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सस्पेंड सिपाही कर रहा सपा से टिकट की दावेदारी, SSP ने दिए जांच के आदेश

गोरखपुर। उत्तर प्रदेश के गोरखपुर से पुलिस विभाग से जुड़ा एक अजीब मामला सामने आया है। डायल-112 में तैनात रहा एक सिपाही लंबे समय से ड्यूटी से गैरहाजिर रहने के बीच राजनीति में सक्रिय नजर आ रहा है। बताया जा रहा है कि सिपाही संतकबीर नगर जिले की धनघटा विधानसभा सीट से समाजवादी पार्टी के टिकट पर चुनाव लड़ने की दावेदारी कर रहा है। दूसरी तरफ वह करीब तीन महीने से पुलिस विभाग से निलंबित है और निलंबन के बाद भी पुलिस लाइन में अपनी उपस्थिति दर्ज कराने नहीं पहुंचा है।
मामला सामने आने के बाद गोरखपुर के एसएसपी डॉ. कौस्तुभ ने जांच के आदेश दिए हैं। अब पुलिस विभाग यह पता लगाने में जुटा है कि निलंबित सिपाही की राजनीतिक गतिविधियों में सक्रियता किस स्तर तक है और सेवा में रहते हुए उसके द्वारा की जा रही गतिविधियां विभागीय नियमों के अनुरूप हैं या नहीं। जांच रिपोर्ट के आधार पर आगे की विभागीय कार्रवाई की जा सकती है।
सिपाही पहले डायल-112 में तैनात था। बताया जा रहा है कि वह लंबे समय से अपनी ड्यूटी से अनुपस्थित चल रहा था। लगातार गैरहाजिरी के कारण पुलिस विभाग की ओर से उसके खिलाफ कार्रवाई की गई और करीब तीन महीने पहले उसे निलंबित कर दिया गया। निलंबन के बाद उसे पुलिस लाइन में हाजिर होना था, लेकिन बताया जा रहा है कि उसने अब तक वहां अपनी उपस्थिति दर्ज नहीं कराई।
इसी बीच सिपाही की राजनीतिक गतिविधियों में सक्रियता सामने आने से मामला और गंभीर हो गया। आरोप है कि वह समाजवादी पार्टी के विभिन्न कार्यक्रमों में शामिल हो रहा है। पार्टी के कार्यक्रमों में मंच पर पहुंचकर लोगों को संबोधित करने की बात भी सामने आई है। इसके अलावा सोशल मीडिया पर भी उसकी राजनीतिक गतिविधियों से जुड़े कई पोस्ट सामने आए हैं।
सोशल मीडिया पर सिपाही की ओर से समाजवादी पार्टी के नेताओं के स्वागत और पार्टी से संबंधित गतिविधियों को लेकर पोस्ट किए जाने की बात सामने आई है। इन गतिविधियों के बाद पुलिस विभाग में सवाल उठने लगे कि एक सरकारी कर्मचारी और पुलिसकर्मी रहते हुए वह किसी राजनीतिक दल के कार्यक्रमों में इस तरह सक्रिय भूमिका कैसे निभा रहा है।
मामले का एक और महत्वपूर्ण पहलू संतकबीर नगर की धनघटा विधानसभा सीट से टिकट की दावेदारी है। बताया जा रहा है कि सिपाही इस सीट से समाजवादी पार्टी का टिकट हासिल करने की कोशिश में है। इसके लिए वह क्षेत्र में अपनी राजनीतिक सक्रियता बढ़ा रहा है और पार्टी के कार्यक्रमों में शामिल हो रहा है।
पुलिस विभाग की नौकरी में रहते हुए राजनीतिक गतिविधियों में सक्रिय भागीदारी को लेकर सेवा नियमों का पालन आवश्यक होता है। ऐसे में सिपाही की गतिविधियों की जानकारी वरिष्ठ अधिकारियों तक पहुंचने के बाद पूरे मामले की जांच कराने का फैसला लिया गया है। जांच में उसके सोशल मीडिया अकाउंट, राजनीतिक कार्यक्रमों में भागीदारी और ड्यूटी से अनुपस्थिति सहित अन्य पहलुओं को देखा जा सकता है।
