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उत्तर प्रदेश
बीहड़ की सैयद मजार अवैध घोषित, दो माह की सुनवाई के बाद हटाने का निर्देश
SHIDDHANT
18 April 2026 11:44 PM IST

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Lucknow लखनऊ। उत्तर प्रदेश के इटावा के बीहड़ क्षेत्र में स्थित सैयद मजार को लेकर अदालत ने बड़ा फैसला सुनाया है। करीब दो माह तक चली सुनवाई के बाद मजार को आरक्षित वन भूमि पर अवैध कब्जा मानते हुए बेदखली का आदेश जारी कर दिया गया। पक्षकार मजार को 800 साल पुराना बताते रहे, लेकिन इसके समर्थन में कोई ठोस साक्ष्य पेश नहीं कर सके। आदेश विपक्षी पक्ष को तामील करा दिया गया है, जिसके बाद अब मजार हटाने को लेकर बुलडोजर कार्रवाई की चर्चाएं तेज हो गई हैं।
वन न्यायालय के प्राधिकृत अधिकारी ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि संबंधित भूमि वर्ष 1916, 1939 और 1946 के गजट के अनुसार आरक्षित वन क्षेत्र में दर्ज है। ऐसे में इस भूमि पर किसी भी प्रकार का गैर-वानिकी कार्य कानूनन अवैध है। जांच में मजार के आसपास करीब 1800 वर्गफीट जमीन पर कब्जा पाया गया, जिसे अवैध मानते हुए हटाने का आदेश दिया गया।
मामले की सुनवाई के दौरान मजार के पक्षकार फजले इलाही को कुल पांच अवसर दिए गए थे, ताकि वे भूमि स्वामित्व से जुड़े दस्तावेज प्रस्तुत कर सकें। उन्होंने मजार को 800 साल पुराना बताया, लेकिन इस दावे के समर्थन में कोई ऐतिहासिक या कानूनी प्रमाण पेश नहीं कर पाए। पर्याप्त समय मिलने के बावजूद साक्ष्य न देने पर न्यायालय ने कब्जा बेदखली का आदेश पारित कर दिया।
यह पूरी कार्रवाई भारतीय वन अधिनियम 1927 की धारा 20 के तहत की गई है। इस प्रावधान के अनुसार आरक्षित वन भूमि में किसी भी तरह का गैर वानिकी कार्य बिना उच्च स्तरीय अनुमति के नहीं किया जा सकता। इसी आधार पर मजार को अवैध घोषित किया गया। साथ ही धारा 61बी के तहत वाद दायर कर विधिक प्रक्रिया पूरी की गई।
इस प्रकरण की शुरुआत 23 जनवरी को हुई थी, जब वन विभाग की ओर से ध्वस्तीकरण का वाद दायर किया गया। वन रेंजर अशोक कुमार शर्मा ने मामला प्रस्तुत किया। पहली सुनवाई 5 फरवरी को हुई, जिसके बाद पक्षकारों ने कई बार समय मांगा। अदालत ने 16 फरवरी, 20 फरवरी, 23 मार्च और 28 मार्च तक दस्तावेज देने के मौके दिए, लेकिन कोई प्रमाण प्रस्तुत नहीं किया गया। अंततः 17 अप्रैल को फैसला सुनाया गया।
वन विभाग के एसडीओ विमल कुमार के अनुसार, बढ़पुरा रेंज के फिशर वन ब्लॉक में लगभग 0.0281 हेक्टेयर भूमि पर अवैध निर्माण पाया गया था। जांच के बाद मामला न्यायालय में लाया गया। सुनवाई के दौरान विपक्षी पक्ष कोई भी वैध दस्तावेज पेश नहीं कर सका, जिसके चलते बेदखली का आदेश जारी कर दिया गया।
शनिवार दोपहर वन विभाग की ओर से मजार के पक्षकार फजले इलाही को न्यायालय का आदेश तामील करा दिया गया। इसके बाद अब क्षेत्र में यह कयास लगाए जा रहे हैं कि मजार को हटाने के लिए जल्द ही बुलडोजर की कार्रवाई की जा सकती है। हालांकि, प्रशासन ने अभी इसकी कोई आधिकारिक तारीख घोषित नहीं की है।
स्थानीय स्तर पर यह भी चर्चा है कि पक्षकारों की कमजोर पैरवी इस फैसले का एक बड़ा कारण रही। पर्याप्त मौके मिलने के बावजूद साक्ष्य प्रस्तुत न कर पाने के चलते मामला उनके खिलाफ गया और अंततः मजार को अवैध घोषित करते हुए बेदखली का आदेश जारी कर दिया गया।
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