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नोएडा। गौतमबुद्ध यूनिवर्सिटी के छात्र अक्षत त्रिपाठी के खिलाफ ग्रेटर नोएडा प्रशासन ने बड़ी कार्रवाई की है। दिल्ली के जंतर-मंतर पर आयोजित एक प्रदर्शन में शामिल होने के बाद छात्र पर कथित रूप से शांति भंग करने से जुड़ी धाराओं के तहत 5 लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया है। प्रशासन की इस कार्रवाई के बाद छात्र संगठनों और राजनीतिक हलकों में बहस शुरू हो गई है।
अक्षत त्रिपाठी गौतमबुद्ध यूनिवर्सिटी में छात्र हैं और वह स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (SFI) की उत्तर प्रदेश स्टेट कमेटी के सदस्य भी बताए जा रहे हैं। एसएफआई ने प्रशासन की कार्रवाई की कड़ी आलोचना की है और इसे छात्रों को डराने और उनकी आवाज दबाने की कोशिश बताया है।
जंतर-मंतर प्रदर्शन में शामिल हुए थे अक्षत
जानकारी के मुताबिक, अक्षत त्रिपाठी दिल्ली के जंतर-मंतर पर आयोजित कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के विरोध प्रदर्शन में शामिल हुए थे। इसी प्रदर्शन को लेकर प्रशासन ने उनके खिलाफ कार्रवाई की है।
प्रशासन का कहना है कि प्रदर्शन के दौरान ऐसी गतिविधियां हुईं, जिनसे शांति व्यवस्था प्रभावित होने की आशंका थी। इसी आधार पर ग्रेटर नोएडा के एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट की ओर से छात्र के खिलाफ शांति भंग से जुड़ी धाराओं के तहत कार्रवाई की गई।
5 लाख रुपये का लगाया गया जुर्माना
प्रशासन की ओर से अक्षत त्रिपाठी पर 5 लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया है। यह कार्रवाई शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए प्रशासनिक प्रक्रिया के तहत की गई बताई जा रही है।
हालांकि, छात्र संगठन इस कार्रवाई को लेकर सवाल उठा रहे हैं। उनका कहना है कि किसी लोकतांत्रिक विरोध प्रदर्शन में शामिल होने के कारण छात्र पर इतनी बड़ी आर्थिक कार्रवाई करना उचित नहीं है।
SFI ने जताया विरोध
स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (SFI) ने इस मामले में सरकार और प्रशासन की आलोचना की है। संगठन का कहना है कि छात्रों की आवाज को दबाने के लिए प्रशासनिक कार्रवाई का इस्तेमाल किया जा रहा है।
एसएफआई ने आरोप लगाया कि अक्षत त्रिपाठी को केवल इसलिए निशाना बनाया गया क्योंकि उन्होंने एक विरोध प्रदर्शन में हिस्सा लिया था। संगठन ने इसे छात्रों के लोकतांत्रिक अधिकारों पर हमला बताया।
छात्रों को डराने की कोशिश का आरोप
एसएफआई नेताओं का कहना है कि इस तरह की कार्रवाई से छात्रों में डर का माहौल पैदा करने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में शांतिपूर्ण प्रदर्शन करना नागरिकों का अधिकार है और किसी भी छात्र को अपनी बात रखने के लिए परेशान नहीं किया जाना चाहिए।
संगठन ने प्रशासन से कार्रवाई वापस लेने की मांग की है। साथ ही चेतावनी दी है कि यदि छात्र के खिलाफ कार्रवाई जारी रहती है तो छात्र संगठन आंदोलन का रास्ता अपना सकते हैं।
प्रशासन की कार्रवाई पर उठे सवाल
इस मामले में प्रशासन की कार्रवाई को लेकर कई सवाल भी उठ रहे हैं। छात्र संगठनों का कहना है कि शांति भंग की आशंका के आधार पर इतनी बड़ी राशि का जुर्माना लगाना कठोर कदम है।
वहीं प्रशासनिक अधिकारियों का तर्क है कि कानून व्यवस्था बनाए रखना उनकी जिम्मेदारी है और यदि किसी गतिविधि से शांति व्यवस्था प्रभावित होने की संभावना होती है तो नियमों के अनुसार कार्रवाई की जाती है।
विश्वविद्यालय के छात्रों में चर्चा
गौतमबुद्ध यूनिवर्सिटी में भी यह मामला चर्चा का विषय बना हुआ है। छात्रों के बीच प्रशासनिक कार्रवाई को लेकर अलग-अलग राय सामने आ रही है।
कुछ छात्रों का कहना है कि कानून व्यवस्था बनाए रखना जरूरी है, जबकि कुछ छात्र संगठनों का मानना है कि विरोध और असहमति की आवाज को दबाने के लिए कार्रवाई नहीं होनी चाहिए।
लोकतांत्रिक अधिकार बनाम प्रशासनिक कार्रवाई
अक्षत त्रिपाठी पर हुई कार्रवाई ने एक बार फिर विरोध प्रदर्शन, छात्रों की भागीदारी और प्रशासनिक अधिकारों को लेकर बहस छेड़ दी है।
जहां प्रशासन इसे शांति व्यवस्था बनाए रखने की प्रक्रिया बता रहा है, वहीं छात्र संगठन इसे अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता से जोड़कर देख रहे हैं। आने वाले दिनों में यह मामला और तूल पकड़ सकता है।
फिलहाल अक्षत त्रिपाठी पर लगाए गए 5 लाख रुपये के जुर्माने को लेकर छात्र संगठनों की ओर से विरोध जारी है। वहीं प्रशासन अपने फैसले को नियमों के तहत की गई कार्रवाई बता रहा है।





