उत्तर प्रदेश

BHU में 19 दिन बाद खत्म हुआ छात्रों का आंदोलन

Ratna Netam
10 Oct 2026 8:30 PM IST
BHU में 19 दिन बाद खत्म हुआ छात्रों का आंदोलन
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वाराणसी। बनारस हिंदू विश्वविद्यालय (BHU) में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) की विश्वविद्यालय इकाई के नेतृत्व में पिछले 19 दिनों से चल रहा छात्र आंदोलन शनिवार को समाप्त हो गया। छात्रों की सुरक्षा, सम्मान, पारदर्शिता और न्याय से जुड़ी 10 मांगों को लेकर यह आंदोलन किया जा रहा था। विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर अजीत कुमार चतुर्वेदी के हस्तक्षेप के बाद प्रदर्शनकारी छात्रों ने अपनी भूख हड़ताल समाप्त कर दी। कुलपति ने स्वयं धरनास्थल पर पहुंचकर छात्रों से बातचीत की और उनकी मांगों पर विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से लिए गए फैसलों तथा प्रस्तावित कार्रवाई की लिखित जानकारी दी।आंदोलन समाप्त होने के साथ विश्वविद्यालय प्रशासन ने छात्रों से जुड़े मामलों में एक महत्वपूर्ण अंतरिम व्यवस्था भी की है। इसके तहत जांच समिति की रिपोर्ट आने तक चीफ प्रॉक्टर छात्रों से संबंधित मामलों में अपनी शक्तियों का इस्तेमाल नहीं करेंगे। इस अवधि में ऐसे मामलों पर निर्णय लेने की जिम्मेदारी कुलपति के पास रहेगी। इस फैसले को आंदोलन के महत्वपूर्ण परिणामों में शामिल किया जा रहा है।
19 दिनों से चल रहा था छात्र आंदोलन
बनारस हिंदू विश्वविद्यालय में एबीवीपी की विश्वविद्यालय इकाई के नेतृत्व में छात्र अपनी विभिन्न मांगों को लेकर आंदोलन कर रहे थे।यह आंदोलन लगातार 19 दिनों तक चला। इस दौरान छात्रों ने विश्वविद्यालय प्रशासन के सामने सुरक्षा, सम्मान, पारदर्शिता और न्याय से जुड़े मुद्दे उठाए।प्रदर्शनकारी छात्रों की कुल 10 मांगें थीं। इन्हीं मांगों को लेकर आंदोलन जारी रखा गया था।छात्रों का कहना था कि विश्वविद्यालय में उनके अधिकारों और सुरक्षा से जुड़े मामलों पर उचित ध्यान दिया जाना चाहिए।आंदोलन के दौरान कुछ छात्र भूख हड़ताल पर भी बैठे थे।शनिवार को कुलपति के हस्तक्षेप के बाद आंदोलन समाप्त करने का निर्णय लिया गया।
कुलपति खुद पहुंचे धरनास्थल
आंदोलन समाप्त कराने के लिए विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर अजीत कुमार चतुर्वेदी स्वयं प्रदर्शनस्थल पर पहुंचे।उन्होंने भूख हड़ताल पर बैठे छात्रों से बातचीत की और उनकी मांगों के संबंध में विश्वविद्यालय प्रशासन की स्थिति स्पष्ट की।कुलपति ने छात्रों को बताया कि प्रशासन ने उनकी मांगों पर क्या फैसले लिए हैं और आगे किन विषयों पर कार्रवाई प्रस्तावित है।महत्वपूर्ण बात यह रही कि छात्रों को इन फैसलों और प्रस्तावित कदमों की लिखित जानकारी भी उपलब्ध कराई गई।इसके बाद छात्रों ने अपनी भूख हड़ताल समाप्त कर दी।कुलपति की ओर से सीधे बातचीत करने और लिखित जवाब दिए जाने के बाद 19 दिनों से चल रहा आंदोलन समाप्त हुआ।
चीफ प्रॉक्टर की शक्तियों पर अंतरिम रोक
इस आंदोलन का सबसे महत्वपूर्ण परिणाम चीफ प्रॉक्टर की शक्तियों से जुड़ा फैसला रहा।विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से की गई व्यवस्था के अनुसार, जांच समिति की रिपोर्ट आने तक चीफ प्रॉक्टर छात्रों से जुड़े मामलों में अपनी शक्तियों का प्रयोग नहीं करेंगे।इस अवधि में छात्रों से संबंधित मामलों पर निर्णय कुलपति स्वयं लेंगे।
यह व्यवस्था जांच रिपोर्ट आने तक लागू रहेगी।
हालांकि, उपलब्ध जानकारी में जांच समिति की संरचना, उसकी जांच के विषयों और रिपोर्ट प्रस्तुत करने की समयसीमा का विस्तृत विवरण नहीं दिया गया है।इसलिए इसे चीफ प्रॉक्टर के पद से हटाए जाने या किसी आरोप के सिद्ध होने के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।यह फिलहाल छात्रों से संबंधित निर्णयों के लिए की गई अंतरिम प्रशासनिक व्यवस्था है।
छात्रों की सुरक्षा और सम्मान का मुद्दा
