उत्तर प्रदेश

UP में सीट शेयरिंग पर सस्पेंस आराधना मिश्रा ने साफ किया रुख

Ratna Netam
3 Oct 2026 8:40 PM IST
UP में सीट शेयरिंग पर सस्पेंस आराधना मिश्रा ने साफ किया रुख
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लखनऊ। उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 की तैयारियां तेज होने के साथ ही कांग्रेस और समाजवादी पार्टी के बीच सीट बंटवारे को लेकर राजनीतिक चर्चा बढ़ गई है। इसी बीच उत्तर प्रदेश कांग्रेस की नई अध्यक्ष आराधना मिश्रा ‘मोना’ ने साफ किया है कि गठबंधन में सीटों की संख्या को लेकर अंतिम फैसला राज्य स्तर पर नहीं, बल्कि ‘इंडिया’ गठबंधन में शामिल दलों का शीर्ष नेतृत्व करेगा। उन्होंने यह भी कहा कि कांग्रेस का फिलहाल पूरा ध्यान प्रदेश में अपने संगठन को मजबूत करने पर है।आराधना मिश्रा को हाल ही में उत्तर प्रदेश कांग्रेस कमेटी की कमान सौंपी गई है। वह अजय राय की जगह प्रदेश अध्यक्ष बनी हैं। रामपुर खास से तीन बार की विधायक आराधना मिश्रा के सामने 2027 विधानसभा चुनाव से पहले पार्टी संगठन को मजबूत करने के साथ समाजवादी पार्टी के साथ चुनावी तालमेल को आगे बढ़ाने की भी चुनौती है।मीडिया से बातचीत में आराधना मिश्रा ने सीट शेयरिंग को लेकर कहा कि गठबंधन में कितनी सीटों पर कौन-सी पार्टी चुनाव लड़ेगी, इस पर अंतिम फैसला कांग्रेस और गठबंधन सहयोगियों का शीर्ष नेतृत्व करेगा। उन्होंने संकेत दिया कि प्रदेश स्तर पर संगठन अपनी तैयारी जारी रखेगा, जबकि सीटों की संख्या और समझौते से जुड़े बड़े फैसले उचित समय पर केंद्रीय नेतृत्व की बातचीत के बाद सामने आएंगे।
403 सीटों पर संगठन मजबूत करने की तैयारी
कांग्रेस की नई प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि पार्टी उत्तर प्रदेश की सभी 403 विधानसभा सीटों पर अपने संगठन को मजबूत करने की दिशा में काम करेगी। उनका कहना है कि मजबूत संगठन का फायदा केवल कांग्रेस को ही नहीं, बल्कि गठबंधन को भी मिलेगा।कांग्रेस की रणनीति बूथ और विधानसभा स्तर तक संगठन को सक्रिय करने की है। पार्टी चुनाव से पहले अपने स्थानीय नेताओं और कार्यकर्ताओं के नेटवर्क को मजबूत करने पर जोर दे रही है। आराधना मिश्रा के मुताबिक, जमीनी स्तर पर मजबूत संगठन चुनाव में समर्थन को वोट में बदलने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
2024 के लोकसभा चुनाव का दिया उदाहरण
आराधना मिश्रा ने 2024 के लोकसभा चुनाव का भी जिक्र किया। उस चुनाव में उत्तर प्रदेश में कांग्रेस और समाजवादी पार्टी ने गठबंधन के तहत चुनाव लड़ा था। कांग्रेस ने 17 लोकसभा सीटों पर उम्मीदवार उतारे थे और छह सीटों पर जीत हासिल की थी।उन्होंने कहा कि पिछले लोकसभा चुनाव में गठबंधन की घोषणा चुनाव से कुछ समय पहले हुई थी। इसके बावजूद कांग्रेस और समाजवादी पार्टी के कार्यकर्ताओं ने एक-दूसरे के उम्मीदवारों के लिए काम किया। अब विधानसभा चुनाव के लिए संगठन को पहले से मजबूत करने पर जोर दिया जा रहा है।कांग्रेस और समाजवादी पार्टी दोनों के लिए उत्तर प्रदेश का चुनाव बेहद महत्वपूर्ण है। 403 विधानसभा सीटों वाले राज्य में किसी भी गठबंधन के लिए सीटों का बंटवारा सबसे अहम मुद्दों में से एक होगा।
सीटों की संख्या को लेकर चर्चा तेज
