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उत्तर प्रदेश
बिस्किट देकर छात्रों से कराया प्रदर्शन, 3 शिक्षक निलंबित
Rajeshwari Nishad
16 Oct 2026 11:14 PM IST

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कन्नौज। उत्तर प्रदेश के कन्नौज जिले के पीएमश्री कंपोजिट विद्यालय गुगरापुर में छात्रों द्वारा किए गए घेराव और प्रदर्शन के मामले में बड़ा खुलासा हुआ है। 20 अगस्त 2026 को विद्यालय में हुए हंगामे के पीछे शिक्षकों की आपसी गुटबाजी और बच्चों को कथित तौर पर लालच देकर प्रदर्शन कराने का मामला सामने आया है। जांच रिपोर्ट में आरोप लगाया गया है कि बच्चों को बिस्किट के पैकेट बांटकर इंचार्ज प्रधानाध्यापक के खिलाफ नारेबाजी करने के लिए उकसाया गया था। मामले को गंभीरता से लेते हुए बेसिक शिक्षा विभाग ने प्रभारी प्रधानाध्यापक राकेंद्र सक्सेना और दो सहायक अध्यापकों को निलंबित कर दिया है।
इस कार्रवाई के बाद जिले के शिक्षा विभाग में हलचल तेज हो गई है। अधिकारियों का कहना है कि विद्यालय के अंदर चल रहे विवाद में बच्चों को शामिल करना गंभीर विषय है। मामले की विभागीय जांच अभी जारी है और आरोपों के आधार पर संबंधित शिक्षकों की जिम्मेदारी तय की जा रही है।
20 अगस्त को बच्चों ने किया था जोरदार प्रदर्शन
घटना 20 अगस्त 2026 की है। उस दिन गुगरापुर स्थित पीएमश्री कंपोजिट विद्यालय के बड़ी संख्या में छात्र-छात्राओं ने कक्षाओं का बहिष्कार कर विद्यालय परिसर के बाहर प्रदर्शन शुरू कर दिया था।
बच्चों ने तत्कालीन प्रभारी प्रधानाध्यापक राकेंद्र सक्सेना के खिलाफ नारेबाजी की थी। इस दौरान छात्रों ने उनकी कार को घेर लिया और विद्यालय के मुख्य द्वार पर भी हंगामा किया।कुछ बच्चों ने आरोप लगाया था कि विद्यालय में उनके साथ उचित व्यवहार नहीं किया जा रहा है। छात्रों ने कंप्यूटर शिक्षा की व्यवस्था पर भी सवाल उठाए थे।प्रदर्शन के दौरान विद्यालय में पढ़ाई बाधित हो गई थी। सूचना मिलने पर पुलिस और शिक्षा विभाग के अधिकारी मौके पर पहुंचे और बच्चों तथा अभिभावकों से बातचीत की।
बिस्किट देकर प्रदर्शन कराने का आरोप
विद्यालय में हुए हंगामे की जांच के दौरान एक चौंकाने वाली बात सामने आई। जांच में यह आरोप सामने आया कि कुछ लोगों ने छात्रों को बिस्किट के पैकेट दिए और उन्हें प्रधानाध्यापक के खिलाफ प्रदर्शन करने के लिए उकसाया।इससे पहले भी अधिकारियों के सामने कुछ बच्चों ने बताया था कि उन्हें बिस्किट दिए गए थे और प्रदर्शन में शामिल होने के लिए प्रेरित किया गया था।
इस जानकारी के बाद शिक्षा विभाग ने मामले को गंभीरता से लिया। अधिकारियों ने यह पता लगाने का प्रयास किया कि बच्चों को प्रदर्शन के लिए किसने तैयार किया और इसके पीछे क्या उद्देश्य था।
जांच में शिक्षकों के बीच आपसी मतभेद और गुटबाजी की बात सामने आने के बाद कार्रवाई की गई। हालांकि, आरोपों पर अंतिम निष्कर्ष विभागीय जांच पूरी होने के बाद ही निकलेगा।