एबीवीपी के नेतृत्व में चल रहे आंदोलन की प्रमुख मांगों में छात्रों की सुरक्षा और सम्मान से जुड़े विषय शामिल थे।प्रदर्शनकारी छात्र चाहते थे कि विश्वविद्यालय में उनकी समस्याओं को गंभीरता से लिया जाए।छात्रों की सुरक्षा किसी भी शिक्षण संस्थान की महत्वपूर्ण जिम्मेदारियों में शामिल होती है।इसके साथ ही विद्यार्थियों की शिकायतों को सुनने और उनका उचित समाधान करने के लिए पारदर्शी व्यवस्था की आवश्यकता होती है।बीएचयू में चले आंदोलन के दौरान इन्हीं मुद्दों को प्रमुखता से उठाया गया।हालांकि, छात्रों की सभी 10 मांगों का अलग-अलग विवरण उपलब्ध नहीं है। ऐसे में किसी अतिरिक्त मांग या विशेष घटना को इस आंदोलन से जोड़ना उचित नहीं होगा।
पारदर्शिता और न्याय की मांग पर जोर
छात्र आंदोलन में पारदर्शिता और न्याय की मांग भी प्रमुख रही।प्रदर्शनकारी छात्र विश्वविद्यालय प्रशासन से अपनी मांगों पर स्पष्ट निर्णय चाहते थे।कुलपति द्वारा लिखित जानकारी उपलब्ध कराना इस दृष्टि से महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।लिखित जवाब मिलने से छात्रों को यह जानने का अवसर मिला कि उनकी मांगों के संबंध में प्रशासन ने कौन-से फैसले लिए हैं और आगे क्या कार्रवाई प्रस्तावित है।हालांकि, लिखित आश्वासन और सभी मांगों के पूर्ण समाधान में अंतर होता है।उपलब्ध जानकारी के अनुसार, आंदोलन समाप्त हो गया है, लेकिन प्रस्तावित कार्रवाई का क्रियान्वयन आगे की प्रशासनिक प्रक्रिया पर निर्भर करेगा।
भूख हड़ताल पर बैठे छात्रों से हुई बातचीत
आंदोलन के दौरान भूख हड़ताल पर बैठे छात्रों से कुलपति ने सीधे संवाद किया।इस बातचीत में विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से मांगों पर लिए गए फैसलों की जानकारी साझा की गई।छात्रों को लिखित जवाब मिलने के बाद भूख हड़ताल समाप्त कराई गई।किसी भी लंबे छात्र आंदोलन में संवाद की भूमिका महत्वपूर्ण होती है।बीएचयू में भी प्रशासन और प्रदर्शनकारी छात्रों के बीच हुई बातचीत के बाद आंदोलन समाप्त हुआ।हालांकि, भूख हड़ताल पर बैठे छात्रों की कुल संख्या और उनके स्वास्थ्य संबंधी स्थिति का विवरण उपलब्ध नहीं है।
जांच समिति की रिपोर्ट पर रहेंगी निगाहें
विश्वविद्यालय में छात्रों से संबंधित मामलों में चीफ प्रॉक्टर की शक्तियों के इस्तेमाल पर लगाई गई अंतरिम रोक जांच समिति की रिपोर्ट से जुड़ी हुई है।इसका अर्थ है कि आगे की प्रशासनिक स्थिति रिपोर्ट आने के बाद स्पष्ट हो सकेगी।फिलहाल छात्रों से जुड़े मामलों में निर्णय लेने की जिम्मेदारी कुलपति संभालेंगे।जांच समिति की रिपोर्ट में क्या निष्कर्ष सामने आते हैं और उसके आधार पर विश्वविद्यालय प्रशासन क्या कदम उठाता है, यह आगे की प्रक्रिया का हिस्सा होगा।विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से इस संबंध में किसी अंतिम कार्रवाई की जानकारी अभी उपलब्ध नहीं है।
विश्वविद्यालय में सामान्य स्थिति बहाल होने की उम्मीद
लगातार 19 दिनों तक चले आंदोलन के समाप्त होने के बाद विश्वविद्यालय परिसर में आंदोलन से जुड़ी गतिविधियां खत्म होने का रास्ता साफ हुआ है।एबीवीपी की विश्वविद्यालय इकाई के नेतृत्व में छात्रों ने अपनी 10 मांगों को लेकर विरोध प्रदर्शन किया था।कुलपति प्रोफेसर अजीत कुमार चतुर्वेदी के धरनास्थल पर पहुंचने, छात्रों से बातचीत करने और लिखित जानकारी उपलब्ध कराने के बाद आंदोलन समाप्त हुआ।इस घटनाक्रम ने विश्वविद्यालय प्रशासन और छात्रों के बीच संवाद के महत्व को भी सामने रखा है।अब छात्रों की मांगों पर लिए गए फैसलों के क्रियान्वयन और जांच समिति की रिपोर्ट पर ध्यान रहेगा।
कुलपति के हस्तक्षेप से निकला समाधान
बनारस हिंदू विश्वविद्यालय में 19 दिनों तक चला छात्र आंदोलन कुलपति के हस्तक्षेप के बाद समाप्त हो गया है।आंदोलन का प्रमुख परिणाम यह रहा कि जांच रिपोर्ट आने तक चीफ प्रॉक्टर छात्रों से संबंधित मामलों में अपनी शक्तियों का इस्तेमाल नहीं करेंगे।इस दौरान कुलपति स्वयं ऐसे मामलों में निर्णय लेंगे।छात्रों को उनकी मांगों पर प्रशासनिक फैसलों और प्रस्तावित कार्रवाई की लिखित जानकारी भी दी गई है।हालांकि, आंदोलन समाप्त होने के बावजूद सभी मांगों के पूर्ण समाधान और जांच समिति के अंतिम निष्कर्ष की स्थिति आगे स्पष्ट होगी।
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