2027 विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस की ओर से सीटों की संख्या को लेकर अलग-अलग बयान सामने आए हैं। हाल में उत्तर प्रदेश कांग्रेस प्रभारी राजेंद्र पाल गौतम ने कहा था कि कांग्रेस गठबंधन में 150 से कम सीटों पर चुनाव नहीं लड़ना चाहती। हालांकि सीटों की अंतिम संख्या को लेकर अभी दोनों दलों की ओर से कोई संयुक्त आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है।इसी पृष्ठभूमि में आराधना मिश्रा का बयान महत्वपूर्ण माना जा रहा है। उन्होंने सीटों की किसी निश्चित संख्या को लेकर खुद कोई अंतिम दावा करने के बजाय फैसला शीर्ष नेतृत्व पर छोड़ने की बात कही है।इससे साफ है कि फिलहाल कांग्रेस का प्रदेश संगठन चुनावी तैयारी और पार्टी की जमीनी स्थिति का आकलन करने में जुटा है। सीट शेयरिंग का औपचारिक फॉर्मूला कांग्रेस और समाजवादी पार्टी के शीर्ष नेताओं के बीच बातचीत के बाद ही सामने आने की संभावना है।
सपा के साथ गठबंधन मजबूत करने पर जोर
आराधना मिश्रा ने समाजवादी पार्टी के साथ गठबंधन को मजबूत करने की बात भी कही है। कांग्रेस की नई प्रदेश अध्यक्ष के सामने यह जिम्मेदारी भी होगी कि दोनों पार्टियों के राज्य स्तरीय नेताओं और कार्यकर्ताओं के बीच बेहतर समन्वय बनाया जाए।लोकसभा चुनाव में दोनों दल साथ आए थे। अब विधानसभा चुनाव में गठबंधन किस स्वरूप में आगे बढ़ेगा और दोनों पार्टियों के हिस्से में कितनी सीटें आएंगी, यह आने वाले महीनों में स्पष्ट होगा।समाजवादी पार्टी उत्तर प्रदेश में विपक्ष की सबसे बड़ी पार्टी है, जबकि कांग्रेस पिछले कुछ वर्षों से प्रदेश में अपना संगठन दोबारा मजबूत करने की कोशिश कर रही है। ऐसे में दोनों दलों के बीच सीट शेयरिंग की बातचीत राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण रहने वाली है।
यूपी कांग्रेस में बड़ा संगठनात्मक बदलाव
विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस ने उत्तर प्रदेश संगठन में भी महत्वपूर्ण बदलाव किए हैं। आराधना मिश्रा को प्रदेश अध्यक्ष बनाने के साथ सहारनपुर से सांसद इमरान मसूद को कार्यकारी अध्यक्ष की जिम्मेदारी दी गई है। इसके अलावा देवेंद्र निषाद और आलोक प्रसाद को वरिष्ठ उपाध्यक्ष बनाया गया है।वहीं आराधना मिश्रा की जगह चौधरी वीरेंद्र सिंह को कांग्रेस विधायक दल का नेता नियुक्त किया गया है। पार्टी इन नियुक्तियों के जरिए प्रदेश संगठन में अलग-अलग क्षेत्रों और सामाजिक समूहों का प्रतिनिधित्व बढ़ाने की कोशिश कर रही है।आराधना मिश्रा रामपुर खास विधानसभा सीट से तीन बार विधायक चुनी जा चुकी हैं। प्रदेश अध्यक्ष बनने से पहले वह उत्तर प्रदेश विधानसभा में कांग्रेस विधायक दल की नेता थीं।
आने वाले महीनों में तेज होगी सियासी हलचल
उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 नजदीक आने के साथ कांग्रेस और समाजवादी पार्टी के बीच सीट शेयरिंग सबसे महत्वपूर्ण राजनीतिक मुद्दों में शामिल रहेगा। दोनों पार्टियों के शीर्ष नेतृत्व के बीच होने वाली बातचीत के बाद ही यह तय होगा कि कौन कितनी सीटों पर चुनाव लड़ेगा।फिलहाल आराधना मिश्रा ने यह संदेश दिया है कि प्रदेश कांग्रेस सभी 403 विधानसभा क्षेत्रों में संगठन मजबूत करने की तैयारी करेगी और सीटों के बंटवारे का अंतिम फैसला शीर्ष नेतृत्व पर छोड़ा जाएगा।ऐसे में आने वाले महीनों में कांग्रेस और समाजवादी पार्टी के बीच बैठकों का दौर तेज हो सकता है। सीटों की संख्या, उम्मीदवारों की स्थिति और पिछले चुनावों के प्रदर्शन जैसे मुद्दे बातचीत का हिस्सा बन सकते हैं। अंतिम फॉर्मूला क्या होगा, इस पर अभी आधिकारिक फैसला सामने नहीं आया है।
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