प्रधानाध्यापक समेत तीन शिक्षक निलंबित
मामले में बेसिक शिक्षा अधिकारी संदीप कुमार ने कार्रवाई करते हुए विद्यालय के तीन शिक्षकों को निलंबित किया है।निलंबित शिक्षकों में प्रभारी प्रधानाध्यापक राकेंद्र सक्सेना, सहायक अध्यापक नीरज यादव और सहायक अध्यापक रामकिशोर सिंह शामिल हैं।शिक्षा विभाग की कार्रवाई में विद्यालय के प्रशासनिक विवाद और छात्रों को कथित तौर पर प्रदर्शन के लिए उकसाने से जुड़े आरोपों को आधार बनाया गया है।नीरज यादव और रामकिशोर सिंह पर आरोप है कि उन्होंने कुछ स्थानीय लोगों के साथ मिलकर छात्रों को प्रदर्शन में शामिल कराने की साजिश रची।वहीं, प्रभारी प्रधानाध्यापक राकेंद्र सक्सेना के खिलाफ भी प्रशासनिक और अन्य संबंधित आरोपों को लेकर कार्रवाई की गई है।विभाग ने तीनों शिक्षकों के मामलों में आगे जांच कराने का निर्णय लिया है।
शिक्षकों की गुटबाजी से प्रभावित हुई पढ़ाई
विद्यालय के अंदर लंबे समय से आपसी मतभेद होने की बात सामने आई है।आरोप है कि शिक्षकों के बीच चल रहे विवाद का असर विद्यालय की शैक्षणिक गतिविधियों पर पड़ रहा था। इसी विवाद के चलते बच्चों का प्रदर्शन सामने आने की बात कही जा रही है।शिक्षण संस्थानों में शिक्षक और विद्यालय प्रबंधन के बीच समन्वय बेहद जरूरी होता है।यदि कर्मचारियों के बीच विवाद लगातार बढ़ता रहे, तो उसका असर विद्यार्थियों की पढ़ाई, अनुशासन और मानसिक स्थिति पर पड़ सकता है।गुगरापुर विद्यालय में हुई घटना ने यह सवाल खड़ा किया है कि विद्यालय के आंतरिक विवाद में छोटे बच्चों की कथित भागीदारी कैसे कराई गई।
छात्रों ने लगाए थे गंभीर आरोप
20 अगस्त को प्रदर्शन करने वाले बच्चों ने प्रभारी प्रधानाध्यापक के व्यवहार को लेकर कई शिकायतें की थीं।छात्रों का कहना था कि विद्यालय में कंप्यूटर की पढ़ाई ठीक से नहीं होती है। कुछ बच्चों ने आरोप लगाया था कि उनसे सफाई से संबंधित काम भी कराए जाते हैं।इसके अलावा विद्यालय में भेदभावपूर्ण व्यवहार किए जाने की शिकायत भी सामने आई थी।इन आरोपों के बाद बच्चों ने प्रधानाध्यापक को हटाने की मांग की थी।हालांकि, बच्चों की मूल शिकायतों और उन्हें कथित तौर पर उकसाने के आरोप की अलग-अलग जांच आवश्यक है। बच्चों को प्रदर्शन के लिए प्रेरित किए जाने की बात सामने आने से उनकी अन्य शिकायतें स्वतः गलत साबित नहीं होतीं।
पहले अज्ञात लोगों के खिलाफ दर्ज हुई थी एफआईआर
विद्यालय में हुए प्रदर्शन के बाद शिक्षा विभाग ने पुलिस में भी शिकायत दर्ज कराई थी।हसेरन और गुगरापुर के शिक्षा अधिकारियों की ओर से दी गई शिकायत के आधार पर अज्ञात लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई।शिकायत में कहा गया था कि विद्यालय में कुछ लोगों ने छात्र-छात्राओं को बिस्किट बांटकर और लालच देकर प्रदर्शन के लिए उकसाया।प्रदर्शन के दौरान बच्चों ने शिक्षण कार्य का बहिष्कार किया और प्रधानाध्यापक की कार रोक ली थी।इस मामले में वायरल वीडियो और बच्चों के बयानों को भी जांच का हिस्सा बनाया गया।
