इसके बावजूद उसके कर्मचारियों को मंदिर में चढ़ावे की धनराशि से संबंधित गणना प्रक्रिया में शामिल किया गया था।
बताया गया कि इन कर्मचारियों को कई स्तर पर सुविधाएं और छूट भी मिली हुई थीं। उनके लिए निर्धारित ड्रेस कोड का पालन अनिवार्य रूप से नहीं कराया गया था। साथ ही मंदिर परिसर में उनकी जांच को लेकर भी अन्य कर्मचारियों की तरह सख्ती नहीं बरती जाती थी। जांच में इन व्यवस्थाओं को भी महत्वपूर्ण पहलू के तौर पर देखा जा रहा है।
आरोप है कि इसी व्यवस्था का फायदा उठाकर कुछ कर्मचारियों ने चढ़ावे की रकम में कथित तौर पर गड़बड़ी की। बाद में कर्मचारियों के बीच आपसी विवाद और जानकारी सामने आने के बाद मामले का खुलासा हुआ। पुलिस की कार्रवाई के दौरान आरोपियों की निशानदेही पर कथित तौर पर चोरी की गई धनराशि की बरामदगी की गई थी।
एसआईटी जांच के बीच बढ़ी जवाबदेही
राम मंदिर चढ़ावा चोरी का मामला सामने आने के बाद इसकी जांच एसआईटी को सौंपी गई है। जांच एजेंसी मामले से जुड़े विभिन्न पहलुओं की पड़ताल कर रही है। इसमें चढ़ावे की गणना की प्रक्रिया, कर्मचारियों की तैनाती, सुरक्षा व्यवस्था, बैंक और एजेंसी के बीच जिम्मेदारियां तथा कथित अनियमितताओं से जुड़े तथ्यों की जांच शामिल है।
मामले में प्राथमिकी दर्ज कराने में कथित देरी को लेकर भी सवाल उठे थे। इसके बाद मंदिर ट्रस्ट से जुड़े तत्कालीन महासचिव चंपत राय और ट्रस्टी डॉ. अनिल मिश्र के पद से हटने की बात सामने आई थी। अब नई व्यवस्था के तहत बैंक कर्मचारियों की तैनाती और निगरानी अधिकारी की नियुक्ति को इसी दिशा में उठाए गए कदम के तौर पर देखा जा रहा है।
नई व्यवस्था लागू होने के बाद उम्मीद है कि राम मंदिर में चढ़ावे की धनराशि की गणना और उसे बैंक तक पहुंचाने की प्रक्रिया अधिक सुरक्षित और पारदर्शी तरीके से संचालित होगी। एसआईटी जांच के निष्कर्ष आने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि कथित चोरी में कौन-कौन लोग शामिल थे और व्यवस्था में किस स्तर पर लापरवाही या अनियमितता हुई।
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