- Home
- /
- राज्य
- /
- उत्तर प्रदेश
- /
- सुप्रीम कोर्ट की हरी...

लखनऊ। उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में प्रस्तावित कुकरैल नाइट सफारी प्रोजेक्ट को सुप्रीम कोर्ट से हरी झंडी मिल गई है। इसके साथ ही लंबे समय से अटके इस महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट के निर्माण का रास्ता साफ हो गया है। प्रदेश सरकार अब जल्द ही इसके निर्माण कार्य को शुरू करने की तैयारी में जुट गई है। करीब 1510 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाली यह नाइट सफारी भारत की पहली और दुनिया की पांचवीं नाइट सफारी होगी।
कुकरैल क्षेत्र आरक्षित वन क्षेत्र में आता है, इसलिए यहां किसी भी बड़े निर्माण कार्य के लिए सुप्रीम कोर्ट की अनुमति जरूरी थी। इसी वजह से इस परियोजना की मंजूरी प्रक्रिया लंबे समय से चल रही थी। अब सुप्रीम कोर्ट की स्वीकृति मिलने के बाद प्रदेश सरकार को बड़ी राहत मिली है। सरकार केंद्रीय अधिकार प्राप्त समिति (सीईसी) की सिफारिशों के अनुसार ही इस परियोजना को आगे बढ़ाएगी।
दो साल में पूरा होगा निर्माण कार्य
कुकरैल नाइट सफारी के निर्माण में करीब दो साल का समय लगने का अनुमान है। परियोजना के पूरा होने के बाद यह लखनऊ के पर्यटन क्षेत्र को नई पहचान देगी। सरकार का उद्देश्य है कि इस नाइट सफारी के जरिए पर्यटकों को वन्यजीवों को रात के समय उनके प्राकृतिक वातावरण में देखने का अनोखा अनुभव मिल सके।
नाइट सफारी में आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल किया जाएगा। यहां पर्यटकों के लिए विशेष सफारी रूट, वन्यजीवों के अवलोकन की सुविधा, पर्यावरण अनुकूल व्यवस्थाएं और अन्य पर्यटन सुविधाएं विकसित की जाएंगी।
दुनिया में केवल चार जगह मौजूद हैं नाइट सफारी
कुकरैल नाइट सफारी बनने के बाद भारत उन चुनिंदा देशों की सूची में शामिल हो जाएगा, जहां ऐसी सुविधा मौजूद है। वर्तमान में दुनिया में सिंगापुर, थाईलैंड, चीन और इंडोनेशिया में नाइट सफारी संचालित हैं। लखनऊ की नाइट सफारी देश में अपनी तरह की पहली परियोजना होगी।
पर्यटन को मिलेगा बढ़ावा
प्रदेश सरकार का मानना है कि कुकरैल नाइट सफारी से उत्तर प्रदेश में पर्यटन को बड़ा फायदा मिलेगा। लखनऊ पहले से ही ऐतिहासिक इमारतों, संस्कृति और खानपान के लिए प्रसिद्ध है। नाइट सफारी शुरू होने के बाद देश-विदेश से आने वाले पर्यटकों की संख्या में बढ़ोतरी की उम्मीद है।
इसके अलावा इस परियोजना से स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर भी पैदा होंगे। सफारी संचालन, पर्यटन सेवाओं, होटल और अन्य क्षेत्रों में नई संभावनाएं विकसित हो सकती हैं।
पर्यावरण संरक्षण का रखा जाएगा ध्यान
कुकरैल आरक्षित वन क्षेत्र होने के कारण परियोजना में पर्यावरण संरक्षण को प्राथमिकता दी जाएगी। सरकार को निर्देश दिए गए हैं कि निर्माण कार्य के दौरान वन क्षेत्र और जैव विविधता को नुकसान न पहुंचे। इसी को ध्यान में रखते हुए परियोजना की योजना तैयार की गई है।
सुप्रीम कोर्ट की मंजूरी के बाद अब कुकरैल नाइट सफारी के निर्माण की प्रक्रिया तेज होने की उम्मीद है। आने वाले समय में यह परियोजना लखनऊ को देश के प्रमुख पर्यटन केंद्रों में शामिल करने में अहम भूमिका निभा सकती है।