हंगामे के बाद विद्यालय में दोबारा शुरू हुई पढ़ाई
20 अगस्त को हुए प्रदर्शन के कारण विद्यालय की सामान्य गतिविधियां प्रभावित हुई थीं।
इसके बाद शिक्षा विभाग ने विद्यालय में पढ़ाई को सामान्य बनाने के लिए कदम उठाए।22 अगस्त को खंड शिक्षा अधिकारी विश्वनाथ पाठक की मौजूदगी में विद्यालय में प्रार्थना सभा आयोजित की गई और शिक्षण कार्य दोबारा शुरू कराया गया।उस दिन विद्यालय में पंजीकृत कुल 435 विद्यार्थियों में से 261 छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे।
इनमें 137 छात्र और 124 छात्राएं शामिल थीं।
शिक्षा अधिकारियों ने कक्षाओं का निरीक्षण कर विद्यालय की व्यवस्थाओं की जानकारी ली थी।दो खंड शिक्षा अधिकारियों को सौंपी गई जांचताजा कार्रवाई के बाद बेसिक शिक्षा विभाग ने मामले की विस्तृत जांच का जिम्मा संबंधित अधिकारियों को सौंपा है।जानकारी के अनुसार, कन्नौज सदर और उमर्दा के खंड शिक्षा अधिकारियों को विभागीय जांच की जिम्मेदारी दी गई है।जांच में शिक्षकों के बीच विवाद, विद्यालय प्रशासन की कार्यप्रणाली और छात्रों को प्रदर्शन में शामिल कराने से जुड़े आरोपों की पड़ताल की जाएगी।इसके अलावा यह भी देखा जाएगा कि विद्यालय में बच्चों के साथ किसी प्रकार का अनुचित व्यवहार हुआ था या नहीं।विभागीय जांच रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई की जा सकती है।
बच्चों को विवाद में शामिल करना गंभीर मामला
इस पूरे प्रकरण ने सरकारी विद्यालयों में शिक्षकों की जिम्मेदारी और बच्चों की सुरक्षा को लेकर महत्वपूर्ण सवाल खड़े किए हैं।विद्यालय में पढ़ने वाले बच्चे शिक्षा प्राप्त करने आते हैं। ऐसे में शिक्षकों के आपसी विवाद में उनका इस्तेमाल किए जाने का आरोप बेहद गंभीर है।शिक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, विद्यालय का वातावरण ऐसा होना चाहिए, जहां बच्चे बिना किसी दबाव के अपनी शिकायतें रख सकें।इसके साथ ही उनकी शिकायतों को निष्पक्ष रूप से सुनना और आवश्यक कार्रवाई करना प्रशासन की जिम्मेदारी है।यदि किसी मामले में बच्चों को लालच देकर प्रदर्शन में शामिल कराने की पुष्टि होती है, तो यह शिक्षकीय आचरण और संस्थागत अनुशासन से जुड़ा गंभीर विषय होगा।
विभागीय जांच के बाद होगी आगे की कार्रवाई
पीएमश्री कंपोजिट विद्यालय गुगरापुर में हुए प्रदर्शन के मामले में लगभग दो महीने बाद बड़ी प्रशासनिक कार्रवाई हुई है।तीन शिक्षकों का निलंबन इस मामले में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। हालांकि, निलंबन अपने आप में आरोपों के अंतिम रूप से सिद्ध होने का प्रमाण नहीं है।शिक्षा विभाग अब संबंधित अधिकारियों की रिपोर्ट के आधार पर आगे निर्णय लेगा।फिलहाल इस घटना ने स्पष्ट किया है कि शिक्षण संस्थानों में आंतरिक विवादों का समय रहते समाधान करना जरूरी है, ताकि बच्चों की पढ़ाई और उनका शैक्षणिक वातावरण प्रभावित न हो।
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