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उत्तर प्रदेश
माघ मेले में स्वदेशी का जलवा, स्थानीय हस्तशिल्पियों को मिला नया बाजार
SHIDDHANT
4 Feb 2026 8:32 PM IST

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Prayagraj प्रयागराज। उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में आयोजित माघ मेले में ‘वोकल फॉर लोकल’ पहल का असर साफ तौर पर देखने को मिल रहा है। मेले में स्थानीय हस्तशिल्पियों और स्व-सहायता समूहों द्वारा तैयार किए गए उत्पादों को न केवल प्रदर्शनी का प्रमुख स्थान दिया गया है, बल्कि श्रद्धालुओं और पर्यटकों से भी इन्हें जबरदस्त सराहना मिल रही है।
ग्रामीण कारीगरों द्वारा निर्मित हस्तशिल्प, खादी उत्पाद, मिट्टी के बर्तन और अन्य स्वदेशी सामान लोगों को खासा आकर्षित कर रहे हैं। इस पहल से जहां आत्मनिर्भर भारत की सोच को मजबूती मिल रही है, वहीं पारंपरिक उद्योगों और स्थानीय कारीगरों की आजीविका को भी नया संबल मिल रहा है।
मेले में खरीदारी के लिए पहुंचे श्रद्धालुओं का कहना है कि स्थानीय हस्तशिल्प से बने उत्पाद न केवल गुणवत्ता में बेहतर हैं, बल्कि उनमें भारतीय संस्कृति और परंपरा की झलक भी साफ दिखाई देती है। बड़ी संख्या में लोग विदेशी सामान की बजाय स्वदेशी उत्पादों को प्राथमिकता दे रहे हैं। वहीं दुकानदारों का मानना है कि मौजूदा सरकार की नीतियों और ‘वोकल फॉर लोकल’ जैसी पहलों के कारण हस्तशिल्पियों को व्यापक स्तर पर प्रोत्साहन मिला है, जिसका सीधा लाभ उन्हें माघ मेले में मिल रहा है।
मेले में दुकान लगाने वाली महिला दुकानदार रुकसाना ने समाचार एजेंसी आईएएनएस से बातचीत में बताया कि इस बार कारोबार काफी अच्छा चल रहा है और आमदनी भी पहले के मुकाबले बेहतर हुई है। उन्होंने कहा कि लोगों को स्थानीय हस्तशिल्प के उत्पाद बहुत पसंद आ रहे हैं। रुकसाना के मुताबिक, सरकार की ‘एक जिला-एक उत्पाद’ योजना के चलते भी लोगों में अपने क्षेत्र के उत्पादों के प्रति जागरूकता बढ़ी है और ग्राहक स्वदेशी सामान खरीदने के लिए आगे आ रहे हैं।
वहीं मेले में खरीदारी करने आए ग्राहक हिमांशु तिवारी ने बताया कि यहां उपलब्ध अधिकांश सामान उच्च गुणवत्ता वाले हैं। उन्होंने कहा कि विदेशी उत्पाद खरीदने की बजाय देश में बने सामान को अपनाना ज्यादा बेहतर है। हिमांशु के अनुसार, सरकार द्वारा ‘वोकल फॉर लोकल’ को बढ़ावा दिए जाने से स्थानीय कलाकारों और कारीगरों को सीधा फायदा मिल रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि इस बार माघ मेले में दुकानों की संख्या में बढ़ोतरी हुई है, जिससे खरीदारों को ज्यादा विकल्प मिल रहे हैं और स्थानीय उत्पादों को नया बाजार भी मिल रहा है।
प्रयागराज का माघ मेला न सिर्फ धार्मिक और सांस्कृतिक आस्था का केंद्र बना हुआ है, बल्कि यह स्थानीय उद्योगों, हस्तशिल्पियों और स्व-सहायता समूहों के लिए भी एक मजबूत मंच साबित हो रहा है, जहां स्वदेशी उत्पादों को पहचान और सम्मान दोनों मिल रहे हैं।
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