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Ram temple. दान राशि का हिसाब, स्वामी गोविंद ने दी जानकारी

Ayodhya अयोध्या : श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट में हाल में उठे विवादों के बाद अब व्यवस्थाओं में सुधार की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष स्वामी गोविंद देव गिरि ने कहा है कि मंदिर की कार्यप्रणाली को और अधिक पारदर्शी, त्रुटिरहित और प्रभावी बनाने के लिए जरूरी कदम उठाए जा रहे हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि केवल पदों से इस्तीफा देना किसी समस्या का स्थायी समाधान नहीं है, बल्कि व्यवस्था में सुधार करना ही सबसे महत्वपूर्ण है।स्वामी गोविंद देव गिरि ने एक बातचीत में कहा कि श्री राम जन्मभूमि मंदिर से जुड़ी व्यवस्थाओं को बेहतर बनाने के लिए बदलाव की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। उन्होंने बताया कि मंदिर प्रबंधन से जुड़े कुछ महत्वपूर्ण फैसले लिए जा रहे हैं, ताकि भविष्य में किसी भी प्रकार की परेशानी या भ्रम की स्थिति उत्पन्न न हो।
गोपाल राव को प्रबंधक पद की जिम्मेदारी से हटाया गया
मंदिर प्रबंधक के पद को लेकर पूछे गए सवाल पर स्वामी गोविंद देव गिरि ने कहा कि गोपाल राव को पहले ही जानकारी दे दी गई है कि अब वह इस जिम्मेदारी का निर्वहन नहीं करेंगे। उन्होंने कहा कि मंदिर की प्रशासनिक व्यवस्था को मजबूत करने के लिए नई प्रणाली लागू की जाएगी, जिससे कामकाज अधिक सुचारु तरीके से चल सके।उन्होंने कहा कि श्री राम मंदिर करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र है, इसलिए यहां की हर व्यवस्था में पारदर्शिता और जवाबदेही होना आवश्यक है। ट्रस्ट का उद्देश्य है कि मंदिर से जुड़े सभी कार्य बेहतर तरीके से संचालित हों और श्रद्धालुओं को किसी तरह की असुविधा का सामना न करना पड़े।
दान और आय को लेकर दी जानकारी
ट्रस्ट की आय और दान से जुड़े सवालों पर स्वामी गोविंद देव गिरि ने बताया कि मंदिर निर्माण शुरू होने के बाद से अब तक ट्रस्ट को लगभग 3,200 करोड़ रुपये की आय प्राप्त हुई है। उन्होंने कहा कि मंदिर निर्माण, व्यवस्थाओं और अन्य आवश्यक कार्यों में खर्च करने के बाद भी ट्रस्ट के पास करीब 1,800 करोड़ रुपये की राशि शेष है।उन्होंने कहा कि दान को लेकर जो भी भ्रम या गलतफहमियां सामने आई थीं, उन्हें दूर करने के प्रयास किए जा रहे हैं। ट्रस्ट की ओर से वित्तीय मामलों में पूरी पारदर्शिता बनाए रखने पर जोर दिया जा रहा है।
विवादों के बाद स्थिति स्पष्ट करने की कोशिश
स्वामी गोविंद देव गिरि ने कहा कि हाल की घटनाओं के कारण लोगों के बीच कुछ भ्रम की स्थिति बनी थी। हालांकि अब उसे दूर करने के लिए आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं। उन्होंने विश्वास जताया कि जल्द ही पूरी स्थिति स्पष्ट हो जाएगी और ट्रस्ट पहले की तरह बेहतर तरीके से कार्य करेगा।उन्होंने कहा कि राम मंदिर केवल एक धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि करोड़ों लोगों की भावनाओं से जुड़ा विषय है। इसलिए इसकी व्यवस्था में किसी भी तरह की कमी को दूर करना ट्रस्ट की प्राथमिक जिम्मेदारी है।
इस्तीफे से ज्यादा जरूरी व्यवस्था में सुधार
ट्रस्ट की बैठक में चंपत राय और अनिल मिश्रा के इस्तीफे मंजूर किए जाने को लेकर पूछे गए सवाल पर स्वामी गोविंद देव गिरि ने कहा कि मामला केवल पद छोड़ने तक सीमित नहीं है। उन्होंने कहा कि किसी भी संस्था को मजबूत बनाने के लिए उसकी कार्यप्रणाली में सुधार जरूरी होता है।उन्होंने दोहराया कि ट्रस्ट का लक्ष्य ऐसी व्यवस्था तैयार करना है, जिसमें भविष्य में कामकाज अधिक व्यवस्थित, पारदर्शी और प्रभावी तरीके से हो सके। आने वाले समय में नई प्रणाली के लागू होने के बाद मंदिर प्रशासन को और मजबूती मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।