गोरखपुर के एसएसपी डॉ. कौस्तुभ ने मामले को गंभीरता से लेते हुए जांच के आदेश दिए हैं। जांच में यह पता लगाया जाएगा कि सिपाही कितने समय से ड्यूटी से अनुपस्थित है, उसके निलंबन के बाद विभाग की ओर से क्या निर्देश दिए गए थे और उसने उन निर्देशों का पालन किया या नहीं। इसके साथ उसकी राजनीतिक गतिविधियों से संबंधित तथ्यों की भी पड़ताल की जाएगी।
सिपाही के निलंबित होने के बावजूद पुलिस लाइन में हाजिर नहीं होने का मामला भी विभागीय स्तर पर महत्वपूर्ण माना जा रहा है। निलंबन के दौरान पुलिसकर्मी को निर्धारित नियमों और अधिकारियों के निर्देशों का पालन करना होता है। ऐसे में लंबे समय तक हाजिर नहीं होने के पीछे क्या कारण रहा, इसकी जानकारी भी जांच के दौरान जुटाई जाएगी।
वहीं सोशल मीडिया पर सामने आए पोस्ट भी जांच के दायरे में आ सकते हैं। इनमें समाजवादी पार्टी के नेताओं के स्वागत, पार्टी के कार्यक्रमों और अन्य राजनीतिक गतिविधियों से संबंधित सामग्री होने की बात कही जा रही है। पुलिस अधिकारी यह पता लगाएंगे कि ये पोस्ट कब किए गए और उस समय सिपाही की विभागीय स्थिति क्या थी।
मंच से संबोधन करने की बात सामने आने के बाद भी मामले ने अधिकारियों का ध्यान खींचा है। यदि जांच में राजनीतिक कार्यक्रमों में सक्रिय भागीदारी की पुष्टि होती है तो विभाग सेवा नियमों के आधार पर आगे का निर्णय ले सकता है। हालांकि जांच पूरी होने से पहले सिपाही के खिलाफ सामने आए दावों पर अंतिम निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा।
संतकबीर नगर की धनघटा विधानसभा सीट से सपा के टिकट की दावेदारी की चर्चा के कारण यह मामला राजनीतिक हलकों में भी चर्चा का विषय बन गया है। एक तरफ सिपाही पुलिस विभाग से निलंबित चल रहा है और दूसरी तरफ उसके विधानसभा चुनाव की तैयारी में जुटे होने की बात सामने आ रही है।
फिलहाल एसएसपी के आदेश के बाद पूरे मामले की जांच शुरू होने की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी। जांच रिपोर्ट में ड्यूटी से अनुपस्थिति, निलंबन के बाद पुलिस लाइन में हाजिर नहीं होने और राजनीतिक कार्यक्रमों में सक्रियता से जुड़े तथ्यों को देखा जाएगा। इसके बाद पुलिस विभाग तय करेगा कि सिपाही के खिलाफ आगे क्या विभागीय कार्रवाई की जाए।
इस पूरे मामले में अब जांच रिपोर्ट महत्वपूर्ण होगी। रिपोर्ट से साफ होगा कि सिपाही की राजनीतिक गतिविधियों से जुड़े दावों में कितनी सच्चाई है और उसने पुलिस सेवा से संबंधित नियमों का उल्लंघन किया है या नहीं। फिलहाल करीब तीन महीने से निलंबित सिपाही की सपा के कार्यक्रमों में सक्रियता और धनघटा विधानसभा सीट से टिकट की दावेदारी ने पुलिस विभाग में हलचल बढ़ा दी है।





