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संभल मामले में सुप्रीम कोर्ट सख्त, यूपी सरकार पर 10 लाख का जुर्माना

नई दिल्ली। संभल हिंसा मामले में उत्तर प्रदेश सरकार को सुप्रीम कोर्ट से बड़ा झटका लगा है। शीर्ष अदालत ने आरोपी मुल्ला अफरोज की राष्ट्रीय सुरक्षा कानून यानी NSA के तहत की गई हिरासत को रद्द कर दिया। इसके साथ ही इलाहाबाद हाई कोर्ट के उस आदेश को भी निरस्त कर दिया गया, जिसमें उसकी हिरासत को सही ठहराया गया था।
सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में उत्तर प्रदेश सरकार पर 10 लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया है। अदालत ने कहा कि किसी आरोपी को केवल हिरासत के दौरान दिए गए कथित कबूलनामे के आधार पर एहतियाती हिरासत में नहीं रखा जा सकता।
मामला नवंबर 2024 में संभल की शाही जामा मस्जिद के सर्वे के दौरान हुई हिंसा से जुड़ा है। मुल्ला अफरोज पर आरोप है कि उसने हिंसा के दौरान भीड़ जुटाने और हथियार उपलब्ध कराने में भूमिका निभाई। उसे मामले का प्रमुख आरोपी बताया गया था।
बाद में 16 अक्टूबर 2025 को मुल्ला अफरोज के खिलाफ राष्ट्रीय सुरक्षा कानून के तहत कार्रवाई की गई और उसे हिरासत में रखा गया। इस हिरासत को चुनौती दिए जाने के बाद मामला पहले इलाहाबाद हाई कोर्ट और फिर सुप्रीम कोर्ट पहुंचा।
सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के दौरान प्रिवेंटिव डिटेंशन के आधारों की समीक्षा की और पाया कि हिरासत का आदेश कानूनी कसौटी पर टिकता नहीं है। अदालत ने साफ किया कि ऐसे मामलों में सरकार को ठोस और स्वतंत्र सामग्री के आधार पर कार्रवाई करनी चाहिए।
इस फैसले के बाद मुल्ला अफरोज की NSA के तहत हिरासत खत्म हो गई है। साथ ही यूपी सरकार को 10 लाख रुपये का जुर्माना भरने का आदेश दिया गया है।





