उत्तर प्रदेश

पेट दर्द के हर मामले में सर्जरी जरूरी नहीं पशु चिकित्सक की जांच अहम

nidhi
1 Nov 2026 9:16 AM IST
पेट दर्द के हर मामले में सर्जरी जरूरी नहीं पशु चिकित्सक की जांच अहम
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आंत में रक्त प्रवाह रुकना घोड़े के लिए जानलेवा

मेरठ : घोड़ों में अचानक पेट दर्द की समस्या को सामान्य गैस समझकर नजरअंदाज करना खतरनाक हो सकता है। कुछ मामलों में मामूली उपचार से राहत मिल जाती है, जबकि अन्य स्थितियों में तत्काल अस्पताल पहुंचाना और सर्जरी करना जरूरी होता है। विशेष रूप से आंत के मुड़ने या फंसने से उसका रक्त प्रवाह बाधित हो जाए तो स्थिति जानलेवा बन सकती है। इसलिए पेट दर्द के संकेत दिखने पर पशु चिकित्सक से तुरंत संपर्क करना जरूरी है। शुरुआती जांच से तय किया जा सकता है कि घोड़े का उपचार वहीं संभव है या उसे विशेषज्ञ अस्पताल भेजना चाहिए।

घोड़ों में पेट दर्द के लिए इस्तेमाल होने वाला शब्द ‘कोलिक’ अपने आप में किसी एक बीमारी का नाम नहीं है। यह पेट में दर्द का संकेत है, जिसके पीछे कई अलग-अलग कारण हो सकते हैं। अक्सर इसका संबंध पाचन तंत्र से होता है, लेकिन दूसरे अंगों की समस्याएं भी ऐसे लक्षण पैदा कर सकती हैं। इसी वजह से केवल बाहरी व्यवहार देखकर बीमारी की गंभीरता तय करना मुश्किल है। ब्रिटेन के रॉयल वेटरनरी कॉलेज की जानकारी के अनुसार, शुरुआती अवस्था में लक्षणों की तीव्रता हमेशा अंदर की समस्या की गंभीरता नहीं बताती।
कोलिक होने पर घोड़ा बेचैन हो सकता है, जमीन कुरेद सकता है या बार-बार अपने पेट की ओर देख सकता है। पेट पर पैर मारना, बार-बार उठना और लेटना, जमीन पर लोटना तथा खाने में रुचि कम होना भी संकेत हो सकते हैं। बिना व्यायाम या गर्मी के पसीना आना और सामान्य से कम मल त्याग होना भी ध्यान देने योग्य है। किसी घोड़े में इनमें से एक लक्षण दिख सकता है तो किसी में कई संकेत एक साथ नजर आ सकते हैं। ऐसे बदलावों की जानकारी तुरंत पशु चिकित्सक को दें। सबसे गंभीर स्थितियों में आंत का हिस्सा इस तरह मुड़ या फंस सकता है कि उसमें खून का प्रवाह बाधित हो जाए। पर्याप्त रक्त और ऑक्सीजन नहीं मिलने से ऊतक क्षतिग्रस्त हो सकते हैं। मर्क वेटरनरी मैनुअल के अनुसार, आंत की रुकावट के साथ रक्त आपूर्ति प्रभावित होने वाले मामलों में शीघ्र सर्जरी आवश्यक हो सकती है। इलाज का फैसला केवल दर्द की तीव्रता के आधार पर नहीं लिया जाता। कभी-कभी हल्के या मध्यम दर्द वाले घोड़े को भी ऑपरेशन की जरूरत पड़ सकती है। इसके लिए विस्तृत चिकित्सकीय मूल्यांकन जरूरी है।
यहां ‘60 से 90 मिनट’ को हर घोड़े और हर प्रकार के कोलिक पर लागू होने वाली निश्चित समयसीमा समझना सही नहीं होगा। उपलब्ध प्रामाणिक स्रोत तत्काल जांच और जरूरत पड़ने पर जल्दी रेफरल की अहमियत बताते हैं, लेकिन ऐसी सार्वभौमिक सीमा निर्धारित नहीं करते। इसलिए लक्षण दिखने के बाद एक घंटे या डेढ़ घंटे तक इंतजार करने का निर्णय स्वयं न लें। अस्पताल भेजने की जरूरत है या नहीं, इसका फैसला पशु चिकित्सक को करने दें। उपचार में समय महत्वपूर्ण है, पर वास्तविक स्थिति हर मामले में अलग हो सकती है।
जांच के दौरान पशु चिकित्सक घोड़े की शारीरिक स्थिति का आकलन कर सकते हैं। जरूरत के अनुसार अल्ट्रासाउंड, खून की जांच, मलाशय के रास्ते परीक्षण या पेट के द्रव की जांच की जा सकती है। कुछ मामलों में नली के माध्यम से पेट की स्थिति जांची जाती है। इन तरीकों से यह समझने में मदद मिलती है कि समस्या दवाओं और तरल उपचार से नियंत्रित होगी या सर्जरी की आवश्यकता है। आंत के मुड़ने से रक्त प्रवाह बाधित होने जैसी स्थिति को सर्जिकल इमरजेंसी माना जाता है। यदि ऑपरेशन के दौरान आंत का कोई हिस्सा मृत या स्थायी रूप से क्षतिग्रस्त मिले तो उसे हटाना पड़ सकता है। अमेरिकन कॉलेज ऑफ वेटरनरी सर्जन्स के अनुसार, ऐसी सर्जरी का उद्देश्य प्रभावित हिस्से को हटाकर स्वस्थ आंत को दोबारा जोड़ना है। हालांकि, बहुत व्यापक नुकसान होने पर उपचार की संभावनाएं सीमित हो सकती हैं। परिणाम मूल बीमारी, सर्जरी से पहले घोड़े की स्थिति, हटाई गई आंत की मात्रा और बाद की जटिलताओं पर निर्भर करता है। इसलिए किसी भी मामले में जान बचने की गारंटी या एक समान नतीजे का दावा उचित नहीं है।
सर्जरी के बाद निगरानी और देखभाल भी महत्वपूर्ण होती है। घोड़े को अस्पताल में तरल उपचार, दर्द नियंत्रण और अन्य आवश्यक चिकित्सा दी जा सकती है। आंतों की गतिविधि लौटने पर आहार धीरे-धीरे शुरू किया जाता है। इसके बाद आराम और सामान्य गतिविधियों में वापसी की योजना चिकित्सक तय करते हैं। कोलिक के कुछ जोखिम कम करने के लिए नियमित आहार व्यवस्था, पर्याप्त रेशेदार चारा और पशु चिकित्सक की सलाह के अनुसार परजीवी नियंत्रण उपयोगी हैं। इसके बावजूद पेट दर्द होने पर घरेलू अनुमान के बजाय तत्काल विशेषज्ञ सलाह लेना जरूरी है।

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