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उत्तर प्रदेश
मुरिशदाबाद में निलंबित TMC विधायक हमायूं कबीर का बड़ा आरोप
SHIDDHANT
12 Dec 2025 9:48 PM IST

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West Bengal पश्चिम बंगाल: राजनीति में शुक्रवार को नया विवाद शुरू हो गया, जब तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के निलंबित विधायक हमायूं कबीर ने ममता बनर्जी सरकार पर गंभीर आरोप लगाए। मुरिशदाबाद में पत्रकारों से बातचीत करते हुए कबीर ने दावा किया कि ममता बनर्जी के सत्ता में आने के बाद जगन्नाथ मंदिर परिसर का पूरा नियंत्रण सरकार ने अपने हाथ में ले लिया। उन्होंने कहा कि मंदिर के निर्माण पर लगभग 400 करोड़ रुपये सरकारी खजाने से खर्च किए गए, जो जनता के टैक्स का पैसा है। कबीर ने आरोप लगाया कि धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व वाले इस मंदिर पर सरकार का “सीधा कब्ज़ा” है, जो पूरी तरह गलत है। उन्होंने कहा कि मंदिर ट्रस्ट या धार्मिक संस्थान के बजाय अब सरकारी तंत्र के अधीन हो गया है। इससे न केवल पारंपरिक व्यवस्था प्रभावित हुई है बल्कि धार्मिक स्थलों के सरकारीकरण को बढ़ावा मिला है।
उन्होंने आगे कहा कि सिर्फ यही नहीं, राज्य सरकार ने सिलिगुड़ी में भी एक और ऐसी जमीन मंदिर निर्माण के लिए आवंटित की, जिस पर पारदर्शिता को लेकर कई सवाल उठ रहे हैं। कबीर के अनुसार, यह तय नहीं है कि सिलिगुड़ी की साइट धार्मिक संस्थान को दी गई या किसी सरकारी प्रोजेक्ट के तहत इस्तेमाल की जा रही है। निलंबित विधायक ने कहा कि 400 करोड़ रुपये का खर्च बहुत बड़ा मुद्दा है, क्योंकि यह धन सार्वजनिक विकास, स्वास्थ्य, रोजगार और शिक्षा जैसे क्षेत्रों में लगाया जा सकता था। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ने जनता की प्राथमिक जरूरतों को नज़रअंदाज़ कर धार्मिक राजनीति को बढ़ावा दिया है।
कबीर के इन आरोपों को विपक्षी दलों ने तुरंत हाथों-हाथ लिया। बीजेपी ने कहा कि यह बयान साबित करता है कि ममता सरकार “धार्मिक भावनाओं का राजनीतिक लाभ” उठाने में लगी है और सार्वजनिक धन के उपयोग में पारदर्शिता नहीं है। कांग्रेस और वाम मोर्चा ने भी मामले की न्यायिक जांच की मांग की है। उधर टीएमसी नेताओं ने कबीर के आरोपों को निराधार, राजनीतिक और व्यक्तिगत नाराजगी से प्रेरित बताया है। पार्टी का कहना है कि कबीर पहले से ही अनुशासनहीनता और पार्टी विरोधी गतिविधियों के कारण निलंबित हैं और अब वे सरकार की छवि खराब करने की कोशिश कर रहे हैं। टीएमसी की दलील है कि जगन्नाथ मंदिर प्रोजेक्ट पर्यटन को बढ़ावा देने, स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूत करने और धार्मिक-सांस्कृतिक संरक्षण के उद्देश्य से किया गया था।
विशेषज्ञों का कहना है कि पश्चिम बंगाल में धार्मिक स्थलों पर सरकारी निवेश नया नहीं है, लेकिन 400 करोड़ रुपये की राशि अभूतपूर्व है, जिससे विवाद और बढ़ गया है। कबीर के बयान से राज्य की राजनीति में नई हलचल मच गई है। आने वाले दिनों में सरकार इस पर क्या स्पष्टीकरण देती है और विपक्ष इसे कितना बड़ा मुद्दा बनाता है, इस पर सभी की नज़रें टिकी रहेंगी।
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